अयोध्या का वर्णन – श्लोक 1

संस्कृत श्लोक

सर्वा पूर्वमियं येषामासीत् कृत्स्ना वसुंधरा। प्रजापतिमुपादाय नृपाणां जयशालिनाम्॥

हिंदी अनुवाद

यह सम्पूर्ण वसुंधरा पहले उन जयशाली राजाओं के अधीन थी, जिन्होंने प्रजापति (मनु) से लेकर (राज्य किया)।

अर्थ / व्याख्या

यह श्लोक उन प्रतापी राजाओं की वंश परंपरा का उल्लेख करता है जिनके अधीन सम्पूर्ण पृथ्वी थी। इसमें इक्ष्वाकु वंश की महानता का संकेत है।

टिप्पणी

यह श्लोक बालकाण्ड के पाँचवें सर्ग का प्रथम श्लोक है, जिसमें अयोध्या के राजवंश की पृष्ठभूमि बताई गई है।

॥ श्री रामायण – बालकाण्ड – सर्ग ५ – श्लोक १ ॥

सर्वा पूर्वमियं येषामासीत् कृत्स्ना वसुंधरा।
प्रजापतिमुपादाय नृपाणां जयशालिनाम्॥
sarvā pūrvam iyaṃ yeṣām āsīd kṛtsnā vasundharā |
prajāpatim upādāya nṛpāṇāṃ jayaśālinām ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : यह सम्पूर्ण वसुंधरा पहले उन जयशाली राजाओं के अधीन थी, जिन्होंने प्रजापति (मनु) से लेकर (राज्य किया)।

🔹 English Translation : This entire earth was formerly under those victorious kings, starting from Prajapati (Manu).

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
सर्वाविशेषण, स्त्रीलिंग, प्रथमा एकवचनसम्पूर्ण
पूर्वम्अव्ययपहले, प्राचीन काल में
इयम्सर्वनाम, स्त्रीलिंग, प्रथमा एकवचनयह (पृथ्वी)
येषाम्सर्वनाम, पुल्लिंग, षष्ठी बहुवचनजिनके (राजाओं के)
आसीत्क्रिया, अनद्यतन भूत, प्रथमपुरुष एकवचन (अस् धातु)थी
कृत्स्नाविशेषण, स्त्रीलिंग, प्रथमा एकवचनसम्पूर्ण
वसुंधरास्त्रीलिंग, प्रथमा एकवचनपृथ्वी (वसु धारण करने वाली)
प्रजापतिम्पुल्लिंग, द्वितीया एकवचनप्रजापति (मनु) को
उपादायअव्यय (ल्यबन्त)आदि करके, प्रारम्भ करके
नृपाणाम्पुल्लिंग, षष्ठी बहुवचनराजाओं के
जयशालिनाम्विशेषण, पुल्लिंग, षष्ठी बहुवचनजयशाली, विजयी

📖 व्याख्या एवं महत्त्व

यह श्लोक अयोध्या के राजवंश – इक्ष्वाकु वंश – की प्राचीनता और प्रताप का बखान करता है। वाल्मीकि जी कहते हैं कि यह सारी पृथ्वी पहले उन विजयी राजाओं के अधीन थी जो प्रजापति मनु से आरम्भ होते हैं। मनु वैवस्वत मनु हैं, जिनसे सूर्यवंश की उत्पत्ति मानी जाती है। इस प्रकार यह श्लोक राम के कुल की महिमा स्थापित करता है और श्रोता को रामायण की कथा सुनने के लिए तैयार करता है।

🕉️ आध्यात्मिक संदेश

यहाँ राजाओं की जयशालिता (विजय) का वर्णन केवल भौतिक विजय नहीं, बल्कि धर्म की स्थापना में उनकी सफलता का सूचक है। रामायण में वर्णित राजा धर्म के मार्ग पर चलने वाले और प्रजापालक होते हैं। यह श्लोक हमें सिखाता है कि सच्चा राजा वही है जो प्रजा का पालन करे और धर्म की रक्षा करे।

॥ इक्ष्वाकूणां महदुत्पन्नमाख्यानं रामायणम् ॥

जय श्री राम 🙏