राम की कहानी – श्लोक 15

संस्कृत श्लोक

गङ्गायाश्चापि संतारं भरद्वाजस्य दर्शनम् । भरद्वाजाभ्यनुज्ञानाच्चित्रकूटस्य दर्शनम् ॥

हिंदी अनुवाद

गंगा को पार करना, भरद्वाज ऋषि का दर्शन, भरद्वाज की आज्ञा से चित्रकूट का दर्शन।

अर्थ / व्याख्या

इस श्लोक में राम के वनगमन मार्ग का वर्णन है: गंगा पार करना, प्रयाग में भरद्वाज ऋषि से भेंट, और उनकी अनुमति से चित्रकूट पर्वत पर जाकर निवास करना।

टिप्पणी

राम, सीता और लक्ष्मण ने गंगा को पार किया और प्रयाग पहुँचे, जहाँ भरद्वाज ऋषि के आश्रम में उनसे भेंट की। ऋषि ने उन्हें चित्रकूट जाने का सुझाव दिया, जहाँ राम ने कुछ समय निवास किया।

॥ श्री रामायण – बालकाण्ड – सर्ग ३ – श्लोक १५ ॥

गङ्गायाश्चापि संतारं भरद्वाजस्य दर्शनम् ।
भरद्वाजाभ्यनुज्ञानाच्चित्रकूटस्य दर्शनम् ॥
gaṅgāyāścāpi saṃtāraṃ bharadvājasya darśanam |
bharadvājābhyanujñānāccitrakuṭasya darśanam ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : गंगा को पार करना, भरद्वाज ऋषि का दर्शन, भरद्वाज की आज्ञा से चित्रकूट का दर्शन।

🔹 English Translation : Crossing the Ganga, meeting sage Bharadvaja, and by the permission of Bharadvaja, seeing Chitrakuta.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृत पदव्याकरणहिन्दी अर्थEnglish Meaning
गङ्गायाःस्त्रीलिंग, षष्ठी एकवचनगंगा काof the Ganga
अव्ययऔरand
अपिअव्ययभीalso, even
संतारम्पुल्लिंग, द्वितीया एकवचनपार करनाcrossing over
भरद्वाजस्यपुल्लिंग, षष्ठी एकवचनभरद्वाज ऋषि काof sage Bharadvaja
दर्शनम्नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनदर्शन, भेंटmeeting, sight
भरद्वाजाभ्यनुज्ञानात्पुल्लिंग, पञ्चमी एकवचनभरद्वाज की आज्ञा सेby the permission of Bharadvaja
चित्रकूटस्यपुल्लिंग, षष्ठी एकवचनचित्रकूट पर्वत काof Chitrakuta mountain
दर्शनम्नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनदर्शनseeing, viewing

📜 श्लोक का अर्थ एवं महत्व

यह श्लोक राम के वनवास के आरंभिक चरण का वर्णन करता है। गंगा पार करने के बाद वे प्रयाग पहुँचे, जहाँ भरद्वाज ऋषि का आश्रम था। राम ने ऋषि से भेंट की और उनका आशीर्वाद प्राप्त किया। ऋषि ने उन्हें चित्रकूट पर्वत पर निवास करने की सलाह दी, जो रमणीय और ऋषियों की तपोभूमि थी। राम ने वहाँ एक कुटी बनाई और कुछ समय बिताया। चित्रकूट को बाद में भरत ने भी देखा और राम से मिलने आए।

📖 व्याकरणिक एवं साहित्यिक पक्ष

"गङ्गायाश्चापि संतारम्" में "अपि" का प्रयोग जोर देने के लिए है। "भरद्वाजाभ्यनुज्ञानात्" पञ्चमी विभक्ति में हेतुवाचक है। "चित्रकूटस्य दर्शनम्" का अर्थ है चित्रकूट को देखना, यानी वहाँ जाना।

🕉️ आध्यात्मिक संदेश

गंगा पार करना संसार-सागर से पार होने का प्रतीक है। भरद्वाज जैसे महर्षि के दर्शन से ज्ञान की प्राप्ति होती है। चित्रकूट जैसे पवित्र स्थान पर निवास करना आत्मिक शांति का मार्ग प्रशस्त करता है। राम ने वनवास में भी ऋषियों का सत्संग किया और धर्म का पालन किया।

॥ सत्संगतिः परमं सुखम् – सत्संग परम सुख है ॥