अयोध्या के राजा और लोग – श्लोक 24

संस्कृत श्लोक

ऐरावतकुलीनैश्च महापद्मकुलैस्तथा । अञ्जनादपि निष्क्रान्तैर्वामनादपि च द्विपैः ॥

हिंदी अनुवाद

तथा ऐरावत कुल में उत्पन्न, महापद्म कुल के, अञ्जन और वामन नामक हाथियों के वंश से निकले हुए द्विपों (हाथियों) से भी वह नगरी भरी थी।

अर्थ / व्याख्या

प्रसिद्ध हाथी वंशों का वर्णन।

टिप्पणी

ऐरावत, महापद्म, अञ्जन और वामन - ये सभी दिग्गज हाथियों के नाम हैं या प्रसिद्ध नस्लें। ऐरावत इन्द्र का हाथी है। इन वंशों के हाथी अत्यंत बलशाली माने जाते थे।

॥ श्री रामायण बालकाण्ड सर्ग ६ श्लोक २४ ॥

ऐरावतकुलीनैश्च महापद्मकुलैस्तथा । अञ्जनादपि निष्क्रान्तैर्वामनादपि च द्विपैः ॥
airāvatakulīnaiśca mahāpadmakulaistathā | añjanādapi niṣkrāntairvāmanādapi ca dvipaiḥ ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : तथा ऐरावत कुल में उत्पन्न, महापद्म कुल के, अञ्जन और वामन नामक हाथियों के वंश से निकले हुए द्विपों (हाथियों) से भी वह नगरी भरी थी।

🔹 English Translation : And the city was also filled with elephants born in the Airāvata lineage, the Mahāpadma lineage, and those descended from the elephants Añjana and Vāmana.

🔍 शब्दार्थ

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
ऐरावतकुलीनैःविशेषण, पुल्लिंग, तृतीया बहुवचनऐरावत कुल में उत्पन्न
अव्ययऔर
महापद्मकुलैःविशेषण, पुल्लिंग, तृतीया बहुवचनमहापद्म कुल के
तथाअव्ययइसी प्रकार
अञ्जनात्पुल्लिंग, पञ्चमी एकवचनअञ्जन हाथी से
अपिअव्ययभी
निष्क्रान्तैःविशेषण, पुल्लिंग, तृतीया बहुवचननिकले हुए
वामनात्पुल्लिंग, पञ्चमी एकवचनवामन हाथी से
द्विपैःपुल्लिंग, तृतीया बहुवचनहाथियों से

📜 सांस्कृतिक महत्व

ऐरावत इन्द्र का वाहन है। महापद्म, अञ्जन और वामन भी पौराणिक प्रसिद्ध हाथी हैं। इनके वंश के हाथी अत्यंत श्रेष्ठ माने जाते थे। अयोध्या में ऐसे हाथियों का होना उसकी दिव्य सम्पदा को दर्शाता है। यह श्लोक अयोध्या की अतुलनीय वैभवशालिता को रेखांकित करता है।