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सम्पूर्ण हनुमान गाथा (Hanuman Gatha Lyrics in Hindi) - Shani Katha Hanuman Gatha

पवनपुत्र हनुमान जी के जन्म और पराक्रम की पावन गाथा। Hanuman Gatha Lyrics हिन्दी में अर्थ सहित पढ़ें और संकटों से मुक्ति के लिए स्मरण करें।

प्रस्तावना एवं परिचय

मूल पाठ एवं पवित्र संकीर्तन

शुद्ध उच्चारण और भक्ति भाव के साथ स्मरण करें
वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें।

 सम्पूर्ण हनुमान गाथा (Hanuman Gatha Lyrics in Hindi) -

हम आज पवनसुत हनुमान की कथा सुनाते हैं

पावन कथा सुनाते हैं

वीरों के वीर उस महावीर की गाथा गाते हैं

हम कथा सुनाते हैं

जो रोम-रोम में सिया राम की छवि बासाते हैं

पावन कथा सुनाते हैं

वीरों के वीर उस महावीर की गाथा गाते हैं

हम कथा सुनाते हैं

हे ग्यानी गुण के निधान

जय महावीर हनुमान

हे ग्यानी गुण के निधान

जय महावीर हनुमान

पुंजिकस्थला नाम था जिसका स्वर्ग की थी सुंदरी

वानर राज को जर के जन्मी नाम हुआ अंजनी

कपि राज केसरी ने उससे ब्याह रचाया था

गिरी नामक संगपर क्या आनंद मंगल छाया था

राजा केसरी को अंजना का रूप लुभाया था

देख देख अंजनी को उनका मान हार्षया था

वैसे तो उनके जीवन में थी सब खुशहाली

परन्तु गोद अंजनी माता की संतान से थी खाली

अब सुनो हनुमंत कैसे पवन के पुत्र कहते हैं

पावन कथा सुनाते हैं

बजरंगबली उस महाबली की गाथा गाते है

हम कथा सुनाते हैं

हे ग्यानी गुण के निधान

जय महावीर हनुमान

हे ग्यानी गुण के निधान

जय महावीर हनुमान

पुत्र प्राप्ति कारण आंजना तप कीन्हा भारी

मतंग मुनि प्रसन्न हुए अंजना के हितकारी

बोले मुनि वक्टा चली जाओ हे देवी अंजना

वक्तेश्वर भगवान को जप और तप से प्रशन्न करना

अंजना ने आकाश गंग का पावन जल पिया

घोर तपस्या करके वायु देव को प्रसन्न किया

अंजनी मां को स्पर्श किया वायु का एक झोंका

पवन देव हो प्रकट उन्हें फिर पुत्र प्रदान किया

इस कारण बजरंग पवन के पुत्र कहाते हैं

बजरंगबली उस महाबली की गाथा गाते है

हम कथा सुनाते हैं

हे ग्यानी गुण के निधान

जय महावीर हनुमान

हे ग्यानी गुण के निधान

जय महावीर हनुमान

राजा केसरी और अंजना करते नित शिव पूजा

शिव भक्ति के बिना नहीं था काम उन्हें दूजा

हो प्रशन शिव प्रकट हुए तब अंजना वर मांगी

हे शिव शंकर पुत्र मेरा हो आपके जैसा ही

शिवजी बोले अंजना होगी पूर्ण तेरी इच्छा

मेरे अंश का 11वा रुद्र ही पुत्र तेरा होगा

जन्म लिया बजरंगी घट गए संकट के बादल

चैत्र शुक्ल की 15 की और दिन था शुभ मंगल

बजरंगी तब से शंकर के अवतार कहाते हैं

पावन कथा सुनाते हैं

बजरंगबली उस महाबली की गाथा गाते है

हम कथा सुनाते हैं

हे ग्यानी गुण के निधान

जय महावीर हनुमान

