Rani Sati Dadi Bhajan सोमवार विशेष (महादेव शिव व चंद्र देव)

थारो म्हारो मावड़ी घणी पुराणी प्रीत लिरिक्स (Tharo mahari mawadi ghani purani preet Lyrics in Hindi) - Rani Sati Dadi Bhajan

रानी सती दादी का प्रसिद्ध भजन 'थारो म्हारो मावड़ी घणी पुराणी प्रीत' के लिरिक्स हिंदी में पढ़ें। झुंझुनूं वाली दादी के चरणों में समर्पित भावपूर्ण संकीर्तन।

रानी सती दादी भजन

श्रेणी: रानी सती दादी भजन अपडेटेड: 2026 भक्ति भाव: अनन्य समर्पण एवं वात्सल्य

झुंझुनूं वाली दादी रानी सती के चरणों में समर्पित "थारो म्हारो मावड़ी घणी पुराणी प्रीत" एक अत्यंत भावपूर्ण, मधुर और लोकप्रिय राजस्थानी दादी भजन है। रानी सती दादीजी को समर्पित यह संकीर्तन भक्तों के हृदय में अगाध श्रद्धा, वात्सल्य और पीढ़ियों पुरानी आत्मीयता का भाव जागृत करता है। इस भजन में एक भक्त और उसकी आद्या शक्ति 'मावड़ी' (माता) के बीच के अटूट रिश्ते को बेहद सरल शब्दों में पिरोया गया है। जहाँ सांसारिक जिम्मेदारियों और पियर-ससुराल के बीच उलझा हुआ मन केवल अपनी दादी के स्मरण मात्र से शीतलता पाता है, वहीं यह भजन हर उस साधक के लिए प्रेरणास्त्रोत है जो अपनी आराध्य के साथ सीधा और जीवंत संबंध महसूस करता है। इसे प्रातःकाल की बेला में, संध्या वंदन के समय, अथवा दादी के मंगला पाठ व सत्संग आयोजनों में पूरी तल्लीनता के साथ गाया जाता है।

सम्पूर्ण भजन लिरिक्स | Complete Bhajan Lyrics

थारो म्हारो मावड़ी घणी पुराणी प्रीत,
केड आवां तो लागे है जईयां आग्या म्हे तो पीर।
थारो म्हारो मावड़ी...

जठै जठै मैं चालूँ मावड़ी थे तो फूल बिछाओ हो,
काणी मैं देखूँ मावड़ी नजर मन्ने थे ही आओ।
मिलतो रवे दादी म्हाने इक थारो प्यार दुलार,
थारो म्हारो मावड़ी...

सासरिये में चिंता मावड़ी केड में आराम है,
पिहरिये के लाड में दादी बीते चारों याम हैं।
म्हारे सासरिये में सगला सब जावण केड तैयार,
थारो म्हारो मावड़ी...

थारी किरपा से ही मधु को हरयो भरयो परिवार है,
थारो जवाईं भी म्हारी दादी करे थारी मनुहार है।
थारा टाबरिया भी दादी बस करै थाने ही याद,
थारो म्हारो मावड़ी...

विदा होने की जब घड़ी आवे हिवड़ो भर-भर जावे है,
आंख्या का पानी मोती बन चरणां में चढ़ जावे है,
मन्... (भाव विभोर अवस्था में संकीर्तन)

भजन का सरल हिंदी अर्थ एवं भावार्थ | Bhajan Meaning & Bhavarth

इस भजन की हर पंक्ति में एक भक्त का अपनी इष्ट देवी के प्रति अनन्य अनुराग झलकता है। 'मावड़ी' शब्द का अर्थ माँ होता है, और भक्त अपनी रानी सती दादी को अपनी अलौकिक जननी के रूप में देखता है। भक्त कहता है कि हे मावड़ी! हमारा और आपका रिश्ता आज का नहीं, बल्कि जन्म-जन्मांतरों का पुराना और अटूट है। जब भी मैं तुम्हारे दरबार (केड) में आता हूँ, मुझे ऐसा प्रतीत होता है मानो मैं अपने वास्तविक मायके (पीहर) आ गया हूँ जहाँ किसी प्रकार का बंधन या भय नहीं होता, केवल निश्चिंतता और प्रेम होता है।

