संस्कृत श्लोक

अहो गीतस्य माधुर्यं श्लोकानां च विशेषतः। चिरनिर्वृत्तमप्येतत्प्रत्यक्षमिव दर्शितम्॥

हिंदी अनुवाद

(मुनि बोले) अहो! गीत का माधुर्य और विशेष रूप से श्लोकों का माधुर्य! बहुत पहले बीत चुकी यह घटना भी प्रत्यक्ष की भाँति दिखाई गई।

अर्थ / व्याख्या

(मुनि बोले) अहो! गीत का माधुर्य और विशेष रूप से श्लोकों का माधुर्य! बहुत पहले बीत चुकी यह घटना भी प्रत्यक्ष की भाँति दिखाई गई।

टिप्पणी

यह श्लोक गायन की उस शक्ति को रेखांकित करता है जो अतीत की घटनाओं को जीवन्त कर देती है। यह कला की सार्थकता है।

॥ श्लोक १८ – गीत का माधुर्य और प्रत्यक्षता ॥

अहो गीतस्य माधुर्यं श्लोकानां च विशेषतः।
चिरनिर्वृत्तमप्येतत्प्रत्यक्षमिव दर्शितम्॥
aho gītasya mādhuryaṃ ślokānāṃ ca viśeṣataḥ | ciranirvṛttam apy etat pratyakṣam iva darśitam ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : (मुनि बोले) अहो! गीत का माधुर्य और विशेष रूप से श्लोकों का माधुर्य! बहुत पहले बीत चुकी यह घटना भी प्रत्यक्ष की भाँति दिखाई गई।

🔹 English Translation : (The sages said:) "Oh, the sweetness of the song, and especially of the verses! Even though this event happened long ago, it has been made to appear as if directly seen."

🔍 शब्दार्थ तालिका

... (as above) ...

📜 कला की जीवन्तता

मुनियों का यह कथन कुश-लव की गायन-शैली की सर्वश्रेष्ठ प्रशंसा है। उन्होंने दो बातें कहीं – प्रथम, गीत और श्लोकों का माधुर्य (मधुरता); द्वितीय, उस माधुर्य ने अतीत की घटना को वर्तमान बना दिया।

"चिरनिर्वृत्तम्" अर्थात् जो बहुत समय पहले घटित हो चुका था। फिर भी "प्रत्यक्षमिव दर्शितम्" – मानो आँखों के सामने घट रहा हो। यही उत्तम कला का लक्षण है कि वह श्रोता को उसी क्षण और उसी स्थान पर ले जाए।

🎶 माधुर्य का रहस्य

"माधुर्यम्" केवल स्वरों की मिठास नहीं, बल्कि भाव, अर्थ और अलंकारों का सम्मिलित प्रभाव है। कुश-लव ने वाल्मीकि के मूल काव्य को ज्यों का त्यों गाया, जिसमें स्वयं में माधुर्य विद्यमान था। उनकी गायन-शैली ने उसे और भी सजीव बना दिया।

✨ विशेष: "अहो" विस्मयादिबोधक शब्द है, जो आश्चर्य और प्रशंसा दोनों को व्यक्त करता है। यहाँ यह मुनियों के हृदय से निकला है।

॥ जय श्री राम ॥