अयोध्या का वर्णन – श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
चित्रां चित्रगतां रम्यां स्त्रीरत्नैरुपशोभिताम्। हर्म्यप्रासादसम्बाधां रत्नवेदीविभूषिताम्॥
हिंदी अनुवाद
उसकी शोभा विचित्र थी। उसके महलों पर सोने का पानी चढ़ाया गया था। श्रेष्ठ एवं सुन्दर नारियों के समूह उस पुरी की शोभा बढ़ाते थे। वह सब प्रकार के रत्नों से भरी-पूरी तथा सातमंजिले प्रासादों से सुशोभित थी।
अर्थ / व्याख्या
यह श्लोक अयोध्या के सौन्दर्य, नारी समाज की विशिष्टता और वास्तुकला के उत्कर्ष का वर्णन करता है। स्वर्ण-निर्मित महल और रत्नमय वेदियाँ नगर की दिव्यता बढ़ाती थीं। स्त्रीरत्न का अर्थ है रत्नतुल्य स्त्रियाँ, जो संस्कृति और कला की धारक थीं।
टिप्पणी
हर्म्य का अर्थ है सात मंजिला महल या राजप्रासाद। यह अत्यंत भव्य होता था। वेदी यज्ञ वेदिका भी होती है और रत्नजड़ित आसन भी। यहाँ रत्नवेदी से तात्पर्य रत्नजड़ित चबूतरों या आसनों से है। स्त्रीरत्नैः से पता चलता है कि अयोध्या में शिक्षित, कलाविद् और सुंदर स्त्रियाँ समाज की शोभा थीं।
॥ श्रीरामायण बालकाण्ड सर्ग ५ श्लोक १६ ॥
हर्म्यप्रासादसम्बाधां रत्नवेदीविभूषिताम् ॥
harmyaprāsādasambādhāṃ ratnavedīvibhūṣitām ||
🔹 हिन्दी अनुवाद : उसकी शोभा विचित्र थी। उसके महलों पर सोने का पानी चढ़ाया गया था। श्रेष्ठ एवं सुन्दर नारियों के समूह उस पुरी की शोभा बढ़ाते थे। वह सब प्रकार के रत्नों से भरी-पूरी तथा सातमंजिले प्रासादों से सुशोभित थी।
🔹 English Translation : Its beauty was wonderful; the palaces were gilded with gold. Groups of excellent and beautiful women enhanced the city's charm. It was filled with all kinds of gems and adorned with seven-storied palaces (harmya) and jeweled platforms (vedīs).
🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)
| संस्कृत | व्याकरण | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|
| चित्राम् | विशेषण, स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचन | अद्भुत, विचित्र शोभा वाली |
| चित्रगताम् | विशेषण, स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचन | स्वर्णमयी / सोने से निर्मित |
| रम्याम् | विशेषण, स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचन | रमणीय, सुन्दर |
| स्त्रीरत्नैः | स्त्रीलिंग, तृतीया बहुवचन | श्रेष्ठ नारियों से |
| उपशोभिताम् | विशेषण, स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचन | सुशोभित |
| हर्म्यप्रासादसम्बाधाम् | विशेषण, स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचन | हर्म्य (भवनों) और प्रासादों से व्याप्त |
| रत्नवेदीविभूषिताम् | विशेषण, स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचन | रत्नों की वेदियों से विभूषित |
📜 श्लोक का ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व
यह श्लोक अयोध्या के स्थापत्य सौन्दर्य और सामाजिक उत्कर्ष का वर्णन करता है। स्वर्ण-निर्मित महल और रत्नजड़ित वेदियाँ अत्यंत धन-सम्पदा का संकेत हैं। हर्म्य (सात मंजिले प्रासाद) प्राचीन भारत की बहुमंजिला निर्माण परंपरा को दर्शाते हैं, जो बहुत उन्नत थी। स्त्रीरत्न शब्द महिलाओं के प्रति सम्मान और उनकी विशिष्टता को दर्शाता है – वे केवल सुन्दर ही नहीं, बल्कि गुणवान भी थीं, जो समाज की धुरी थीं।
वाल्मीकि ने यहाँ अयोध्या को एक ऐसे नगर के रूप में चित्रित किया है जहाँ कला, सौन्दर्य, भव्यता और सामाजिक सम्मान सभी एक साथ विद्यमान थे।
🕉️ आध्यात्मिक संदेश
यह श्लोक हमें सिखाता है कि हमारे जीवन में भी सुन्दरता और गुणों का समन्वय होना चाहिए। स्त्रीरत्न शब्द यह बताता है कि हमें सभी के प्रति सम्मान रखना चाहिए, विशेषकर नारी के प्रति, जो संस्कृति और संस्कारों की वाहक है। हर्म्य (भवन) हमारे उच्च आदर्शों के प्रतीक हैं और रत्नवेदियाँ हमारे धार्मिक कर्मों के।
॥ स्त्रीरत्नं संस्कृतिध्वजः, रत्नवेदी धर्मभूः ॥
जय श्री राम 🙏