संक्षेप रामायण – श्लोक 87
संस्कृत श्लोक
सर्वदानफलं यस्मात् प्राप्नोति शृण्वतां नरः । रामायणकथां पुण्यां तस्माच्छृणुयादादरात् ॥
हिंदी अनुवाद
जिससे सुनने वाला मनुष्य सभी दानों का फल प्राप्त कर लेता है, उस पुण्यमय रामायण कथा को इसलिए आदरपूर्वक सुनना चाहिए।
अर्थ / व्याख्या
रामायण श्रवण से सभी दानों का फल मिलता है।
टिप्पणी
यह श्लोक रामायण श्रवण को दान के समान फलदायी बताता है।
॥ श्लोक ८७ – रामायण श्रवण से दानफल की प्राप्ति ॥
🔹 हिन्दी अनुवाद : जिससे सुनने वाला मनुष्य सभी दानों का फल प्राप्त कर लेता है, उस पुण्यमय रामायण कथा को इसलिए आदरपूर्वक सुनना चाहिए।
🔹 English Translation : Since a person listening to the sacred Ramayana obtains the fruit of all charities, therefore one should listen to it with reverence.
🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)
| संस्कृत | व्याकरण | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|
| सर्वदानफलम् | नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचन | सभी दानों का फल |
| यस्मात् | सर्वनाम, पुल्लिंग, पञ्चमी एकवचन | जिससे |
| प्राप्नोति | लट्लकार, प्रथमपुरुष एकवचन (प्र + आप्) | प्राप्त करता है |
| शृण्वताम् | शतृप्रत्यय, पुल्लिंग, षष्ठी एकवचन | सुनने वाला |
| नरः | पुल्लिंग, प्रथमा एकवचन | मनुष्य |
| रामायणकथाम् | स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचन | रामायण की कथा |
| पुण्याम् | विशेषण, स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचन | पुण्यमय |
| तस्मात् | अव्यय | इसलिए |
| शृणुयात् | विधिलिङ्, प्रथमपुरुष एकवचन (श्रु धातु) | सुनना चाहिए |
| आदरात् | पुल्लिंग, पञ्चमी एकवचन | आदर से |
📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व
दान का भारतीय संस्कृति में बहुत महत्व है। अन्नदान, विद्यादान, गोदान, भूदान, कन्यादान आदि अनेक प्रकार के दान बताए गए हैं। इन सबके अलग-अलग फल हैं। यह श्लोक कहता है कि रामायण को सुनने मात्र से सभी प्रकार के दानों का फल प्राप्त हो जाता है। अर्थात् रामायण का श्रवण दान के समान ही पुण्यदायी है, बल्कि उससे भी अधिक, क्योंकि यह एक साथ सभी दानों का फल देता है।
यह उन लोगों के लिए बड़ी कृपा है जो शारीरिक रूप से दान करने में असमर्थ हैं। वे केवल रामायण सुनकर ही दान का फल प्राप्त कर सकते हैं।
आध्यात्मिक दृष्टि से, रामायण सुनने से मन में उदारता और दानशीलता के भाव आते हैं, जो वास्तविक दान का मूल है।
॥ रामायणश्रवणाद् दानफलं समवाप्नुयात् ॥
जय श्री राम 🙏