संस्कृत श्लोक

पाठ्ये गेये च मधुरं प्रमाणैस्त्रिभिरन्वितम्। जातिभिः सप्तभिर्बद्धं तन्त्रीलयसमन्वितम्॥

हिंदी अनुवाद

यह काव्य पढ़ने और गाने में मधुर है, तीन प्रमाणों (गति- द्रुत, मध्य, विलम्बित) से युक्त है, सात स्वरों (षड्ज आदि) से बद्ध है तथा वीणा और ताल के साथ समन्वित है।

अर्थ / व्याख्या

रामायण के गायन की संगीतात्मक विशेषताएँ: तीन लय, सात स्वर, वीणा और ताल।

टिप्पणी

यह श्लोक रामायण के गायन शैली का वर्णन करता है। यह केवल पाठ्य नहीं, गेय भी है। तीन प्रमाण – द्रुत, मध्य, विलम्बित लय। सात स्वर – षड्ज, ऋषभ, गांधार, मध्यम, पंचम, धैवत, निषाद। तन्त्री – वीणा और लय – ताल के साथ गाया जाता था।

॥ श्री वाल्मीकि रामायण – बालकाण्ड – सर्ग ४ – श्लोक ८ ॥

पाठ्ये गेये च मधुरं प्रमाणैस्त्रिभिरन्वितम्। जातिभिः सप्तभिर्बद्धं तन्त्रीलयसमन्वितम्॥
pāṭhye geye ca madhuraṃ pramāṇaistribhiranvitam | jātibhiḥ saptabhirbaddhaṃ tantrīlayasamanvitam ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : यह काव्य पढ़ने और गाने में मधुर है, तीन प्रमाणों (गति- द्रुत, मध्य, विलम्बित) से युक्त है, सात स्वरों (षड्ज आदि) से बद्ध है तथा वीणा और ताल के साथ समन्वित है।

🔹 English Translation : This epic is sweet to recite and sing, endowed with the three measures (tempos – fast, medium, slow), bound by the seven notes (sa ri ga ma pa dha ni), and harmonized with the lute and rhythm.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
पाठ्येसप्तमीपढ़ने में
गेयेसप्तमीगाने में
अव्ययऔर
मधुरम्प्रथमामधुर
प्रमाणैःतृतीया बहुवचनलय-गति से
त्रिभिःतृतीया बहुवचनतीन
अन्वितम्प्रथमायुक्त
जातिभिःतृतीया बहुवचनस्वरों से
सप्तभिःतृतीया बहुवचनसात
बद्धम्प्रथमानिबद्ध
तन्त्रीलयसमन्वितम्प्रथमावीणा-ताल सहित

📜 रामायण का संगीतशास्त्रीय पक्ष

यह श्लोक सिद्ध करता है कि रामायण मूलतः गायन के लिए रची गई थी। तीन प्रमाण (लय के प्रकार) और सात जातियाँ (स्वर) भारतीय संगीत के आधार हैं। तन्त्री (वीणा) के साथ गाने का उल्लेख बताता है कि कुश-लव ने इसे वीणा पर गाया होगा। आज भी रामायण के गायन की परंपरा विद्यमान है।