संक्षेप रामायण – श्लोक 88

संस्कृत श्लोक

यः शृणोति सदा भक्त्या रामायणमनुत्तमम् । स सर्वपापनिर्मुक्तो रामलोके महीयते ॥

हिंदी अनुवाद

जो सदा भक्तिपूर्वक इस अनुपम रामायण को सुनता है, वह सब पापों से मुक्त होकर रामलोक में पूजित होता है।

अर्थ / व्याख्या

भक्तिपूर्वक रामायण सुनने से पापमुक्ति और रामलोक की प्राप्ति।

टिप्पणी

यह श्लोक रामायण श्रवण के फल का पुनः स्मरण कराता है।

॥ श्लोक ८८ – भक्तिपूर्वक रामायण श्रवण से पापमुक्ति और रामलोक ॥

यः शृणोति सदा भक्त्या रामायणमनुत्तमम् । स सर्वपापनिर्मुक्तो रामलोके महीयते ॥
yaḥ śṛṇoti sadā bhaktyā rāmāyaṇamanuttamam | sa sarvapāpanirmukto rāmaloke mahīyate ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : जो सदा भक्तिपूर्वक इस अनुपम रामायण को सुनता है, वह सब पापों से मुक्त होकर रामलोक में पूजित होता है।

🔹 English Translation : He who always listens with devotion to this unsurpassed Ramayana, being freed from all sins, is honored in the realm of Rama.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
यःसर्वनाम, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनजो
शृणोतिलट्लकार, प्रथमपुरुष एकवचन (श्रु धातु)सुनता है
सदाअव्ययसदा
भक्त्यास्त्रीलिंग, तृतीया एकवचनभक्ति से
रामायणम्नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनरामायण को
अनुत्तमम्विशेषण, नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनअनुपम
सःसर्वनाम, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनवह
सर्वपापनिर्मुक्तःविशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनसब पापों से मुक्त
रामलोकेपुल्लिंग, सप्तमी एकवचनरामलोक में
महीयतेलट्लकार कर्मणि, प्रथमपुरुष एकवचन (मह् धातु)पूजित होता है

📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व

यह श्लोक रामायण श्रवण के लिए "सदा भक्त्या" पर बल देता है – निरन्तर और भक्तिपूर्वक। केवल एक बार सुन लेना पर्याप्त नहीं, निरन्तर श्रवण चाहिए। और वह भी भक्ति के साथ, अर्थात् प्रेम और श्रद्धा के साथ। ऐसे व्यक्ति के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं और वह रामलोक में पूजित होता है।

रामलोक में पूजित होने का अर्थ है कि वहाँ उसका सम्मान होता है, वह राम के समीप रहता है। यह मुक्ति का एक रूप है। यह श्लोक रामायण की फलश्रुति का सार है।

आध्यात्मिक दृष्टि से, निरन्तर रामकथा सुनने से चित्त निर्मल होता है, और अन्त में राम में लीन हो जाता है।

॥ रामायणं शृणोतीह सर्वपापैः प्रमुच्यते ॥

जय श्री राम 🙏