Hanuman Bhajan मंगलवार विशेष (श्री हनुमान जी व मंगल देव)

जय हनुमान ज्ञान गुण सागर लिरिक्स (Jay Hanuman Gyan Gun Sagar Lyrics in Hindi) - Hanuman Chalisa by Gulsan Kumar

हनुमान चालीसा के प्रसिद्ध दोहे जय हनुमान ज्ञान गुण सागर का संपूर्ण पाठ, हिंदी अर्थ और भावार्थ पढ़ें। भक्तिपूर्ण अनुभव के लिए आज ही विजिट करें।

प्रस्तावना एवं परिचय

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें

 

|| दोहा ||

श्रीगुरु चरन सरोज रज

निज मनु मुकुरु सुधारि 

बरनउँ रघुबर बिमल जसु

जो दायकु फल चारि 

बुद्धिहीन तनु जानिके

सुमिरौं पवन-कुमार 

बल बुधि बिद्या देहु मोहिं

हरहु कलेस बिकार 

|| चौपाई ||

जय हनुमान ज्ञान गुन सागर 

जय कपीस तिहुँ लोक उजागर 

राम दूत अतुलित बल धामा 

अंजनि पुत्र पवनसुत नामा 

महाबीर बिक्रम बजरंगी 

कुमति निवार सुमति के संगी 

कंचन बरन बिराज सुबेसा 

कानन कुण्डल कुँचित केसा ४

हाथ बज्र अरु ध्वजा बिराजै 

काँधे मूँज जनेउ साजै 

शंकर सुवन केसरी नंदन 

तेज प्रताप महा जगवंदन 

बिद्यावान गुनी अति चातुर 

राम काज करिबे को आतुर 

प्रभु चरित्र सुनिबे को रसिया 

राम लखन सीता मन बसिया ८

सूक्ष्म रूप धरि सियहिं दिखावा 

बिकट रूप धरि लंक जरावा 

भीम रूप धरि असुर सँहारे 

रामचन्द्र के काज सँवारे 

लाय सजीवन लखन जियाए 

श्री रघुबीर हरषि उर लाये 

रघुपति कीन्ही बहुत बड़ाई 

तुम मम प्रिय भरतहि सम भाई १२

सहस बदन तुम्हरो जस गावैं 

अस कहि श्रीपति कण्ठ लगावैं 

सनकादिक ब्रह्मादि मुनीसा 

नारद सारद सहित अहीसा 

जम कुबेर दिगपाल जहाँ ते 

कबि कोबिद कहि सके कहाँ ते 

तुम उपकार सुग्रीवहिं कीह्ना 

राम मिलाय राज पद दीह्ना १६

तुम्हरो मंत्र बिभीषण माना 

लंकेश्वर भए सब जग जाना 

जुग सहस्त्र जोजन पर भानु 

लील्यो ताहि मधुर फल जानू 

प्रभु मुद्रिका मेलि मुख माहीं 

जलधि लाँघि गये अचरज नाहीं 

दुर्गम काज जगत के जेते 

सुगम अनुग्रह तुम्हरे तेते २०

राम दुआरे तुम रखवारे 

होत न आज्ञा बिनु पैसारे 

सब सुख लहै तुम्हारी सरना 

तुम रक्षक काहू को डरना 

आपन तेज सम्हारो आपै 

तीनों लोक हाँक तै काँपै 

भूत पिशाच निकट नहिं आवै 

महावीर जब नाम सुनावै २४

नासै रोग हरै सब पीरा 

जपत निरंतर हनुमत बीरा 

संकट तै हनुमान छुडावै 

मन क्रम बचन ध्यान जो लावै 

सब पर राम तपस्वी राजा 

तिनके काज सकल तुम साजा 

और मनोरथ जो कोई लावै 

सोई अमित जीवन फल पावै २८

चारों जुग परताप तुम्हारा 

है परसिद्ध जगत उजियारा 

साधु सन्त के तुम रखवारे 

असुर निकंदन राम दुलारे 

अष्ट सिद्धि नौ निधि के दाता 

अस बर दीन जानकी माता 

राम रसायन तुम्हरे पासा 

सदा रहो रघुपति के दासा ३२

तुम्हरे भजन राम को पावै 

जनम जनम के दुख बिसरावै 

अंतकाल रघुवरपुर जाई 

जहाँ जन्म हरिभक्त कहाई 

और देवता चित्त ना धरई 

हनुमत सेइ सर्ब सुख करई 

संकट कटै मिटै सब पीरा 

जो सुमिरै हनुमत बलबीरा ३६

जै जै जै हनुमान गोसाईं 

कृपा करहु गुरुदेव की नाईं 

जो सत बार पाठ कर कोई 

छूटहि बंदि महा सुख होई 

जो यह पढ़ै हनुमान चालीसा 

