अयोध्या के राजा और लोग – श्लोक 21

संस्कृत श्लोक

योधानामग्निकल्पानां पेशलानाममर्षिणाम् । सम्पूर्णा कृतविद्यानां गुहा केसरिणामिव ॥

हिंदी अनुवाद

अयोध्या नगरी अग्नि के समान तेजस्वी, चतुर, क्रोधी और विद्या में निपुण योद्धाओं से भरी हुई थी, मानो सिंहों से भरी हुई गुफा हो।

अर्थ / व्याख्या

यह श्लोक अयोध्या के योद्धाओं के गुणों का वर्णन करता है।

टिप्पणी

यहाँ उपमा अलंकार है - केसरिणामिव (सिंहों के समान)। योद्धाओं की तुलना सिंहों से की गई है, जो साहस और पराक्रम के प्रतीक हैं।

॥ श्री रामायण बालकाण्ड सर्ग ६ श्लोक २१ ॥

योधानामग्निकल्पानां पेशलानाममर्षिणाम् ।
सम्पूर्णा कृतविद्यानां गुहा केसरिणामिव ॥
yodhānām agnikalpānām peśalānām amarṣiṇām | sampūrṇā kṛtavidyānām guhā kesariṇām iva ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : अयोध्या नगरी अग्नि के समान तेजस्वी, चतुर, क्रोधी और विद्या में निपुण योद्धाओं से भरी हुई थी, मानो सिंहों से भरी हुई गुफा हो।

🔹 English Translation : The city was filled with warriors who were like fire, skilled, intolerant, and learned, like a cave filled with lions.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
योधानाम्पुल्लिंग, षष्ठी बहुवचनयोद्धाओं से
अग्निकल्पानाम्विशेषण, पुल्लिंग, षष्ठी बहुवचनअग्नि के समान तेजस्वी
पेशलानाम्विशेषण, पुल्लिंग, षष्ठी बहुवचनचतुर, निपुण
अमर्षिणाम्विशेषण, पुल्लिंग, षष्ठी बहुवचनअमर्षी, क्रोधी, अपमान न सहने वाले
सम्पूर्णाविशेषण, स्त्रीलिंग, प्रथमा एकवचनपूर्ण रूप से भरी हुई
कृतविद्यानाम्विशेषण, पुल्लिंग, षष्ठी बहुवचनविद्या प्राप्त किए हुए
गुहास्त्रीलिंग, प्रथमा एकवचनगुफा
केसरिणाम्पुल्लिंग, षष्ठी बहुवचनसिंहों से
इवअव्ययजैसे, समान

📜 श्लोक का ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व

यह श्लोक अयोध्या की सैन्य शक्ति और वीरों के वर्णन में आता है। वाल्मीकि जी ने अयोध्या की समृद्धि और सुरक्षा का वर्णन करते हुए बताया कि नगरी में ऐसे योद्धा रहते थे जो अग्नि के समान तेजस्वी थे, अर्थात युद्ध में शत्रुओं को भस्म कर देने वाले। वे पेशल (कुशल) थे, युद्ध कला में निपुण। अमर्षी का अर्थ है जो क्रोध को धारण करते हैं, अर्थात शत्रु का सामना करने में सक्षम। कृतविद्या का अर्थ है शिक्षित, जिन्होंने शास्त्रों और अस्त्र-शस्त्रों की विद्या प्राप्त की हो। उनकी तुलना सिंहों से की गई है, जो वन के राजा होते हैं। यह दर्शाता है कि अयोध्या के योद्धा न केवल बलवान थे, बल्कि बुद्धिमान और शिक्षित भी थे। ऐसे योद्धाओं से युक्त नगरी अजेय थी। यह श्लोक आदर्श राज्य की सैन्य व्यवस्था का उदाहरण प्रस्तुत करता है।

📖 व्याकरणिक एवं साहित्यिक विश्लेषण

यह श्लोक अनुष्टुप् छंद में है। इसमें बहुवचन में षष्ठी विभक्ति का प्रयोग हुआ है (योधानाम्, अग्निकल्पानाम् आदि) जो संबंध दर्शाता है। "सम्पूर्णा" स्त्रीलिंग में है, जो पुरी (अयोध्या) की विशेषता बता रहा है। "गुहा केसरिणामिव" में उपमा अलंकार है - सिंहों से भरी गुफा के समान। यहाँ "इव" अव्यय उपमा का बोध कराता है। योद्धाओं के लिए चार विशेषणों का प्रयोग करके उनके चार गुणों को उजागर किया गया है: तेज, कौशल, क्रोध (उत्साह) और विद्या।

🕉️ आध्यात्मिक संदेश

इस श्लोक से हमें यह शिक्षा मिलती है कि एक आदर्श समाज में वीर और विद्वान पुरुषों का होना आवश्यक है। जैसे सिंह गुफा की शोभा बढ़ाते हैं, वैसे ही सुयोग्य योद्धा राज्य की शोभा और सुरक्षा करते हैं। यह हमें अपने कर्तव्यों में निपुण, तेजस्वी और ज्ञानी बनने की प्रेरणा देता है।