अयोध्या का वर्णन – श्लोक 2

संस्कृत श्लोक

येषां स सगरो नाम सागरो येन खानितः। षष्टिपुत्रसहस्राणि यं यान्तं पर्यवारयन्॥

हिंदी अनुवाद

उन राजाओं में सगर नामक राजा हुए, जिन्होंने सागर (समुद्र) की खुदाई करवाई। उनके साठ हजार पुत्र उनके पीछे-पीछे चलते थे।

अर्थ / व्याख्या

इस श्लोक में सगर राजा का वर्णन है, जिन्होंने सागर (समुद्र) की खुदाई करवाई और उनके साठ हजार पुत्र थे। यह इक्ष्वाकु वंश के एक प्रतापी राजा का उल्लेख है।

टिप्पणी

सगर राजा की कथा रामायण और पुराणों में प्रसिद्ध है। उनके पुत्रों के कारण ही समुद्र को सागर कहा जाता है।

॥ श्री रामायण – बालकाण्ड – सर्ग ५ – श्लोक २ ॥

येषां स सगरो नाम सागरो येन खानितः।
षष्टिपुत्रसहस्राणि यं यान्तं पर्यवारयन्॥
yeṣāṃ sa sagaro nāma sāgaro yena khānitaḥ |
ṣaṣṭiputrasahasrāṇi yaṃ yāntaṃ paryavārayan ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : उन राजाओं में सगर नामक राजा हुए, जिन्होंने सागर (समुद्र) की खुदाई करवाई। उनके साठ हजार पुत्र उनके पीछे-पीछे चलते थे।

🔹 English Translation : Among those kings was the one named Sagara, who excavated the ocean. His sixty thousand sons used to follow him when he went out.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
येषाम्सर्वनाम, पुल्लिंग, षष्ठी बहुवचनउन (राजाओं) में
सर्वनाम, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनवह
सगरःपुल्लिंग, प्रथमा एकवचनसगर राजा
नामअव्ययनामक
सागरःपुल्लिंग, प्रथमा एकवचनसमुद्र
येनसर्वनाम, पुल्लिंग, तृतीया एकवचनजिसके द्वारा
खानितःक्रिया (खन् धातु) निष्ठा, प्रथमा एकवचनखोदा गया
षष्टिपुत्रसहस्राणिबहुवचन, प्रथमासाठ हजार पुत्र
यम्सर्वनाम, पुल्लिंग, द्वितीया एकवचनजिसको
यान्तम्कृदंत (या धातु), पुल्लिंग, द्वितीया एकवचनजाते हुए
पर्यवारयन्क्रिया, पर + आ + वृ, लङ्, प्रथमपुरुष बहुवचनचारों ओर से घेरते थे

📖 पौराणिक संदर्भ

राजा सगर इक्ष्वाकु वंश के प्रसिद्ध राजा थे। उनके साठ हजार पुत्रों का उल्लेख रामायण और महाभारत में मिलता है। सगर ने अश्वमेध यज्ञ किया और उनके घोड़े को इंद्र ने चुराकर पाताल में कपिल मुनि के आश्रम में बाँध दिया। साठ हजार पुत्रों ने पृथ्वी खोदते हुए वहाँ पहुँचकर कपिल मुनि का अपमान किया, जिससे क्रोधित मुनि ने उन्हें भस्म कर दिया। बाद में सगर के पौत्र अंशुमान और फिर भगीरथ ने गंगा को लाकर उनका उद्धार किया। इसीलिए गंगा को भागीरथी भी कहा जाता है।

🕉️ सीख

यह श्लोक हमें बताता है कि राजा सगर ने सागर खोदकर एक महान कार्य किया, पर उनके पुत्रों के अहंकार के कारण उनका विनाश हुआ। इससे सीख मिलती है कि विनम्रता और ऋषियों का आदर आवश्यक है।