आगे भक्त अपनी दीनता और दादी की अहेतुकी कृपा का वर्णन करते हुए कहता है कि हे मावड़ी! मैं जीवन के मार्ग में जिधर भी कदम बढ़ाता हूँ, आप अपनी कृपा से मेरे रास्ते के काँटों को फूलों में बदल देती हैं। मेरी आँखें जिस भी दिशा में देखती हैं, मुझे हर तरफ आपकी ही ममतामयी छाया और स्वरूप दिखाई देता है। जीवन की उलझनों के बीच मुझे केवल आपका यह असीम प्यार और दुलार चाहिए।

सांसारिक जीवन की तुलना करते हुए भक्त कहता है कि इस भौतिक संसार (ससुराल) में নানা प्रकार की चिंताएँ और उत्तरदायित्व हैं, किंतु आपके दरबार (मायके) में आने पर जीवन के सारे कष्ट दूर हो जाते हैं और असीम शांति मिलती है। आपकी ही अकृत्रिम कृपा से यह पूरा परिवार हरा-भरा और सुखी है। अंत में, जब दादी के दरबार से विदा होने का समय आता है, तो भक्त का हृदय भर आता है और आँखों से छलके आँसू मोती बनकर दादी के श्री चरणों में अर्पित हो जाते हैं। यह समर्पण ही सच्ची भक्ति की पराकाष्ठा है।

भजन की मुख्य विशेषताएं एवं महत्व | Highlights & Spiritual Significance

  • पारिवारिक और आत्मीय संबंध: यह भजन दादी और भक्त के बीच गुरु-शिष्य या राजा-प्रजा का नहीं, बल्कि माता और संतान का वात्सल्य संबंध स्थापित करता है।
  • राजस्थानी लोक संस्कृति की मिठास: मारवाड़ी और राजस्थानी शब्दावली ('मावड़ी', 'पीर', 'केड', 'हिवड़ो') इस भजन को अत्यंत सजीव और हृदयग्राही बनाती है।
  • मानसिक शांति और संबल: जीवन की भागदौड़ और मानसिक तनाव के बीच यह भजन साधक को आंतरिक स्थिरता और सुरक्षा का अनुभव कराता है।
  • संतुलित जीवन का संदेश: संसार के कर्तव्यों का निर्वाह करते हुए भी भगवद चरणों में प्रीति बनाए रखने की प्रेरणा देता है।

भजन गायन व श्रवण का समय एवं विधि | When & How to Sing

इस पावन भजन को गाने या सुनने के लिए किसी विशेष नियम की आवश्यकता नहीं होती, किंतु सच्ची श्रद्धा और पवित्र भाव इसका मूल आधार है।

  • नियमित पूजा के समय: प्रातःकालीन मंगला आरती या संध्या के समय दीपक प्रज्वलित करने के पश्चात इसे गाया जा सकता है।
  • दादी के सत्संग और जागरण में: झुंझुनूं वाली दादी रानी सती के महिला मंडलों, च चौक और मंगला पाठ के दौरान यह भजन समां बांध देता है।
  • भोजन या विश्राम के पश्चात मानसिक स्मरण: जब भी मन विचलित हो, इस भजन की पंक्तियों का मन ही मन स्मरण करने से अद्भुत मानसिक शांति मिलती है।

भजन से जुड़े देवी-देवता एवं संत | Associated Deity / Saint

यह भजन शक्तिस्वरूपा, त्याग और वीरता की प्रतीक श्री रानी सती दादी जी (नारायणी बाई) को समर्पित है। राजस्थान के झुंझुनूं में स्थित उनका पावन धाम देश-विदेश के श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। रानी सती दादी जी अपने भक्तों के संकटों को हरने वाली तथा उन्हें अपने आंचल की छाया में सुरक्षित रखने वाली जगत जननी के रूप में पूजी जाती हैं। उनके संग श्री हरि विष्णु और शक्ति के विभिन्न रूपों की आराधना का भी सनातन संस्कृति में विशेष स्थान है।

