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Holi Bhajan

रंग बरसे भीगे चुनरवाली – सिलसिला (Rang Barse Bhige Chunarwali) | Bollywood Holi Song

365 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Chandan Sah
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें।

🎬 रंग बरसे भीगे चुनरवाली – सिलसिला

(Rang Barse Bhige Chunarwali) – Bollywood Holi Song 1981

गीतकार: हरिवंश राय बच्चन ॥

🎬 गीत विवरण

🎥 फिल्म: सिलसिला (1981)
🎤 गायक: अमिताभ बच्चन
✍️ गीतकार: हरिवंश राय बच्चन
🎶 संगीतकार: शिव-हरि
🏷️ श्रेणी: होली गीत, फिल्मी गीत

📜 गीत लिरिक्स (हिन्दी में)

॥ स्थायी ॥

रंग बरसे भीगे चुनरवाली, रंग बरसे
अरे कैने मारी पिचकारी तोरी भीगी अंगिया
ओ रंगरसिया रंगरसिया, हो
रंग बरसे भीगे चुनरवाली, रंग बरसे ...

॥ अंतरा १ ॥

सोने की थाली में जोना परोसा
अरे, सोने की थाली में, जोना परोसा
हाँ, सोने की थाली में जोना परोसा
अरे खाए गोरी का यार, बलम तरसे रंग बरसे
होली है!
ओ रंग बरसे भीगे चुनरवाली, रंग बरसे ...

॥ अंतरा २ ॥

लौंगा इलायची का, अरे लौंगा इलायची का
लौंगा इलायची का? हाँ!
अरे लौंगा इलायची का बीड़ा लगाया
हाँ लौंगा इलायची का बीड़ा लगाया
चाबे गोरी का यार, बलम तरसे रंग बरसे
होली है!
ओ रंग बरसे भीगे चुनरवाली, रंग बरसे ...

॥ अंतरा ३ ॥

अरे बेला चमेली का सेज बिछाया
बेला चमेली का, सेज बिछाया
अरे बेला चमेली का सेज बिछाया
हाँ बेला चमेली का सेज बिछाया
सोए गोरी का यार, बलम तरसे रंग बरसे
होली है!
ओ रंग बरसे भीगे चुनरवाली, रंग बरसे ...

🎵 फिल्म: सिलसिला (1981) | संगीत: शिव-हरि | गीत: हरिवंश राय बच्चन | गायक: अमिताभ बच्चन

🎭 गीत का अर्थ और भावार्थ

"रंग बरसे भीगे चुनरवाली" – यह गीत होली के उल्लास और श्रृंगार रस से भरपूर है। "भीगे चुनरवाली" उस स्त्री को संबोधित करता है जिसकी चुनरी (दुपट्टा) रंगों से भीग गई है।

"कैने मारी पिचकारी तोरी भीगी अंगिया" – किसने पिचकारी मारी कि तेरा अंगिया भीग गया? यह प्रश्न श्रृंगारिक रंग में रचा है। "ओ रंगरसिया" – हे रंगों के रसिया (कृष्ण या प्रेमी) को संबोधित किया गया है।

अंतरों में "सोने की थाली में जोना परोसा" – जोना (मक्का या भोजन) सोने की थाली में परोसा गया है, जिसे गोरी का यार (प्रेमी) खाता है और बलम (पति या प्रेमिका) तरसती है। "लौंगा इलायची का बीड़ा लगाया" – लौंग-इलायची का पान या बीड़ा तैयार किया गया है, जिसे गोरी का यार चबाता है। "बेला चमेली का सेज बिछाया" – बेला और चमेली के फूलों से सेज सजाई गई है, जिस पर गोरी का यार सोता है।

हर अंतरे के बाद आता है – "बलम तरसे रंग बरसे" यानी प्रियतम तरस रहा है और रंग बरस रहा है। और हर बार उद्घोष होता है – "होली है!" – यह सब होली के अवसर पर हो रहा है।

यह गीत महाकवि हरिवंश राय बच्चन द्वारा रचित है और इसे स्वयं अमिताभ बच्चन ने गाया है। फिल्म सिलसिला में यह गीत अमिताभ बच्चन, रेखा और जया बच्चन पर फिल्माया गया था।

🎬 फिल्म सिलसिला और यह गीत

सिलसिला 1981 में आई यश चोपड़ा की प्रसिद्ध फिल्म थी, जिसमें अमिताभ बच्चन, रेखा और जया बच्चन ने मुख्य भूमिकाएँ निभाई थीं। फिल्म का संगीत शिव-हरि (पंडित शिवकुमार शर्मा और हरिप्रसाद चौरसिया) ने दिया था।

रंग बरसे इस फिल्म का सबसे लोकप्रिय गीत है और आज भी होली के अवसर पर हर जगह बजाया जाता है। खास बात यह है कि इस गीत को अमिताभ बच्चन ने स्वयं अपनी आवाज़ दी थी, जो उनके द्वारा गाए गए कुछ ही गीतों में से एक है।

