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Hanuman Bhajan

श्री हनुमान पचासा (Shri hanuman pachasa lyrics in hindi) - Bhaktilok

225 पाठकों ने पढ़ा | लेखक: Deepak Kumar Bind
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मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

 श्री हनुमान पचासा (Shri hanuman pachasa lyrics in hindi) - 


॥श्री हनुमान पचासा ॥


राम लखन वैदेही सुमिरि, 

तुलसी शीश नवाय।

गाऊँ गुण हनुमान के, 

जो सब काज बनाय॥


बुद्धि हीन तनु जानिके, 

गहौं शरण तब आय।

शब्द-सुमन अर्पण करूँ, 

स्वीकारो रघुराय॥


प्रथमहिं गुरु पद कमल मनाऊँ।

जासु कृपा निर्मल मति पाऊँ॥


पुनि सुमिरौं शारदा भवानी।

सत्य करहु मम रसना बानी॥


चैत मास पूरन शशि आया।

केसरी गृह आनंद छाया॥


अंजनी गर्भ प्रकटे हनुमाना।

रुद्र रूप धरि परम सुजाना॥


बाल चरित अति अगम अपारा।

देखि चकित भयो जगत संसारा॥


उदय भानु को फल तुम जाना।

कूदि गगन गहेउ विधि नाना॥


वज्र आघात हनु टूटत भयऊ।

तब ते नाम हनुमान कहयऊ॥


सूरज सो सब विद्या पाई।

ज्ञानी सम कोउ नाहि भाई॥


राम काज हित जनम तिहारा।

वानर तन धरि देव पधारा॥


कानन मिले राम रघुराई।

लखि स्वरूप सुधि बुधि बिसराई॥


विप्र रूप तजि निज रूप दीन्हा।

चरण पखारि वंदन कीन्हा॥


ऋष्यमूक पर्वत ले आये।

सखा सुग्रीव से मेल कराये॥


बालि वध प्रभु हाथ करावा।

कपिन राज सुग्रीवहिं पावा॥


सिया खोज दिशि दक्षिण धाये।

अतुलित बल पौरुष दिखलाये॥


सागर तीर बिचार बिचारा।

कूदउँ पार सिंधु विस्तारा॥


पर्वत चढ़ि जब कीन्ह उडाना।

काँप उठीं सब दिशा महान॥


नाक कान लंकिनी के तोरे।

देखे कपि लंका के छोरे॥


जानकी चरणन शीश नवायो।

कर जोड़ि प्रभु संदेश सुनायो॥


अशोक वाटिका विध्वंस कीन्हा।

असुरन मारि परम सुख लीन्हा॥


लागी आग लंक जब भारी।

त्राहि त्राहि बोले नर-नारी॥


राख बनाय नगर सब जारा।

सिंधु महँ कूदि बुझावत बारा॥


मातु चूड़ामणि हर्षित लाये।

राम चरण धरि कंठ लगाये॥


नल-नीलहिं रचि सेतु अपारा।

उतरी फौज सिंधु के पारा॥


रणभेरी बाजी अति घोरा।

राक्षस दल महँ मच्यो शोरा॥


लखन लाल जब मूर्छित भये।

द्रोणागिरि लेवन तुम गये॥


कालनेमि कपटी मग रोका।

बुद्धि बल ते पठयो यम लोका॥


पर्वत हाथ उठाय उड़ि आये।

प्राण जीवन लखन के पाये॥


अहिरावण छल कीन्हा भारी।

देवी भवन ले गयो चोरी॥


प्रकटे तहाँ कपि विकराला।

दुष्टन मारि कियो बेहाला॥


राम विजय करि अवध सिधारे।

संग सोहते पवन दुलारे॥


लाल लंगोट लाल तन सोहे।

मूरति देखि सकल जग मोहे॥


गदा हाथ में सोहत भारी।

दानव दल के प्रबल संहारी॥


रोम रोम में राम समाये।

छाती फाड़ जगत दिखलाये॥


राम चरण नित सेवत रहियो।

दास भाव उर दृढ़ करि गहियो॥


दैत्य दानव सब थर-थर काँपे।

कपि की गर्जन सुनि जब हाँफे॥


वज्र देह तुम परम विशाला।

काटत भक्तन के भ्रम जाला॥


जहँ जहँ राम कीर्तन होई।

तहँ रहत तुम जोरी कर दोई॥


ज्ञान विवेक भरे भंडारा।

करहु कृपा अब खोलो द्वारा॥


तुम बिन कोउ न हितू हमारा।

तुम ही बंधु तुम ही रखवारा॥


शिव शंकर के अंश कहावो।

भक्त जनन के कष्ट मिटावो॥


दीन दयाल दया अब कीजै।

भक्ति दान मोहि अद्भुत दीजै॥


राम नाम निशि दिन जो गावे।

सो नर तुमरे मन को भावे॥


व्याधि मिटै औ मिटै कलेशा।

व्यापत नहिं दुख कोउ लवलेशा॥