हे ग्यानी गुण के निधान

जय महावीर हनुमान

केसरी नंदन का है भक्तो प्यारा था बचपन

झूल रहे थे चंदन के पालने में सुख रंजन

कामकाज में लगी हुई थी तब अंजना रानी

सूरज को फल समझ उन्होंने खाने की ठाणी

उड़ने की शक्ति पवन देव ने उनको दे ही दी थी

उड़ने लगे सूरज का फल खाने वाले बजरंगी

वायु देव को चिंता हुई मेरा बच्चा जल ना जाए

सूर्य देव की किरणों से मेरा फूल झुलस ना जाए

बर्फ के जैसी वायु देव यूं हवा चलाते हैं

बजरंगबली उस महाबली की गाथा गाते है

हम कथा सुनाते हैं

हे ग्यानी गुण के निधान

जय महावीर हनुमान

हे ग्यानी गुण के निधान

जय महावीर हनुमान

सूर्य देव ने उनको आते देखा अपनी ओर

समझ गए वो पवन पुत्र है नहीं बालक कोई और

शीतल कर ली सूर्य देव ने अपनी गरम किरणें

पवन पुत्र गुरु रथ पर चढ़कर सूर्य लगे डसने

अमावस्या को राहु सूर्य डसने को जब आया

बजरंगी का खेल देखके बड़ा ही घबराया

इंद्रदेव को आकर सारा हाल था बतलाया

बोला एक बालक से मैं तो प्राण छुड़ा लाया

इंद्रदेव को साथ में लेकर राहु आते हैं

पावन कथा सुनाते है

बजरंगबली उस महाबली की गाथा गाते है

हम कथा सुनाते हैं

हे ग्यानी गुण के निधान

जय महावीर हनुमान

हे ग्यानी गुण के निधान

जय महावीर हनुमान

साथ साथ इंद्र को लेकर वापस राहु जब आया

बालाजी की मार से खुद को बचा नहीं पाया

मार मार कर राहु को जब कर डाला बेहाल

दौड़े ऐरावत को खाने माँ अंजनी के लाल

ऐरावत की रक्षा करने इंद्र बने फिर ढाल

बालाजी की शक्ति की जब देखे इंद्र कमाल

समझ खिलौना बाला ऐरावत को पकड़ लिए

इंद्र देवता को भी अपनी भुजा में जकड लिए

इंद्र देव क्या करते है आगे बतलाते है

बजरंगबली उस महाबली की गाथा गाते है

हम कथा सुनाते हैं

हे ग्यानी गुण के निधान

जय महावीर हनुमान

हे ग्यानी गुण के निधान

जय महावीर हनुमान

वार किया जब वज्र से इंद्र ने उनकी ठोड़ी पर

मूर्छित होकर पवन पुत्र गिर गए गिरी कंदरा पर

इंद्र देवता क्रोधित होकर गति रोक ली अपनी

तीनो लोक के प्राणी करने करने त्राहि त्राहि

सारे देवताओ को ना सूझी जब कोई भी आस

ब्रह्मा जी को लेकर पहुंचे पवन देव के पास

ब्रह्मा जी ने हाथ जब उनके अंगो पर फेरा

क्षण दूर हुई बाला बजरंगी की मूर्छा

वरदान उन्हें दे देके सारे देव मनाते है

पावन कथा सुनाते है

बजरंगबली उस महाबली की गाथा गाते है

हम कथा सुनाते हैं

हे ग्यानी गुण के निधान

जय महावीर हनुमान

हे ग्यानी गुण के निधान

जय महावीर हनुमान

ब्रह्म देव ने बजरंगी को यह वरदान दिया

ब्रह्म कभी नहीं लगेगा इसको ऐलान किया

बोले इंद्र तेरा शरीर होगा वज्र के जैसा कठोर

सूर्य देवता बोले देख के सेह से उनकी ओर

मेरे तेज से होगा बाला तू तो शतावधान

वरुण ने अपने पाश और जल से बचने का दिया वरदान

कहने लगे यमराज तू मेरे दंड से रहेगा दूर

