अयोध्या के राजा और लोग – श्लोक 5

संस्कृत श्लोक

तेन सत्याभिसंधेन त्रिवर्गमनुतिष्ठता । पालिता सा पुरी श्रेष्ठा इन्द्रेणेवामरावती ॥

हिंदी अनुवाद

उस सत्यप्रतिज्ञ राजा द्वारा, जो धर्म, अर्थ, काम का पालन करता था, वह श्रेष्ठ नगरी ऐसे पालित की गई जैसे इन्द्र द्वारा अमरावती।

अर्थ / व्याख्या

इस श्लोक में राजा दशरथ की सत्यप्रतिज्ञता और त्रिवर्ग के पालन का वर्णन है। उन्होंने अयोध्या की रक्षा उसी प्रकार की जैसे इन्द्र अमरावती की।

टिप्पणी

त्रिवर्ग – धर्म, अर्थ और काम। ये तीन पुरुषार्थ कहे जाते हैं। राजा का कर्तव्य है कि वह इन तीनों का संतुलन बनाए रखे। अर्थ और काम का साधन धर्म से होना चाहिए।

॥ श्रीमद्वाल्मीकि रामायण – बालकाण्ड – सर्ग ६ – श्लोक ५ ॥

तेन सत्याभिसंधेन त्रिवर्गमनुतिष्ठता ।
पालिता सा पुरी श्रेष्ठा इन्द्रेणेवामरावती ॥
tena satyābhisandhena trivargamanutiṣṭhatā |
pālitā sā purī śreṣṭhā indreṇevāmarāvatī ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : उस सत्यप्रतिज्ञ राजा द्वारा, जो धर्म, अर्थ, काम का पालन करता था, वह श्रेष्ठ नगरी ऐसे पालित की गई जैसे इन्द्र द्वारा अमरावती।

🔹 English Translation : By that king who was true to his promise and who followed the three goals (virtue, wealth, pleasure), that excellent city was protected just as Amaravati by Indra.

🔍 शब्दार्थ तालिका

संस्कृत पदव्याकरणहिन्दी अर्थ
तेनसर्वनाम, पुल्लिंग, तृतीया एकवचनउस (राजा) के द्वारा
सत्याभिसंधेनपुल्लिंग, तृतीया एकवचन (बहुव्रीहि)सत्य प्रतिज्ञ वाला, सत्य संध करने वाला
त्रिवर्गम्पुल्लिंग, द्वितीया एकवचनधर्म, अर्थ, काम रूप तीन वर्गों का समूह
अनुतिष्ठतापुल्लिंग, तृतीया एकवचन (अनु + स्था धातु, शतृ प्रत्यय)आचरण करने वाला, पालन करने वाला
पालितास्त्रीलिंग, प्रथमा एकवचन (भूतकालिक कृदंत)पालन की गई
सासर्वनाम, स्त्रीलिंग, प्रथमा एकवचनवह
पुरीस्त्रीलिंग, प्रथमा एकवचननगरी
श्रेष्ठास्त्रीलिंग, प्रथमा एकवचनश्रेष्ठ, उत्तम
इन्द्रेणपुल्लिंग, तृतीया एकवचनइन्द्र द्वारा
इवअव्ययजैसे
अमरावतीस्त्रीलिंग, प्रथमा एकवचनइन्द्र की नगरी अमरावती

📖 श्लोक की व्याख्या

इस श्लोक में राजा दशरथ के दो महत्वपूर्ण गुण बताए गए हैं: सत्यप्रतिज्ञता और त्रिवर्ग का पालन

सत्याभिसंधेन – सत्य के प्रति आबद्ध, सत्य संकल्प वाला। दशरथ अपनी प्रतिज्ञाओं पर दृढ़ रहते थे। यह उनके चरित्र की नींव है। आगे चलकर वे अपनी पत्नी कैकेयी को दिए वरदान के कारण राम को वन भेजने का दुःख सहते हैं, लेकिन सत्य का निर्वाह करते हैं। यही गुण यहाँ संकेतित है।

त्रिवर्गमनुतिष्ठता – वे धर्म, अर्थ और काम का अनुशासनपूर्वक पालन करते थे। धर्म (धार्मिकता), अर्थ (आर्थिक समृद्धि) और काम (इच्छाओं की पूर्ति) – ये तीनों पुरुषार्थ हैं। एक आदर्श राजा इन तीनों में सामंजस्य बिठाता है। धर्म के अधीन रहकर अर्थ और काम का उपभोग ही उचित है।

पालिता सा पुरी श्रेष्ठा – उस राजा ने उस श्रेष्ठ नगरी (अयोध्या) का पालन किया। 'पालिता' का अर्थ सिर्फ रक्षा ही नहीं, बल्कि उसकी समृद्धि और विकास की देखभाल भी है।

इन्द्रेणेवामरावती – जैसे इन्द्र अमरावती की रक्षा करते हैं, वैसे ही दशरथ ने अयोध्या की रक्षा की। अमरावती देवताओं की राजधानी है, जो अजेय और समृद्ध है। अयोध्या को उसी के समान बताया गया है।

📚 सांस्कृतिक संदर्भ

त्रिवर्ग की अवधारणा भारतीय दर्शन में बहुत महत्वपूर्ण है। बाद में मोक्ष को चौथा पुरुषार्थ माना गया। परन्तु राजा के लिए त्रिवर्ग का पालन करना आवश्यक था। दशरथ इस प्रकार एक आदर्श राजा हैं जो धर्म, अर्थ और काम का समुचित पालन करते हैं।

इन्द्र और अमरावती की उपमा देकर अयोध्या की दिव्यता और समृद्धि का संकेत किया गया है। आगे के श्लोकों में अयोध्या के वैभव का और वर्णन होगा।

✨ विशेष: 'सत्याभिसंध' का एक अर्थ 'सत्य में समाधि लगाने वाला' भी हो सकता है। दशरथ का सत्य के प्रति समर्पण ही उनकी सबसे बड़ी पूँजी थी।

इस प्रकार यह श्लोक राजा के सत्यनिष्ठा और त्रिवर्ग-पालन के माध्यम से अयोध्या की रक्षा को इन्द्र के समान बताता है।

॥ जय श्री राम ॥