संक्षेप रामायण – श्लोक 81

संस्कृत श्लोक

यः पठेदेकमप्यत्र श्लोकं रामायणस्य तु । स याति रामसालोक्यं रामचन्द्रप्रसादतः ॥

हिंदी अनुवाद

जो इस रामायण के एकमात्र श्लोक को भी पढ़ता है, वह रामचन्द्र की कृपा से राम के सालोक्य (समान लोक) को प्राप्त होता है।

अर्थ / व्याख्या

रामायण का एक श्लोक भी पढ़ने से रामसालोक्य की प्राप्ति होती है।

टिप्पणी

यह श्लोक रामायण के एक श्लोक के पाठ के फल का वर्णन करता है।

॥ श्लोक ८१ – रामायण के एक श्लोक की महिमा ॥

यः पठेदेकमप्यत्र श्लोकं रामायणस्य तु । स याति रामसालोक्यं रामचन्द्रप्रसादतः ॥
yaḥ paṭhed ekam apy atra ślokaṃ rāmāyaṇasya tu | sa yāti rāmasālokyaṃ rāmacandra prasādataḥ ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : जो इस रामायण के एकमात्र श्लोक को भी पढ़ता है, वह रामचन्द्र की कृपा से राम के सालोक्य (समान लोक) को प्राप्त होता है।

🔹 English Translation : He who reads even a single verse of this Ramayana, attains the world of Rama (Salokya) by the grace of Rama Chandra.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
यःसर्वनाम, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनजो
पठेत्विधिलिङ्, प्रथमपुरुष एकवचन (पठ् धातु)पढ़े
एकम्विशेषण, पुल्लिंग, द्वितीया एकवचनएक
अपिअव्ययभी
अत्रअव्ययइस (रामायण) में
श्लोकम्पुल्लिंग, द्वितीया एकवचनश्लोक को
रामायणस्यनपुंसकलिंग, षष्ठी एकवचनरामायण का
तुअव्ययतो
सःसर्वनाम, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनवह
यातिलट्लकार, प्रथमपुरुष एकवचन (या धातु)जाता है
रामसालोक्यम्नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनराम के सालोक्य (समान लोक) को
रामचन्द्रप्रसादतःपुल्लिंग, पञ्चमी एकवचनरामचन्द्र की कृपा से

📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व

यह श्लोक रामायण के एक श्लोक के पाठ को भी अत्यन्त फलदायी बताता है। "सालोक्य" चार प्रकार की मुक्तियों में से एक है – सालोक्य, सामीप्य, सारूप्य, सायुज्य। सालोक्य का अर्थ है भगवान् के समान लोक में निवास करना, अर्थात् उनके धाम में रहना। यहाँ रामसालोक्य का अर्थ है राम के धाम (साकेत या वैकुण्ठ) की प्राप्ति। यह फल केवल एक श्लोक पढ़ने से मिलता है – यह रामायण की अत्यधिक महिमा को दर्शाता है।

यहाँ "रामचन्द्रप्रसादतः" विशेष रूप से उल्लेखनीय है। मुक्ति भी राम की कृपा से ही मिलती है, न कि केवल पाठ के यांत्रिक फल से। रामायण का पाठ राम को प्रसन्न करता है, और वे अपनी कृपा से भक्त को अपने धाम में स्थान देते हैं।

आध्यात्मिक दृष्टि से, यह श्लोक उन लोगों के लिए अत्यन्त प्रोत्साहन है जो पूरी रामायण पढ़ने में असमर्थ हैं। वे कम से कम एक श्लोक तो पढ़ सकते हैं, और उससे भी उन्हें महान् फल की प्राप्ति होगी।

📖 पाठ की विधि एवं लाभ

इस श्लोक का पाठ करने से रामभक्ति बढ़ती है और राम की कृपा का अनुभव होता है।

॥ एकः श्लोको रामायणात् सालोक्यं ददाति राघवे ॥

जय श्री राम 🙏