जय कपीश जय पवन कुमारा।

तारो प्रभु यह दास तिहारा॥


शरण पड़े की लाज बचावो।

कृपा दृष्टि प्रभु आप दिखावो॥


आवो कपि अब देर न कीजै।

दर्शन मोहि निज अद्भुत दीजै॥


बांह गहे की लाज निभाना।

मैं बालक तुम पिता समाना॥


विनती सुनहु अंजनी लाला।

मेटहु सकल जगत जंजाला॥


तुलसी नित चरण मनावे।

राम रूप उर भीतर लावे॥


बार-बार कर जोरि मनाऊँ।

भक्ति-मुक्ति तव शरण ही पाऊँ॥


पवन तनय संकट हरन, 

मंगल मूरति रूप।

राम लखन सीता सहित, 

हृदय बसहु सुर भूप॥


यही पचासा नित पढै, 

धरि धीरज विश्वास।

तेहि के उर महँ बसत हैं, 

रघुवर सहित सुदास॥


बोलिए सियावर रामचंद्र की जय

पवनसुत हनुमान की जय


वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें।

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

संकटमोचन हनुमान जी का यह भजन " श्री हनुमान पचासा (Shri hanuman pachasa lyrics in hindi) - Bhaktilok" बल, बुद्धि, विद्या और भक्ति का संचार करने वाला है। कलयुग के जागृत देव श्री हनुमान जी की महिमा अपार है। इस भजन का मुख्य उद्देश्य साधक के भीतर के भय को दूर कर उसमें आत्मगौरव और निष्काम सेवा भाव जागृत करना है।

भजन की चौपाइयों और पंक्तियों में हनुमान जी की लंका दहन, संजीवनी बूटी लाना और प्रभु श्री राम के प्रति अनन्य प्रेम का वर्णन होता है। हनुमान जी की शरण में जाने पर बड़े से बड़ा संकट भी क्षण भर में समाप्त हो जाता है, यही इस भजन की मूल भावना है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

हनुमान चालीसा और सुंदरकांड की भांति ही हनुमान भजनों का विशेष धार्मिक महत्त्व है। हनुमान जी को अष्ट सिद्धि और नौ निधियों के दाता के रूप में पूजा जाता है। इस पावन भजन के गायन से भूत-पिशाच, नकारात्मक ऊर्जा और सभी प्रकार के ऊपरी बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें। हनुमान भजन से आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि होती है, मानसिक रोग जैसे तनाव, अनिद्रा और डिप्रेशन दूर होते हैं। यह छात्रों की बुद्धि और परीक्षा में सफलता के लिए भी रामबाण है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

हनुमान जी की पूजा के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन विशेष रूप से निर्धारित है। लाल आसन पर बैठकर, हनुमान जी के सम्मुख चमेली के तेल का दीपक जलाएं और पूरे मनोयोग से इस भजन का संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

हनुमान जी को किस दिन चमेली का तेल चढ़ाना चाहिए?

शनिवार और मंगलवार के दिन हनुमान जी को सिंदूर में चमेली का तेल मिलाकर चढ़ाना अत्यंत शुभ और संकट निवारक माना गया है।

क्या हनुमान भजन परीक्षा के भय को दूर करने में सहायक है?

हाँ, हनुमान जी के भजनों और मंत्रों के संकीर्तन से मन एकाग्र होता है, भय का नाश होता है और याददाश्त बढ़ती है।

शनि दोषों की शांति के लिए हनुमान उपासना क्यों की जाती है?

हनुमान जी ने शनिदेव को रावण के बंधन से मुक्त कराया था, जिसके कारण शनिदेव ने वचन दिया था कि जो हनुमान जी की भक्ति करेगा, उसे शनि जनित पीड़ा नहीं भोगनी पड़ेगी।

विश्वसनीय धार्मिक एवं आध्यात्मिक जानकारी

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

समीक्षित एवं सत्यापित अंतिम अद्यतन: 01 Sep 2026

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