और बोहोत से देवो ने वरदान दिए भरपूर

इस कारण बजरंग सब देवो के देव कहाते है

बजरंगबली उस महाबली की गाथा गाते है

हम कथा सुनाते हैं

हे ग्यानी गुण के निधान

जय महावीर हनुमान

हे ग्यानी गुण के निधान

जय महावीर हनुमान

ब्रह्म देवता बोले होगा तू ऐसा ज्ञानी

झुक जाएंगे तेरे आगे बड़े बड़े अभिमानी

तुझे युद्ध में कोई पराजित कर नहीं पायेगा

तू जैसा चाहेगा वैसा रूप बनाएगा

संकटहारी तू सबका ही होगा हितकारी

कहने लगे फिर इंद्र देव हे बजरंग बलधारी

तेरी हनु टूटी जो बालक लागा वज्र मेरा

इस कारण हनुमान रखा मैं आज से नाम तेरा

हनु टूटने के कारण हनुमान कहाते है

पावन कथा सुनाते है

बजरंगबली उस महाबली की गाथा गाते है

हम कथा सुनाते हैं

हे ग्यानी गुण के निधान

जय महावीर हनुमान

हे ग्यानी गुण के निधान

जय महावीर हनुमान

नटखट चंचल ऐसे थे बालापन में हनुमान

बजरंगी की चंचलता से ऋषि मुनि थे हैरान

ऋषियों ने सोचा बालक में नहीं अच्छा अभिमान

श्राप दिया इस कारण इसका हो जाये कल्याण

होकर बड़ा करना है इसे राम प्रभु का कार

ऋषिवर बाबा बजरंग का यूं करते थे सत्कार

ठीक समय पर इसे जो शक्ति याद दिलाएगा

हम ऋषियों के श्राप से छुटकारा मिल जाएगा

ऋषि मुनि साधू संत इनकी जयकार लगाते है

बजरंगबली उस महाबली की गाथा गाते है

हम कथा सुनाते हैं

हे ग्यानी गुण के निधान

जय महावीर हनुमान

हे ग्यानी गुण के निधान

जय महावीर हनुमान

मातृ शिक्षा से राम चरित्र का पूरा ज्ञान मिला

बजरंगी को सब देवो से ही वरदान मिला

अंजनी माँ आदर्श चरित्र की कथा सुनाया करती

भक्त का और भगवान का अंतर उन्हें बताया करती

एक दिन अंजनी माता बोली जाओ मेरे लाला

सूर्य देव से शिक्षा लो ये है आदेश मेरा

माँ इच्छा को रख आँखों पर धरकर शक्तिमान

सूर्य देव से शिक्षा लेने जा पहुंचे हनुमान

सूर्यदेव से शिक्षा लेने बजरंगी जाते है

पावन कथा सुनाते है

बजरंगबली उस महाबली की गाथा गाते है

हम कथा सुनाते हैं

हे ग्यानी गुण के निधान

जय महावीर हनुमान

हे ग्यानी गुण के निधान

जय महावीर हनुमान

राम रूप में धरती पर विष्णु अवतार लिए

अवधपुरी में धूम मची जग पे उपकार किये

शिवशंकर बनके मदारी पहुंचे राजद्वार

साथ में एक वानर था जिसकी सुंदरता अपार

नाच देखने राम सहित आ पहुंचे चारो भाई

नाच नाच बजरंग ने अपने प्रभु को हंसी दिलाई

राम जी बोले हमसे चाहे कुछ भी लेलो मदारी

ये वानर देदो हमको ये है इच्छा हमारी

भक्त के संग भगवान ये कैसे खेल रचाते है

बजरंगबली उस महाबली की गाथा गाते है

हम कथा सुनाते हैं

हे ग्यानी गुण के निधान

जय महावीर हनुमान

हे ग्यानी गुण के निधान

जय महावीर हनुमान

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🙏 विस्तृत अर्थ और भावार्थ

