संस्कृत श्लोक

वियुक्ता पतिना तेन द्विजेन सहचारिणा । ताम्रशीर्षेण मत्तेन पत्रिणा सहितेन वै ॥

हिंदी अनुवाद

लाल सिर वाले, मतवाले, पंखों से सुशोभित, सदा साथ रहने वाले उस द्विज (पक्षी) से वह मादा वियुक्त हो गई।

अर्थ / व्याख्या

यह श्लोक उस नर क्रौंच पक्षी के विशेषणों से भरा है, जिससे मादा अब वियुक्त हो गई है। वह न केवल पति था, बल्कि सहचर, सुन्दर और प्रेम में मत्त था। इस वियोग को और अधिक मार्मिक बनाने के लिए उसके गुणों का वर्णन किया गया है।

टिप्पणी

इस श्लोक में क्रौंच नर के रूप-गुणों का वर्णन है – ताम्रशीर्ष (लाल सिर), मत्त (प्रेम में मदमस्त), पत्री (पंखों से युक्त) और सहचारी (सदा साथ रहने वाला)। यह वर्णन मादा के दुःख को और अधिक तीव्र करता है। 'वियुक्ता' शब्द से पूर्ण वियोग की पीड़ा व्यक्त होती है।

॥ बालकाण्ड सर्ग २ श्लोक १२ – वियुक्ता पतिना ॥

वियुक्ता पतिना तेन द्विजेन सहचारिणा ।
ताम्रशीर्षेण मत्तेन पत्रिणा सहितेन वै ॥
viyuktā patinā tena dvijena sahacāriṇā |
tāmraśīrṣeṇa mattena patriṇā sahitenai ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : लाल सिर वाले, मतवाले, पंखों से सुशोभित, सदा साथ रहने वाले उस द्विज (पक्षी) से वह मादा वियुक्त हो गई।

🔹 English Translation : She was separated from that twice-born (bird), her companion, who had a copper-coloured head, was intoxicated (with love), and adorned with feathers.

🔍 शब्दार्थ

संस्कृतहिन्दी अर्थ
वियुक्तावियुक्त हो गई
पतिनापति से
तेनउस
द्विजेनद्विज (पक्षी) से
सहचारिणासाथ चलने वाले
ताम्रशीर्षेणताम्र (लाल) सिर वाले
मत्तेनमतवाले (प्रेम में मत्त)
पत्रिणापंखों वाले
सहितेनसहित, युक्त
वैनिश्चय ही

📖 व्याख्या

श्लोक ११ में मादा के विलाप का उल्लेख था, अब श्लोक १२ में उस विलाप का कारण – वियोग – को और अधिक स्पष्ट किया गया है। मादा उस नर से वियुक्त हो गई, जो न केवल पति था, बल्कि द्विज (दो बार जन्म लेने वाला – पक्षी भी द्विज कहलाता है क्योंकि पहले अंडे के रूप में और फिर पंखों से युक्त होकर जन्म लेता है), सहचारी (हमेशा साथ रहने वाला), ताम्रशीर्ष (सुन्दर लाल सिर वाला), मत्त (प्रेममयी मस्ती में डूबा हुआ) और पत्री (सुन्दर पंखों से युक्त) था। इन सभी विशेषणों के माध्यम से कवि ने उस पक्षी के आकर्षक रूप और उसके साथ के अटूट बंधन को रेखांकित किया है।

'सहचारिणा' और 'पतिना' एक साथ आकर यह दर्शाते हैं कि वह केवल पति ही नहीं, जीवन-साथी भी था। इन सब से वियोग होना मादा के लिए असहनीय है। यहाँ करुणा का भाव और गहरा होता है।

📌 व्याकरण: 'वियुक्ता' – यहाँ भूतकालिक कृदन्त (क्त प्रत्यय) है, जो स्त्रीलिंग में प्रयुक्त है। 'पतिना' तृतीया विभक्ति (करण कारक) का रूप है, जो वियोग के करण को दर्शाता है। 'सहितेन' भी तृतीया में ही है, जो विशेषण है 'पतिना' का।

॥ जय श्री राम ॥