अयोध्या के राजा और लोग – श्लोक 26

संस्कृत श्लोक

नित्यमत्तैः सदा पूर्णा नागैरचलसंनिभैः । सा योजने द्वे च भूयः सत्यनामा प्रकाशते । यस्यां दशरथो राजा वसञ्जगदपालयत् ॥

हिंदी अनुवाद

वह नगरी सदा मतवाले और पर्वत के समान विशाल हाथियों से भरी रहती थी। वह दो योजन (लगभग 25 किमी) में फैली हुई थी और सत्यनामा (सत्यनाम) के नाम से प्रकाशित होती थी, जिसमें राजा दशरथ रहते हुए सम्पूर्ण जगत का पालन करते थे।

अर्थ / व्याख्या

अयोध्या का विस्तार और राजा दशरथ का शासन।

टिप्पणी

यहाँ अयोध्या की भौगोलिक स्थिति और उसके राजा का वर्णन है। "सत्यनामा" का अर्थ है सत्य नाम वाली, या जिसका नाम सत्य है। दशरथ उसमें रहकर जगत का पालन करते थे, जो उनके धार्मिक कर्तव्यपालन को दर्शाता है।

॥ श्री रामायण बालकाण्ड सर्ग ६ श्लोक २६ ॥

नित्यमत्तैः सदा पूर्णा नागैरचलसंनिभैः । सा योजने द्वे च भूयः सत्यनामा प्रकाशते । यस्यां दशरथो राजा वसञ्जगदपालयत् ॥
nityamattaiḥ sadā pūrṇā nāgairacalasaṃnibhaiḥ | sā yojane dve ca bhūyaḥ satyanāmā prakāśate | yasyāṃ daśaratho rājā vasañjagadapālayat ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : वह नगरी सदा मतवाले और पर्वत के समान विशाल हाथियों से भरी रहती थी। वह दो योजन (लगभग 25 किमी) में फैली हुई थी और सत्यनामा (सत्यनाम) के नाम से प्रकाशित होती थी, जिसमें राजा दशरथ रहते हुए सम्पूर्ण जगत का पालन करते थे।

🔹 English Translation : That city was always filled with elephants, constantly in musth, resembling mountains. It extended for two yojanas and shone with the name Satyanāma, in which King Daśaratha lived and protected the whole world.

🔍 शब्दार्थ

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
नित्यमत्तैःविशेषण, पुल्लिंग, तृतीया बहुवचननित्य मतवाले
सदाअव्ययहमेशा
पूर्णाविशेषण, स्त्रीलिंग, प्रथमा एकवचनभरी हुई
नागैःपुल्लिंग, तृतीया बहुवचनहाथियों से
अचलसंनिभैःविशेषण, पुल्लिंग, तृतीया बहुवचनपर्वत के समान
सासर्वनाम, स्त्रीलिंग, प्रथमा एकवचनवह
योजनेनपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनयोजन (माप)
द्वेविशेषण, नपुंसकलिंग, द्वितीया द्विवचनदो
अव्ययऔर
भूयःअव्ययफिर भी
सत्यनामाविशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनसत्यनाम (सत्य नाम वाला)
प्रकाशतेआत्मनेपद, प्रथमपुरुष एकवचनप्रकाशित होती है
यस्याम्सर्वनाम, स्त्रीलिंग, सप्तमी एकवचनजिसमें
दशरथःपुल्लिंग, प्रथमा एकवचनदशरथ
राजापुल्लिंग, प्रथमा एकवचनराजा
वसन्शतृ प्रत्यय, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनरहते हुए
जगत्नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनजगत
अपालयत्परस्मैपद, अनद्यतन भूतकाल, प्रथमपुरुष एकवचनपालन करते थे

📜 विश्लेषण

यह श्लोक अयोध्या के आकार और उसके राजा के महत्व को बताता है। दो योजन का क्षेत्र (लगभग 16-18 मील या 25-30 किमी) उस समय एक बड़ी नगरी थी। "सत्यनामा" संभवतः अयोध्या का ही एक विशेषण है, जो सत्य से युक्त है। राजा दशरथ उसमें रहकर जगत का पालन करते थे, जो आदर्श राजा के कर्तव्य का निरूपण है।