अयोध्या के राजा और लोग – श्लोक 25

संस्कृत श्लोक

भदैर्मन्द्रैर्मृगैश्चैव भद्रमन्द्रमृगैस्तथा । भद्रमन्द्रैर्भद्रमृगैर्मृगमन्द्रैश्च सा पुरी ॥

हिंदी अनुवाद

उस नगरी में भद्र, मन्द्र, मृग, भद्रमन्द्र, भद्रमृग, मृगमन्द्र आदि प्रकार के हाथी थे।

अर्थ / व्याख्या

अयोध्या में अनेक प्रकार के हाथी।

टिप्पणी

यहाँ हाथियों की विभिन्न नस्लों के नाम हैं। भद्र, मन्द्र, मृग आदि संकर नस्लें हैं। यह अयोध्या की पशुसम्पदा की विविधता को दर्शाता है।

॥ श्री रामायण बालकाण्ड सर्ग ६ श्लोक २५ ॥

भदैर्मन्द्रैर्मृगैश्चैव भद्रमन्द्रमृगैस्तथा । भद्रमन्द्रैर्भद्रमृगैर्मृगमन्द्रैश्च सा पुरी ॥
bhadairmandrairmṛgaiścaiva bhadramandramṛgaistathā | bhadramandrairbhadramṛgairmṛgamandraiśca sā purī ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : उस नगरी में भद्र, मन्द्र, मृग, भद्रमन्द्र, भद्रमृग, मृगमन्द्र आदि प्रकार के हाथी थे।

🔹 English Translation : That city was filled with various types of elephants: Bhadra, Mandra, Mriga, Bhadramandra, Bhadramriga, and Mrigamandra.

🔍 शब्दार्थ

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
भदैःपुल्लिंग, तृतीया बहुवचनभद्र जाति के हाथियों से
मन्द्रैःपुल्लिंग, तृतीया बहुवचनमन्द्र जाति के हाथियों से
मृगैःपुल्लिंग, तृतीया बहुवचनमृग जाति के हाथियों से
अव्ययऔर
एवअव्ययही
भद्रमन्द्रमृगैःपुल्लिंग, तृतीया बहुवचनभद्र, मन्द्र और मृग के मिश्रण से उत्पन्न हाथियों से
तथाअव्ययइसी प्रकार
भद्रमन्द्रैःपुल्लिंग, तृतीया बहुवचनभद्रमन्द्र नामक संकर जाति के हाथियों से
भद्रमृगैःपुल्लिंग, तृतीया बहुवचनभद्रमृग जाति के हाथियों से
मृगमन्द्रैःपुल्लिंग, तृतीया बहुवचनमृगमन्द्र जाति के हाथियों से
सासर्वनाम, स्त्रीलिंग, प्रथमा एकवचनवह
पुरीस्त्रीलिंग, प्रथमा एकवचननगरी

📜 विश्लेषण

इस श्लोक में हाथियों की विभिन्न नस्लों का उल्लेख है। प्राचीन भारत में हाथियों का वर्गीकरण उनके आकार, स्वभाव और गुणों के आधार पर किया जाता था। भद्र, मन्द्र, मृग आदि मुख्य नस्लें थीं और इनके संकर से अन्य नस्लें बनती थीं। अयोध्या में इन सभी का होना उसकी समृद्धि का प्रतीक है।