🙏 हनुमत तुम मेरे, लाओ संजीवनी

(लक्ष्मण मूर्छा प्रसंग – Hanumat Tum Mere Lao Sanjivani)

🎵 भाव: करुणा, समर्पण, राम-हनुमान का अटूट प्रेम

📝 भजन विवरण

🏷️ श्रेणी: हनुमान भजन / राम भक्ति
🎶 प्रसंग: लक्ष्मण मूर्छा – संजीवनी बूटी लाने की प्रार्थना
📀 भाव: करुण पुकार, आत्मसमर्पण, प्रेम
✍️ विशेषता: राम के मुख से निकली वेदना और हनुमान जी के प्रति अनन्य विश्वास का मार्मिक चित्रण

📜 भजन लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ मुखड़ा ॥

हनुमत तुम मेरे, लाओ संजीवनी,
कैसी विपदा पड़ी है, लखन के लिए।

॥ अंतरा १ – राम का वचन ॥

मेरे रघुवर सुनो, मांग लो प्राण भी,
तो मैं हंसकर के दे दूं वचन के लिए।

॥ अंतरा २ – राम की व्यथा ॥

राम ने यूं कहा हनुमान से,
तन अलग हो रहा हो जैसे जान से,
अंजनीसुत सुनो, मेरा संकट हरो,
रो रहा हूं मगर, तुम नहीं जानते,
है नहीं एक आंसू, नयन के लिए।

॥ अंतरा ३ – हनुमान का प्रत्युत्तर ॥

आप की हो कृपा, मेरे राम हे,
जग में ऐसा नहीं कोई काम रे,
रघुवर, मुझ पर, इतना एहसान है,
अभी जाता हूं मैं, आप को है नहीं,
फिर जरूरत किसी भी कथन के लिए।

🎵 रचनाकार : लोक परम्परा / भक्ति काव्य

🙏 भजन का अर्थ और संदेश

यह अत्यंत मार्मिक भजन लक्ष्मण मूर्छा प्रसंग पर आधारित है, जब शक्ति बाण से लक्ष्मण मूर्छित हो गए थे। भक्त राम-हनुमान के संवाद के रूप में इस भजन की रचना करता है। “हनुमत तुम मेरे, लाओ संजीवनी, कैसी विपदा पड़ी है, लखन के लिए” – राम हनुमान से संजीवनी बूटी लाने की प्रार्थना करते हैं, क्योंकि लक्ष्मण पर भारी विपदा आ पड़ी है।

राम कहते हैं कि यदि वे उनसे प्राण भी माँग लें, तो वे हँसकर दे देंगे – “मेरे रघुवर सुनो, मांग लो प्राण भी, तो मैं हंसकर के दे दूं वचन के लिए”। यह राम की लक्ष्मण के प्रति अटूट प्रेम और त्याग की भावना को दर्शाता है।

दूसरे अंतरे में राम की व्यथा का वर्णन है – “तन अलग हो रहा हो जैसे जान से”। वे कहते हैं कि वे रो रहे हैं, लेकिन हनुमान नहीं जानते, क्योंकि उनके नयनों में एक भी आँसू नहीं है – अत्यधिक दुःख में भी राम संयमित हैं।

तीसरे अंतरे में हनुमान का उत्तर है – “आप की हो कृपा, मेरे राम हे, जग में ऐसा नहीं कोई काम रे”। हनुमान कहते हैं कि आपकी कृपा से कोई भी काम असंभव नहीं। वे कहते हैं कि रघुवर ने उन पर इतना एहसान किया है कि वे बिना किसी और वचन के अभी जाते हैं। यह हनुमान की निष्ठा और तत्परता को दर्शाता है।

यह भजन सिखाता है कि सच्चे भक्त के लिए कोई काम कठिन नहीं होता, और राम-हनुमान का प्रेम अनन्य एवं अटूट है।

🔍 भजन का विशेष महत्त्व

लक्ष्मण मूर्छा – करुण प्रसंग: रामायण का यह प्रसंग अत्यंत भावुक है। इस भजन में राम की व्यथा और हनुमान की निष्ठा का अद्भुत चित्रण है।

राम का आत्म-संयम: “है नहीं एक आंसू, नयन के लिए” – यह पंक्ति राम के अद्भुत संयम और गंभीरता को दर्शाती है। भक्त राम के दुःख को भी उनके चरित्र के अनुसार प्रस्तुत करता है।

हनुमान का समर्पण: “अभी जाता हूं मैं, आप को है नहीं फिर जरूरत किसी भी कथन के लिए” – हनुमान बिना किसी आदेश या वादे के तुरंत कार्य करने को तैयार हैं। यह उनके सेवा भाव और तत्परता का प्रतीक है।

💖 भक्ति रस का संगम

🎯 संदेश

भक्ति में समर्पण का यही उच्चतम रूप है – राम के लिए प्राण देने को तत्पर होना और हनुमान के लिए राम की एक पुकार ही पर्याप्त होना।

✨ आस्था का प्रतीक

यह भजन हमें सिखाता है कि प्रभु के प्रति सच्ची भक्ति और सेवा ही सबसे बड़ा धर्म है। हनुमान जी की तरह निस्वार्थ भाव से सेवा करने वाले को प्रभु की कृपा अवश्य प्राप्त होती है।

🙏 ॐ हनुमते नमः ।। जय श्री राम ।। जय लक्ष्मण ।।

🙏 आभार एवं स्रोत / Thanks & Acknowledgment

इस भजन लिरिक्स एवं प्रस्तुति हेतु हार्दिक आभार:

  • 🔗 स्रोत / Source: हनुमत तुम मेरे लाओ संजीवनी – हिंदी भजन मंजरी (Hindi Bhajan Manjari)
  • ✍️ लेखक / Author Details: यह भजन परम्परागत लोक भक्ति काव्य है। प्रस्तुति एवं संकलन हिंदी भजन मंजरी (Hindi Bhajan Manjari) द्वारा। इस भजन के मूल रचयिता अज्ञात हैं, किंतु भक्ति परम्परा में यह अत्यंत लोकप्रिय है। हम हिंदी भजन मंजरी टीम के सभी योगदानकर्ताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हैं, जिन्होंने इस भजन को सुलभ बनाया।
  • 📖 अतिरिक्त जानकारी: भजन मंजरी टीम द्वारा संकलित एवं प्रकाशित। सभी धार्मिक भावनाओं एवं परम्पराओं का सम्मान करते हुए यह आभार प्रस्तुत किया गया है।

🙏 हनुमान भक्ति एवं रामायण के इस अमर प्रसंग को सहेजने हेतु सभी कलाकारों एवं संकलनकर्ताओं का धन्यवाद। जय श्री राम, जय हनुमान।

॥ इति संजीवनी भजनम् ॥
॥ हनुमत तुम मेरे लाओ संजीवनी, कैसी विपदा पड़ी है लखन के लिए ॥