संस्कृत श्लोक

तौ तु गान्धर्वतत्त्वज्ञौ मूर्छनास्थानकोविदौ। भ्रातरौ सर्वसम्पन्नौ गन्धर्वाविव रूपिणौ॥

हिंदी अनुवाद

वे दोनों भाई गान्धर्व (संगीत) के तत्त्वज्ञ, मूर्छना और स्थान के कोविद तथा रूप में गन्धर्वों के समान सम्पन्न थे।

अर्थ / व्याख्या

कुश-लव की संगीत में निपुणता और रूप-सौन्दर्य का वर्णन।

टिप्पणी

यह श्लोक कुश-लव की संगीत कला का बखान करता है। वे गान्धर्व (संगीत शास्त्र) के ज्ञाता थे, मूर्छनाओं (स्वरों की आरोह-अवरोह पद्धति) और स्थानों (गाने के आधार स्थान) में प्रवीण थे, और रूप में गन्धर्वों के समान सुन्दर थे।

॥ श्री वाल्मीकि रामायण – बालकाण्ड – सर्ग ४ – श्लोक १० ॥

तौ तु गान्धर्वतत्त्वज्ञौ मूर्छनास्थानकोविदौ। भ्रातरौ सर्वसम्पन्नौ गन्धर्वाविव रूपिणौ॥
tau tu gāndharvatattvajñau mūrchanāsthānakovidau | bhrātarau sarvasampannau gandharvāviva rūpiṇau ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : वे दोनों भाई गान्धर्व (संगीत) के तत्त्वज्ञ, मूर्छना और स्थान के कोविद तथा रूप में गन्धर्वों के समान सम्पन्न थे।

🔹 English Translation : Those two brothers were knowers of the essence of music, skilled in melodic modes and registers, and endowed with all excellences, appearing like celestial musicians (Gandharvas) in beauty.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
तौप्रथमा द्विवचनवे दोनों
तुअव्ययतो
गान्धर्वतत्त्वज्ञौप्रथमा द्विवचनसंगीत के ज्ञाता
मूर्छनास्थानकोविदौप्रथमा द्विवचनमूर्छना-स्थान में निपुण
भ्रातरौप्रथमा द्विवचनभाई
सर्वसम्पन्नौप्रथमा द्विवचनसर्वगुणसम्पन्न
गन्धर्वौ इवअव्ययगन्धर्वों के समान
रूपिणौप्रथमा द्विवचनसुन्दर

📜 कुश-लव : आदर्श गायक

इस श्लोक में कुश-लव को गन्धर्वों के समान बताया गया है, जो स्वर्गीय गायक होते हैं। मूर्छना और स्थान संगीत के तकनीकी पक्ष हैं – मूर्छना स्वरों की आरोह-अवरोह शृंखला, स्थान गाने के आधार सप्तक। वे इनमें कोविद (निपुण) थे। इस प्रकार वे रामायण के प्रथम गायक के रूप में पूर्णतः सक्षम थे।