संस्कृत श्लोक

काव्यं रामायणं कृत्स्नं सीतायाश्चरितं महत्। पौलस्त्यवधमित्येवं चकार चरितव्रतः॥

हिंदी अनुवाद

व्रतनिष्ठ ऋषि ने इस सम्पूर्ण काव्य को 'रामायण', 'सीताजी का महान चरित' और 'पौलस्त्य (रावण) का वध' – इन नामों से रचा।

अर्थ / व्याख्या

वाल्मीकि ने रामायण को तीन नाम दिए: रामायण, सीताचरित, पौलस्त्यवध।

टिप्पणी

यह श्लोक बताता है कि रामायण के तीन प्रमुख नाम हैं, जो इसके तीन मुख्य विषयों को उजागर करते हैं: राम का चरित, सीता का जीवन, और रावण का वध।

॥ श्री वाल्मीकि रामायण – बालकाण्ड – सर्ग ४ – श्लोक ७ ॥

काव्यं रामायणं कृत्स्नं सीतायाश्चरितं महत्। पौलस्त्यवधमित्येवं चकार चरितव्रतः॥
kāvyaṃ rāmāyaṇaṃ kṛtsnaṃ sītāyāścaritaṃ mahat | paulastyavadhamityevaṃ cakāra caritavrataḥ ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : व्रतनिष्ठ ऋषि ने इस सम्पूर्ण काव्य को 'रामायण', 'सीताजी का महान चरित' और 'पौलस्त्य (रावण) का वध' – इन नामों से रचा।

🔹 English Translation : The sage who was firm in vows composed this entire epic as ""Ramayana"", ""the great biography of Sita"", and ""the slaying of Paulastya (Ravana)"" – thus he created it.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
काव्यम्द्वितीया एकवचनकाव्य
रामायणम्द्वितीया एकवचनरामायण
कृत्स्नम्द्वितीया एकवचनसम्पूर्ण
सीतायाःषष्ठी एकवचनसीता का
चरितम्द्वितीया एकवचनचरित
महत्द्वितीया एकवचनमहान
पौलस्त्यवधम्द्वितीया एकवचनरावण वध
इति एवम्अव्ययइस प्रकार
चकारलिट्किया
चरितव्रतःप्रथमा एकवचनव्रतनिष्ठ

📜 रामायण के तीन नाम

वाल्मीकि ने स्वयं अपने काव्य को तीन नाम दिए: (१) रामायण – राम के चरित्र पर आधारित होने के कारण, (२) सीतायाश्चरितं महत् – सीता के महान जीवन का वर्णन, (३) पौलस्त्यवध – रावण वध की प्रधानता। ये तीनों नाम रामायण के विविध आयामों को दर्शाते हैं – यह केवल राम की कथा नहीं, बल्कि सीता की करुण गाथा और रावण के अंत की कथा भी है।