अयोध्या के राजा और लोग – श्लोक 27

संस्कृत श्लोक

तां पुरीं स महातेजा राजा दशरथो महान् । शशास शमितामित्रो नक्षत्राणीव चन्द्रमाः ॥

हिंदी अनुवाद

उस महान् तेजस्वी राजा दशरथ ने उस पुरी (अयोध्या) पर शासन किया, जिन्होंने शत्रुओं का दमन कर रखा था, जैसे चन्द्रमा नक्षत्रों को शोभित करता है।

अर्थ / व्याख्या

राजा दशरथ का शासन।

टिप्पणी

यहाँ दशरथ की तुलना चन्द्रमा से की गई है। जैसे चन्द्रमा नक्षत्रों के बीच शोभा पाता है, वैसे ही दशरथ अयोध्या में शोभा पाते थे। "शमितामित्रः" का अर्थ है जिनके शत्रु शांत (परास्त) हो गए हैं।

॥ श्री रामायण बालकाण्ड सर्ग ६ श्लोक २७ ॥

तां पुरीं स महातेजा राजा दशरथो महान् । शशास शमितामित्रो नक्षत्राणीव चन्द्रमाः ॥
tāṃ purīṃ sa mahātejā rājā daśaratho mahān | śaśāsa śamitāmitro nakṣatrāṇīva candramāḥ ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : उस महान् तेजस्वी राजा दशरथ ने उस पुरी (अयोध्या) पर शासन किया, जिन्होंने शत्रुओं का दमन कर रखा था, जैसे चन्द्रमा नक्षत्रों को शोभित करता है।

🔹 English Translation : That great and mighty king Daśaratha ruled that city, having subdued his enemies, just as the moon shines among the stars.

🔍 शब्दार्थ

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
ताम्सर्वनाम, स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचनउस
पुरीम्स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचननगरी को
सःसर्वनाम, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनवह
महातेजाःविशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनमहान तेजस्वी
राजापुल्लिंग, प्रथमा एकवचनराजा
दशरथःपुल्लिंग, प्रथमा एकवचनदशरथ
महान्विशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनमहान्
शशासलिट्लकार, प्रथमपुरुष एकवचन (शास् धातु)शासन किया
शमितामित्रःविशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनजिसने शत्रुओं को दमन किया
नक्षत्राणिनपुंसकलिंग, द्वितीया बहुवचननक्षत्रों को
इवअव्ययजैसे
चन्द्रमाःपुल्लिंग, प्रथमा एकवचनचन्द्रमा

📜 विश्लेषण

इस श्लोक में राजा दशरथ की उपमा चन्द्रमा से दी गई है। जैसे चन्द्रमा अपने प्रकाश से सभी नक्षत्रों को शोभित करता है, वैसे ही दशरथ अपने तेज और गुणों से अयोध्या को शोभित करते हैं। "शमितामित्रः" उनकी वीरता को दर्शाता है कि उन्होंने सभी शत्रुओं का दमन कर रखा था।