राम की कहानी – श्लोक 14
संस्कृत श्लोक
प्रकृतीनां विषादं च प्रकृतीनां विसर्जनम् । निषादाधिपसंवादं सूतोपावर्तनं तथा ॥
हिंदी अनुवाद
प्रजाओं का विषाद और उनका विसर्जन (लौट जाना), निषादराज (गुह) से संवाद, तथा सूत (सुमन्त्र) का लौट आना।
अर्थ / व्याख्या
यह श्लोक राम के वनगमन के बाद की घटनाओं का वर्णन करता है: अयोध्या की प्रजा राम के पीछे वन तक आ गई थी, पर राम ने उन्हें लौटा दिया (प्रकृतीनां विसर्जनम्)। गंगा तट पर निषादराज गुह से भेंट और संवाद हुआ। तत्पश्चात् सुमन्त्र अयोध्या लौटे।
टिप्पणी
राम के वन जाने पर अयोध्या की प्रजा (प्रकृतयः) अत्यंत दुःखी हुई और उनके पीछे चल पड़ी। राम ने उन्हें समझा-बुझाकर अयोध्या लौटने को कहा। यह "प्रकृतीनां विसर्जनम्" है। गंगा पार करते समय गुह से राम की मित्रता और संवाद हुआ। सुमन्त्र रथ लेकर अयोध्या लौटे और दशरथ को समाचार दिया।
॥ श्री रामायण – बालकाण्ड – सर्ग ३ – श्लोक १४ ॥
निषादाधिपसंवादं सूतोपावर्तनं तथा ॥
niṣādādhipasaṃvādaṃ sūtopāvartaṇaṃ tathā ||
🔹 हिन्दी अनुवाद : प्रजाओं का विषाद और उनका विसर्जन (लौट जाना), निषादराज (गुह) से संवाद, तथा सूत (सुमन्त्र) का लौट आना।
🔹 English Translation : The sorrow of the people and their dismissal (returning), the conversation with the king of Nishadas (Guha), and the return of the charioteer (Sumantra).
🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)
| संस्कृत पद | व्याकरण | हिन्दी अर्थ | English Meaning |
|---|---|---|---|
| प्रकृतीनाम् | स्त्रीलिंग, षष्ठी बहुवचन | प्रजाओं का, नागरिकों का | of the people, citizens |
| विषादम् | पुल्लिंग, द्वितीया एकवचन | विषाद, दुःख | sorrow, grief |
| च | अव्यय | और | and |
| प्रकृतीनाम् | स्त्रीलिंग, षष्ठी बहुवचन | प्रजाओं का | of the people |
| विसर्जनम् | नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचन | विसर्जन, वापस भेजना | dismissal, sending back |
| निषादाधिपसंवादम् | पुल्लिंग, द्वितीया एकवचन | निषादराज (गुह) से संवाद | conversation with the king of Nishadas (Guha) |
| सूतोपावर्तनम् | नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचन | सूत (सुमन्त्र) का लौटना | return of the charioteer (Sumantra) |
| तथा | अव्यय | इसी प्रकार | also, similarly |
📜 श्लोक का अर्थ एवं महत्व
इस श्लोक में राम के वनगमन के बाद की घटनाएँ संक्षेप में कही गई हैं। जब राम वन को गए, तो अयोध्या की प्रजा (प्रकृतयः) शोक में डूब गई और उनके पीछे चल पड़ी। राम ने श्रृंगवेरपुर में रात्रि विश्राम के समय प्रजा को लौट जाने का आदेश दिया (विसर्जनम्)। वहाँ उनकी मित्रता निषादराज गुह से हुई और उनसे संवाद हुआ। सुमन्त्र, जो राम को वन तक छोड़कर आए थे, अयोध्या लौटे और राजा दशरथ को राम के वनवास का समाचार सुनाया।
📖 व्याकरणिक एवं साहित्यिक पक्ष
"प्रकृतीनां" का प्रयोग दो बार हुआ है – पहले विषाद के साथ, फिर विसर्जन के साथ। यहाँ "प्रकृतयः" का अर्थ प्रजा या नागरिक हैं। "निषादाधिप" का तात्पर्य गुह से है, जो निषाद जाति के राजा थे। "सूतोपावर्तनम्" में सूत सुमन्त्र हैं, जो दशरथ के सारथी थे।
🕉️ आध्यात्मिक संदेश
राम ने प्रजा के प्रति अपने स्नेह के बावजूद उन्हें लौटा दिया, क्योंकि उनका कर्तव्य था पिता की आज्ञा का पालन करना। यह संदेश देता है कि कर्तव्यपालन में व्यक्तिगत सुख-दुःख बाधक नहीं होने चाहिए। गुह से मित्रता दर्शाती है कि राम सबके प्रति समान भाव रखते थे।
॥ रामः मर्यादापुरुषोत्तमः – राम मर्यादा के प्रतिमूर्ति हैं ॥