भजन की भाषा एवं काव्य शैली | Language & Literary Style

यह भजन राजस्थानी और ठेठ मारवाड़ी लोकभाषा की मिठास से ओत-प्रोत है। इसमें रूपक अलंकार और सहज लोक-प्रतीकों (जैसे मायके और ससुराल का metaphors) का बहुत सुंदर प्रयोग किया गया है। शब्दों की सादगी ऐसी है कि बिना किसी कठिन व्याकरण के भी श्रोता के सीधे हृदय को स्पर्श कर लेती है। लोक संगीत की धुनों पर हारमोनियम और ढोलक की थाप के साथ जब यह भजन गाया जाता है, तो पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है।

भजन में व्यक्त आध्यात्मिक संदेश एवं जीवन सीख | Spiritual Message & Life Lessons

  • अटूट विश्वास: ईश्वर या इष्ट पर अटूट भरोसा ही जीवन के सबसे बड़े संकटों को पार कराता है।
  • कृतज्ञता का भाव (Gratitude): भगवान और गुरु ने जो परिवार, सुख और जीवन दिया है, उसके प्रति हमेशा कृतज्ञ रहना चाहिए।
  • समर्पण की भावना: अहम् का त्याग कर अपने आराध्य के चरणों में समर्पित हो जाना ही सच्ची भक्ति है।

भजन के प्रमुख शब्दों का अर्थ | Important Word Meanings

शब्द / पद सरल हिंदी अर्थ संदर्भ / भाव
मावड़ी माता / अम्मा रानी सती दादी जी के लिए प्रेमसूचक संबोधन
केड दरबार / शरण / गोद दादी के सान्निध्य का स्थान
पीर मायका भक्त का अपने इष्ट के पास मिलने वाला सुरक्षित स्थान
हिवड़ो हृदय / मन भावनाओं का केंद्र
मनुहार आदर-सत्कार / मनुहार करना दादी के प्रति अनन्य अनुराग

एक नजर में भजन की जानकारी | Bhajan Quick Information

भजन का नाम थारो म्हारो मावड़ी घणी पुराणी प्रीत
समर्पित इष्ट श्री रानी सती दादी जी (झुंझुनूं वाली)
भाषा राजस्थानी / मारवाड़ी मिश्रित हिंदी
भक्ति भाव वात्सल्य, प्रेम, समर्पण एवं आत्मीयता
मुख्य अवसर दादी मंगला पाठ, सत्संग, जागरण और वार्षिक महोत्सव

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

यह भजन शक्तिस्वरूपा श्री रानी सती दादी जी (झुंझुनूं वाली) को समर्पित है।

'मावड़ी' का अर्थ माता (रानी सती दादी) है और 'पीर' का अर्थ मायका है, जो सुरक्षा और प्रेम का प्रतीक है।

इसे रानी सती दादी के मंगला पाठ, चौक, जागरण, महिला संगीत और सत्संग के दौरान मुख्य रूप से गाया जाता है।

रानी सती दादी का मुख्य और भव्य मंदिर राजस्थान के झुंझुनूं जिले में स्थित है।

इस भजन को गाने से भक्तों को दादी की असीम ममता, मानसिक शांति और जीवन की चिंताओं से मुक्ति का अनुभव होता है।

संपादकीय समीक्षा एवं संदर्भ

यह सामग्री पारंपरिक लोक भजनों, क्षेत्रीय संकीर्तन परंपराओं और श्री रानी सती दादी जी के भक्तों द्वारा गाए जाने वाले लोकप्रिय संस्करणों पर आधारित है। इसे पाठकों की सुविधा और भक्ति भाव को ध्यान में रखते हुए संपादकीय रूप से तैयार सामग्री के रूप में प्रस्तुत किया गया है।

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संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 19 Oct 2026

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