अयोध्या के राजा और लोग – श्लोक 22

संस्कृत श्लोक

काम्बोजविषये जातैर्बाह्लीकैश्च हयोत्तमैः । वनायुजैर्नदीजैश्च पूर्णा हरिहयोत्तमैः ॥

हिंदी अनुवाद

अयोध्या नगरी काम्बोज देश में उत्पन्न, बाह्लीक देश के, वनायु प्रदेश के तथा नदी तट पर जन्मे उत्तम घोड़ों से भरी हुई थी।

अर्थ / व्याख्या

इस श्लोक में अयोध्या में विभिन्न देशों के उत्तम घोड़ों का वर्णन है।

टिप्पणी

यहाँ चार प्रकार के घोड़ों का उल्लेख है: काम्बोज (संभवतः अफगानिस्तान क्षेत्र), बाह्लीक (बैक्ट्रिया), वनायु (अरब या फारस), और नदीज (नदी के किनारे के देश)। ये सभी प्राचीन काल में अश्वों के लिए प्रसिद्ध थे।

॥ श्री रामायण बालकाण्ड सर्ग ६ श्लोक २२ ॥

काम्बोजविषये जातैर्बाह्लीकैश्च हयोत्तमैः । वनायुजैर्नदीजैश्च पूर्णा हरिहयोत्तमैः ॥
kāmbojaviṣaye jātairbāhlīkaiśca hayottamaiḥ | vanāyujairnadījaiśca pūrṇā harihayottamaiḥ ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : अयोध्या नगरी काम्बोज देश में उत्पन्न, बाह्लीक देश के, वनायु प्रदेश के तथा नदी तट पर जन्मे उत्तम घोड़ों से भरी हुई थी।

🔹 English Translation : The city was filled with excellent horses born in the Kambhoja country, Bahlika region, Vanayu, and those born near rivers.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
काम्बोजविषयेपुल्लिंग, सप्तमी एकवचनकाम्बोज देश में
जातैःविशेषण, पुल्लिंग, तृतीया बहुवचनउत्पन्न हुए
बाह्लीकैःपुल्लिंग, तृतीया बहुवचनबाह्लीक देश के घोड़ों से
अव्ययऔर
हयोत्तमैःपुल्लिंग, तृतीया बहुवचनउत्तम घोड़ों से
वनायुजैःपुल्लिंग, तृतीया बहुवचनवनायु में उत्पन्न घोड़ों से
नदीजैःपुल्लिंग, तृतीया बहुवचननदी के किनारे उत्पन्न घोड़ों से
पूर्णाविशेषण, स्त्रीलिंग, प्रथमा एकवचनभरी हुई
हरिहयोत्तमैःपुल्लिंग, तृतीया बहुवचनउत्तम घोड़ों से (हरिहय = घोड़ा)

📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व

यह श्लोक प्राचीन भारत के व्यापारिक और सामरिक संबंधों को दर्शाता है। काम्बोज (वर्तमान अफगानिस्तान/तजाकिस्तान), बाह्लीक (बैक्ट्रिया, उत्तरी अफगानिस्तान), वनायु (संभवतः अरब या फारस की खाड़ी) और नदीज (सिंधु आदि नदियों के किनारे) के घोड़े अपनी उत्तम नस्ल के लिए प्रसिद्ध थे। अयोध्या जैसी समृद्ध नगरी में इनका होना उसकी वैभवशाली स्थिति को दर्शाता है। यहाँ "हरिहय" शब्द का प्रयोग हुआ है, जो घोड़े का पर्याय है।

📖 व्याकरणिक विश्लेषण

श्लोक में तृतीया बहुवचन (जातैः, बाह्लीकैः, वनायुजैः, नदीजैः) का प्रयोग कर्ता के साधन या सहयोग को दर्शाता है। "पूर्णा" विशेषण अयोध्या का वाचक है। यहाँ विभिन्न देशों के नामों से अश्वों की उत्पत्ति का बोध होता है।