संस्कृत श्लोक

रसैः शृङ्गारकारुण्यहास्यवीरभयानकैः। रौद्रादिभिश्च संयुक्तं काव्यमेतदगायताम्॥

हिंदी अनुवाद

शृंगार, करुण, हास्य, वीर, भयानक, रौद्र आदि रसों से युक्त इस काव्य को उन दोनों ने गाया।

अर्थ / व्याख्या

रामायण में अनेक रसों का समावेश है, जिन्हें कुश-लव ने गाया।

टिप्पणी

यह श्लोक रामायण में निहित रसों की सूची देता है: शृंगार (राम-सीता का प्रेम), करुण (सीता हरण, राम का विलाप), हास्य (हास्य प्रसंग), वीर (युद्ध), भयानक (राक्षसों का भय), रौद्र (राम का क्रोध)।

॥ श्री वाल्मीकि रामायण – बालकाण्ड – सर्ग ४ – श्लोक ९ ॥

रसैः शृङ्गारकारुण्यहास्यवीरभयानकैः। रौद्रादिभिश्च संयुक्तं काव्यमेतदगायताम्॥
rasaiḥ śṛṅgārakāruṇyahāsyavīrabhayānakaiḥ | raudrādibhiśca saṃyuktaṃ kāvyametadagāyatām ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : शृंगार, करुण, हास्य, वीर, भयानक, रौद्र आदि रसों से युक्त इस काव्य को उन दोनों ने गाया।

🔹 English Translation : They both sang this epic, which is endowed with the rasas (sentiments) of erotic, pathetic, comic, heroic, terrible, fierce, etc.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
रसैःतृतीया बहुवचनरसों के द्वारा
शृङ्गार...भयानकैःतृतीया बहुवचनशृंगार आदि रसों से
रौद्रादिभिःतृतीया बहुवचनरौद्र आदि से
अव्ययऔर
संयुक्तम्द्वितीया एकवचनयुक्त
काव्यम्द्वितीया एकवचनकाव्य को
एतत्द्वितीया एकवचनइस
अगायताम्लङ्, द्विवचनदोनों ने गाया

📜 नवरसों से परिपूर्ण रामायण

रामायण में समस्त नवरसों का प्रयोग हुआ है। यहाँ छः रसों के नाम दिए गए हैं – शृंगार, करुण, हास्य, वीर, भयानक, रौद्र। शेष रस (अद्भुत, शांत, वात्सल्य) भी अंतर्निहित हैं। कुश-लव ने इन रसों के साथ काव्य का गायन किया, जिससे श्रोताओं पर गहरा प्रभाव पड़ा।