महाकाव्य के गायन की ज़िम्मेदारी – श्लोक 5
संस्कृत श्लोक
कुशीलवौ तु धर्मज्ञौ राजपुत्रौ यशस्विनौ। भ्रातरौ स्वरसम्पन्नौ ददर्शाश्रमवासिनौ॥
हिंदी अनुवाद
(वाल्मीकि ने) धर्मज्ञ, यशस्वी, सुन्दर स्वर से युक्त, आश्रमवासी उन दोनों राजपुत्र भाइयों (कुश और लव) को देखा।
अर्थ / व्याख्या
वाल्मीकि ने कुश-लव के गुणों का वर्णन किया: धर्मज्ञ, यशस्वी, मधुर स्वर वाले।
टिप्पणी
यह श्लोक कुश और लव के व्यक्तित्व का चित्रण करता है। वे धर्म के ज्ञाता, यशस्वी, मधुर कंठ के धनी और आश्रमवासी थे। ये गुण उन्हें रामकथा के गायन के लिए सर्वथा उपयुक्त बनाते हैं।
॥ श्री वाल्मीकि रामायण – बालकाण्ड – सर्ग ४ – श्लोक ५ ॥
🔹 हिन्दी अनुवाद : (वाल्मीकि ने) धर्मज्ञ, यशस्वी, सुन्दर स्वर से युक्त, आश्रमवासी उन दोनों राजपुत्र भाइयों (कुश और लव) को देखा।
🔹 English Translation : Valmiki saw those two brothers, Kusha and Lava, who were knowers of dharma, famous, endowed with melodious voices, and dwellers of the hermitage.
🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)
| संस्कृत | व्याकरण | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|
| कुशीलवौ | द्वितीया द्विवचन | कुश-लव को |
| तु | अव्यय | तो |
| धर्मज्ञौ | द्वितीया द्विवचन | धर्मज्ञ |
| राजपुत्रौ | द्वितीया द्विवचन | राजपुत्र |
| यशस्विनौ | द्वितीया द्विवचन | यशस्वी |
| भ्रातरौ | द्वितीया द्विवचन | भाई |
| स्वरसम्पन्नौ | द्वितीया द्विवचन | मधुर स्वर युक्त |
| ददर्श | लिट्, प्रथमपुरुष एकवचन | देखा |
| आश्रमवासिनौ | द्वितीया द्विवचन | आश्रमवासी |
📜 कुश-लव के गुण
वाल्मीकि ने कुश-लव को देखा और उनके गुणों का वर्णन किया। धर्मज्ञ – वे धर्म के ज्ञाता थे, अतः वे रामकथा के धार्मिक पक्ष को समझ सकते थे। यशस्वी – उनकी ख्याति आश्रम में फैली हुई थी। स्वरसम्पन्न – उनके कंठ में वह माधुर्य था जो काव्य गायन के लिए आवश्यक है। आश्रमवासी – वे वाल्मीकि के आश्रम में ही रहते थे, इसलिए वे सदा उनके समीप थे। ये सभी गुण उन्हें रामायण के प्रथम गायक बनने के लिए आदर्श बनाते हैं।