संस्कृत श्लोक

एवमुक्तो भरद्वाजो वाल्मीकेन महात्मना । प्रायच्छत मुनेस्तस्य वल्कलं नियतो गुरोः ॥

हिंदी अनुवाद

महात्मा वाल्मीकि के इस प्रकार कहने पर गुरु की आज्ञा में तत्पर भरद्वाज ने उन मुनि को वल्कल दे दिया।

अर्थ / व्याख्या

भरद्वाज ने गुरु की आज्ञा का पालन करते हुए तुरंत वल्कल दे दिया। यह श्लोक शिष्य की आज्ञाकारिता दर्शाता है।

टिप्पणी

इस श्लोक में "नियतो गुरोः" पद विशेष रूप से उल्लेखनीय है। यह शिष्य के समर्पण और गुरु-आज्ञा के पालन के भाव को व्यक्त करता है। भरद्वाज बिना किसी विलंब के वाल्मीकि की आज्ञा का पालन करते हैं, जो गुरु-शिष्य परंपरा का आदर्श है।

॥ श्री रामायण बालकाण्ड द्वितीय सर्ग – सप्तम श्लोक ॥

एवमुक्तो भरद्वाजो वाल्मीकेन महात्मना ।
प्रायच्छत मुनेस्तस्य वल्कलं नियतो गुरोः ॥
evamukto bharadvājo vālmīkena mahātmanā |
prāyacchata munestasya valkalaṃ niyato guroḥ ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : महात्मा वाल्मीकि के इस प्रकार कहने पर गुरु की आज्ञा में तत्पर भरद्वाज ने उन मुनि को वल्कल दे दिया।

🔹 English Translation : Thus addressed by the great soul Valmiki, Bharadvaja, being obedient to his guru, gave the bark garment to that sage.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
एवम्अव्ययइस प्रकार
उक्तःपुल्लिंग, प्रथमा एकवचन (वच् धातु + क्त)कहे जाने पर, उक्त
भरद्वाजःपुल्लिंग, प्रथमा एकवचनभरद्वाज
वाल्मीकेनपुल्लिंग, तृतीया एकवचनवाल्मीकि द्वारा
महात्मनापुल्लिंग, तृतीया एकवचन (महा + आत्मन्)महात्मा के द्वारा
प्रायच्छतपरस्मैपद, लङ्लकार, प्रथमपुरुष एकवचन (प्र + दा धातु)दिया
मुनेःपुल्लिंग, चतुर्थी एकवचनमुनि को
तस्यसर्वनाम, पुल्लिंग, षष्ठी एकवचनउस (मुनि) के
वल्कलम्नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनवल्कल
नियतःपुल्लिंग, प्रथमा एकवचन (नियम + क्त)आज्ञाकारी, विनीत
गुरोःपुल्लिंग, षष्ठी एकवचनगुरु के

📖 व्याख्या एवं महत्व

इस श्लोक में शिष्य भरद्वाज की आज्ञाकारिता का सुंदर चित्रण है। वाल्मीकि के कहने मात्र से ही वे तुरंत वल्कल दे देते हैं। "नियतः" शब्द उनके संयम और गुरु-भक्ति को प्रकट करता है। गुरु-शिष्य परंपरा में यही विनय और सेवा-भाव शिक्षा का आधार होता है।

भरद्वाज ने बिना किसी प्रश्न के गुरु की आज्ञा का पालन किया। यह दर्शाता है कि वे पूर्ण रूप से गुरु के प्रति समर्पित हैं। ऐसा समर्पण ही शिष्य को ज्ञान प्राप्ति का पात्र बनाता है। यहाँ "महात्मना" विशेषण वाल्मीकि की महानता को रेखांकित करता है, जिसके कारण शिष्य में इतनी श्रद्धा है।