होय सिद्धि साखी गौरीसा 

तुलसीदास सदा हरि चेरा 

कीजै नाथ हृदय मह डेरा ४०

|| दोहा ||

पवन तनय संकट हरन

मंगल मूरति रूप 

राम लखन सीता सहित

हृदय बसहु सुर भूप 

वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें।

साझा करें:

🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

संकटमोचन हनुमान जी का यह भजन "जय हनुमान ज्ञान गुण सागर लिरिक्स (Jay Hanuman Gyan Gun Sagar Lyrics in Hindi) - Hanuman Chalisa by Gulsan Kumar - Bhaktilok" बल, बुद्धि, विद्या और भक्ति का संचार करने वाला है। कलयुग के जागृत देव श्री हनुमान जी की महिमा अपार है। इस भजन का मुख्य उद्देश्य साधक के भीतर के भय को दूर कर उसमें आत्मगौरव और निष्काम सेवा भाव जागृत करना है।

भजन की चौपाइयों और पंक्तियों में हनुमान जी की लंका दहन, संजीवनी बूटी लाना और प्रभु श्री राम के प्रति अनन्य प्रेम का वर्णन होता है। हनुमान जी की शरण में जाने पर बड़े से बड़ा संकट भी क्षण भर में समाप्त हो जाता है, यही इस भजन की मूल भावना है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

हनुमान चालीसा और सुंदरकांड की भांति ही हनुमान भजनों का विशेष धार्मिक महत्त्व है। हनुमान जी को अष्ट सिद्धि और नौ निधियों के दाता के रूप में पूजा जाता है। इस पावन भजन के गायन से भूत-पिशाच, नकारात्मक ऊर्जा और सभी प्रकार के ऊपरी बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें। हनुमान भजन से आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि होती है, मानसिक रोग जैसे तनाव, अनिद्रा और डिप्रेशन दूर होते हैं। यह छात्रों की बुद्धि और परीक्षा में सफलता के लिए भी रामबाण है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

हनुमान जी की पूजा के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन विशेष रूप से निर्धारित है। लाल आसन पर बैठकर, हनुमान जी के सम्मुख चमेली के तेल का दीपक जलाएं और पूरे मनोयोग से इस भजन का संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

हनुमान जी को किस दिन चमेली का तेल चढ़ाना चाहिए?

शनिवार और मंगलवार के दिन हनुमान जी को सिंदूर में चमेली का तेल मिलाकर चढ़ाना अत्यंत शुभ और संकट निवारक माना गया है।

क्या हनुमान भजन परीक्षा के भय को दूर करने में सहायक है?

हाँ, हनुमान जी के भजनों और मंत्रों के संकीर्तन से मन एकाग्र होता है, भय का नाश होता है और याददाश्त बढ़ती है।

शनि दोषों की शांति के लिए हनुमान उपासना क्यों की जाती है?

हनुमान जी ने शनिदेव को रावण के बंधन से मुक्त कराया था, जिसके कारण शनिदेव ने वचन दिया था कि जो हनुमान जी की भक्ति करेगा, उसे शनि जनित पीड़ा नहीं भोगनी पड़ेगी।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

पाठकों के विचार (0)

भक्ति रस चर्चा में भाग लें

लिरिक्स कॉपी कर लिया गया है!
🕉️
🚩 दैनिक अमृतवाणी

दैनिक पंचांग व पावन व्रत अलर्ट प्राप्त करें

प्रतिदिन प्रातः शुभ मुहूर्त, चौघड़िया एवं एकादशी व्रत कथा सीधे अपने इनबॉक्स में पाएं।

पंचांग
पेज लिंक कॉपी हो गई!