राम की कहानी – श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
विघातं चाभिषेकस्य रामस्य च विवासनम् । राज्ञः शोकं विलापं च परलोकस्य चाश्रयम् ॥
हिंदी अनुवाद
अभिषेक का विघ्न, राम का वनवास, राजा (दशरथ) का शोक और विलाप, तथा उनका परलोकगमन।
अर्थ / व्याख्या
इस श्लोक में अयोध्या-काण्ड की प्रमुख घटनाएँ सूचीबद्ध हैं: राम के अभिषेक में बाधा, उनका वनवास, राजा दशरथ का शोक और विलाप, तथा अंततः उनका स्वर्गवास। यह श्लोक करुण रस को उद्बुद्ध करता है।
टिप्पणी
यहाँ "विघातं चाभिषेकस्य" कैकेयी के वरदानों के कारण अभिषेक रुकने की ओर संकेत है। "रामस्य च विवासनम्" चौदह वर्ष के वनवास को कहता है। "राज्ञः शोकं विलापं च" में दशरथ की पुत्र-वियोग में व्याकुलता दिखाई गई है, और "परलोकस्य चाश्रयम्" उनकी मृत्यु (पुत्र के वियोग में ही) को इंगित करता है।
॥ श्री रामायण – बालकाण्ड – सर्ग ३ – श्लोक १३ ॥
राज्ञः शोकं विलापं च परलोकस्य चाश्रयम् ॥
rājñaḥ śokaṃ vilāpaṃ ca paralokasya cāśrayam ||
🔹 हिन्दी अनुवाद : अभिषेक का विघ्न, राम का वनवास, राजा (दशरथ) का शोक और विलाप, तथा उनका परलोकगमन।
🔹 English Translation : The obstruction of the consecration, the exile of Rama, the grief and lamentation of the king (Dasharatha), and his passing away to the other world.
🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)
| संस्कृत पद | व्याकरण | हिन्दी अर्थ | English Meaning |
|---|---|---|---|
| विघातम् | पुल्लिंग, द्वितीया एकवचन | विघ्न, बाधा | obstruction, hindrance |
| च | अव्यय | और | and |
| अभिषेकस्य | पुल्लिंग, षष्ठी एकवचन | अभिषेक का | of the consecration |
| रामस्य | पुल्लिंग, षष्ठी एकवचन | राम का | of Rama |
| च | अव्यय | और | and |
| विवासनम् | नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचन | वनवास, निर्वासन | exile, banishment |
| राज्ञः | पुल्लिंग, षष्ठी एकवचन | राजा (दशरथ) का | of the king (Dasharatha) |
| शोकम् | पुल्लिंग, द्वितीया एकवचन | शोक, दुःख | grief, sorrow |
| विलापम् | पुल्लिंग, द्वितीया एकवचन | विलाप, रोना-पीटना | lamentation, wailing |
| च | अव्यय | और | and |
| परलोकस्य | पुल्लिंग, षष्ठी एकवचन | परलोक, स्वर्ग का | of the other world, heaven |
| च | अव्यय | और | and |
| आश्रयम् | पुल्लिंग, द्वितीया एकवचन | आश्रय लेना, प्राप्ति | recourse, attaining |
📜 श्लोक का अर्थ एवं महत्व
यह श्लोक रामायण के सर्वाधिक मार्मिक प्रसंगों को संक्षेप में प्रस्तुत करता है। कैकेयी के कोप-भवन में जाने के कारण राम का अभिषेक स्थगित हो गया (विघातम्), और उन्हें चौदह वर्ष का वनवास हुआ (विवासनम्)। इस समाचार से राजा दशरथ अत्यंत शोकाकुल हुए और पुत्र-वियोग में ही उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए (परलोकाश्रय)। यह श्लोक करुण रस का उत्कृष्ट उदाहरण है।
📖 व्याकरणिक एवं साहित्यिक पक्ष
इस श्लोक में अनुष्टुप् छंद है। "विघातम्", "विवासनम्", "शोकम्", "विलापम्", "आश्रयम्" – सभी द्वितीया विभक्ति में हैं, जो क्रिया के कर्म होने का संकेत देते हैं (अर्थात् ये सब वाल्मीकि द्वारा वर्णित विषय हैं)। "परलोकाश्रय" का अर्थ है मृत्यु को प्राप्त होना।
🕉️ आध्यात्मिक संदेश
इस श्लोक से हम सीखते हैं कि संसार में सुख और दुःख का चक्र चलता रहता है। राम के अभिषेक की खुशी कुछ ही क्षणों में वनवास के दुःख में बदल गई। राजा दशरथ का शोक और मृत्यु यह दर्शाते हैं कि पुत्र-स्नेह कितना प्रबल होता है। यह घटना हमें वैराग्य और कर्तव्यपालन की प्रेरणा देती है।
॥ शोकः श्लोकत्वमागतः – करुणा ही काव्य बनी ॥