संकटमोचन हनुमान जी का यह भजन "सम्पूर्ण हनुमान गाथा (Hanuman Gatha Lyrics in Hindi) - Shani Katha Hanuman Gatha - Bhaktilok" बल, बुद्धि, विद्या और भक्ति का संचार करने वाला है। कलयुग के जागृत देव श्री हनुमान जी की महिमा अपार है। इस भजन का मुख्य उद्देश्य साधक के भीतर के भय को दूर कर उसमें आत्मगौरव और निष्काम सेवा भाव जागृत करना है।

भजन की चौपाइयों और पंक्तियों में हनुमान जी की लंका दहन, संजीवनी बूटी लाना और प्रभु श्री राम के प्रति अनन्य प्रेम का वर्णन होता है। हनुमान जी की शरण में जाने पर बड़े से बड़ा संकट भी क्षण भर में समाप्त हो जाता है, यही इस भजन की मूल भावना है।

🔍 विशेष महत्त्व और लाभ

हनुमान चालीसा और सुंदरकांड की भांति ही हनुमान भजनों का विशेष धार्मिक महत्त्व है। हनुमान जी को अष्ट सिद्धि और नौ निधियों के दाता के रूप में पूजा जाता है। इस पावन भजन के गायन से भूत-पिशाच, नकारात्मक ऊर्जा और सभी प्रकार के ऊपरी बाधाओं से मुक्ति मिलती है।

वीर हनुमान जी के बल, बुद्धि और भक्ति के स्रोतों को जानने तथा संकटों के निवारण हेतु हनुमान चालीसा संग्रह को नियमित रूप से पढ़ें। हनुमान भजन से आत्मविश्वास में अभूतपूर्व वृद्धि होती है, मानसिक रोग जैसे तनाव, अनिद्रा और डिप्रेशन दूर होते हैं। यह छात्रों की बुद्धि और परीक्षा में सफलता के लिए भी रामबाण है।

🕒 साधना एवं गायन विधि

हनुमान जी की पूजा के लिए मंगलवार और शनिवार का दिन विशेष रूप से निर्धारित है। लाल आसन पर बैठकर, हनुमान जी के सम्मुख चमेली के तेल का दीपक जलाएं और पूरे मनोयोग से इस भजन का संकीर्तन करें।

❓ अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQ)

हनुमान जी को किस दिन चमेली का तेल चढ़ाना चाहिए?

शनिवार और मंगलवार के दिन हनुमान जी को सिंदूर में चमेली का तेल मिलाकर चढ़ाना अत्यंत शुभ और संकट निवारक माना गया है।

क्या हनुमान भजन परीक्षा के भय को दूर करने में सहायक है?

हाँ, हनुमान जी के भजनों और मंत्रों के संकीर्तन से मन एकाग्र होता है, भय का नाश होता है और याददाश्त बढ़ती है।

शनि दोषों की शांति के लिए हनुमान उपासना क्यों की जाती है?

हनुमान जी ने शनिदेव को रावण के बंधन से मुक्त कराया था, जिसके कारण शनिदेव ने वचन दिया था कि जो हनुमान जी की भक्ति करेगा, उसे शनि जनित पीड़ा नहीं भोगनी पड़ेगी।

संपादकीय रूप से तैयार एवं समीक्षित धार्मिक सामग्री

यह सामग्री भक्तिलोक संपादकीय टीम द्वारा उपलब्ध धार्मिक स्रोतों, प्रकाशित संदर्भों और परंपरागत पाठों की तुलना के आधार पर तैयार एवं समीक्षा की गई है। जहाँ पाठ के विभिन्न संस्करण उपलब्ध हैं, वहाँ संबंधित संस्करण या स्रोत का उल्लेख किया जाता है।

संदर्भ-आधारित समीक्षा अंतिम अद्यतन: 13 Oct 2026

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