गीत के बोल महाकवि हरिवंश राय बच्चन (अमिताभ बच्चन के पिता) ने लिखे थे। यह गीत अपनी श्रृंगारिकता, उत्साह और होली के रंगों के बीच प्रेम के भावों के लिए अमर है।

इस गीत में प्रयुक्त शब्द जैसे "जोना", "लौंगा इलायची का बीड़ा", "बेला चमेली का सेज" – ये सभी ग्रामीण और पारंपरिक भारतीय संस्कृति के प्रतीक हैं, जिन्हें बच्चन साहब ने बड़ी खूबसूरती से बुना है।

🔍 गीत का विशेष महत्त्व

🎨 होली का पर्यायवाची गीत

यह गीत इतना लोकप्रिय हुआ कि आज यह होली का पर्याय बन गया है। भारत के कोने-कोने में होली के दिन यह गीत बजता है और लोग इस पर झूमते हैं।

💞 तीन कलाकारों का संगम

यह गीत पिता (हरिवंश राय बच्चन) के लिखे शब्दों, पुत्र (अमिताभ बच्चन) की आवाज़ और फिल्म में उनके अभिनय का अद्भुत संगम है। यह तीनों पीढ़ियों के कलाकारों का सामूहिक योगदान है।

🎯 संदेश : होली के रंगों के बीच प्रेम और उत्साह का यह गीत हमें सिखाता है कि त्यौहार सिर्फ रंगों से नहीं, बल्कि अपनों के साथ मिलकर मनाने से खास बनते हैं। रंग बरसते हैं, दिल बरसते हैं, और प्रेम भी बरसता है।

॥ रंग बरसे भीगे चुनरवाली ॥
॥ होली है! ॥

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

यह अत्यंत ही पावन भक्ति रस से परिपूर्ण भजन "रंग बरसे भीगे चुनरवाली – सिलसिला (Rang Barse Bhige Chunarwali) | Bollywood Holi Song" ईश्वर के प्रति अनन्य प्रेम और पूर्ण शरणागति का जीवंत उदाहरण है। सनातन धर्म में संकीर्तन और प्रभु नाम का जाप कलयुग का परम साधन बताया गया है। इस भजन के प्रत्येक शब्द में जीवात्मा का अपनी मूल परम सत्ता (परमात्मा) से मिलने का गहरा अनुराग छुपा हुआ है।

भजन का मुख्य संदेश यही है कि संसार के समस्त कार्यों को करते हुए भी यदि मनुष्य का मन निरंतर ईश्वर के चरणों में लीन रहे, तो वह संसार सागर से सहज ही पार उतर जाता है। यह भजन साधक के अंतर्मन को झंकृत कर उसमें भक्ति रूपी अमृत का संचार करता है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

श्रीमद्भगवद्गीता के अनुसार, भगवान श्री कृष्ण कहते हैं कि जो भक्त निरंतर मेरा नाम संकीर्तन करते हैं, वे सदा मुझमें ही निवास करते हैं। यह भजन साधक के मन को चंचलता से मुक्त कर आध्यात्मिक साधना की ओर प्रेरित करता है।

सनातन संस्कृति के विभिन्न व्रत, उपवास और त्यौहारों की सही तिथियों के लिए सनातन कैलेंडर २०२६ तथा दैनिक पंचांग का अवलोकन अवश्य करें। इस भक्ति भजन के नियमित संकीर्तन से घर की नकारात्मक ऊर्जा समाप्त होती है, मन शांत और प्रसन्न रहता है तथा पारिवारिक क्लेश दूर होकर शांति का उदय होता है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

भजन संकीर्तन के लिए प्रातःकाल अथवा सायं संध्या का समय सर्वोत्तम है। एक शांत स्थान पर पूर्वाभिमुख बैठकर, भगवान की प्रतिमा के सम्मुख धूप-दीप प्रज्वलित करें और तन्मयता से संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य क्या है?

भजन संकीर्तन का मुख्य उद्देश्य मन को संसार की व्यर्थ की चिंताओं से हटाकर ईश्वर के ध्यान में लगाना और आत्मिक आनंद की प्राप्ति करना है।

भजनों को गाने की सही विधि क्या है?

भजनों को गाने के लिए राग-सुर से अधिक शुद्ध भाव और प्रेमपूर्ण हृदय की आवश्यकता होती है। मन में पूर्ण श्रद्धा रखकर शांत चित्त से संकीर्तन करें।

क्या सामूहिक भजन संकीर्तन अधिक फलदायी होता है?

हाँ, शास्त्रों के अनुसार सामूहिक संकीर्तन से दिव्य स्पंदन (Vibrations) उत्पन्न होते हैं, जिससे वहां उपस्थित सभी लोगों का मन शुद्ध होता है और सामाजिक एकता बढ़ती है।

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विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 02 Sep 2026

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