संक्षेप रामायण – श्लोक 82

संस्कृत श्लोक

धर्मार्थकाममोक्षाणां रामायणमिति स्मृतम् । यः पठेत् प्रयतो नित्यं स सर्वं लभते नरः ॥

हिंदी अनुवाद

धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति के लिए रामायण स्मरण किया जाता है। जो नित्य संयमपूर्वक पढ़ता है, वह मनुष्य सब कुछ प्राप्त कर लेता है।

अर्थ / व्याख्या

रामायण चारों पुरुषार्थ (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष) प्रदान करता है।

टिप्पणी

यह श्लोक रामायण को चारों पुरुषार्थों का दाता बताता है।

॥ श्लोक ८२ – रामायण चारों पुरुषार्थों का दाता ॥

धर्मार्थकाममोक्षाणां रामायणमिति स्मृतम् । यः पठेत् प्रयतो नित्यं स सर्वं लभते नरः ॥
dharmārthakāmamokṣāṇāṃ rāmāyaṇamiti smṛtam | yaḥ paṭhet prayato nityaṃ sa sarvaṃ labhate naraḥ ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति के लिए रामायण स्मरण किया जाता है। जो नित्य संयमपूर्वक पढ़ता है, वह मनुष्य सब कुछ प्राप्त कर लेता है।

🔹 English Translation : The Ramayana is renowned for (granting) Dharma, Artha, Kama and Moksha. The man who reads it daily with self-control obtains everything.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
धर्मार्थकाममोक्षाणाम्पुल्लिंग, षष्ठी बहुवचनधर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की (प्राप्ति के लिए)
रामायणम्नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचनरामायण
इतिअव्ययइस प्रकार
स्मृतम्भूतकृदन्त, नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचनस्मरण किया जाता है
यःसर्वनाम, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनजो
पठेत्विधिलिङ्, प्रथमपुरुष एकवचन (पठ् धातु)पढ़े
प्रयतःविशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनसंयमी
नित्यम्अव्ययनित्य
सःसर्वनाम, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनवह
सर्वम्सर्वनाम, नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनसब कुछ
लभतेलट्लकार, प्रथमपुरुष एकवचन (लभ् धातु)प्राप्त करता है
नरःपुल्लिंग, प्रथमा एकवचनमनुष्य

📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व

भारतीय दर्शन में मनुष्य जीवन के चार लक्ष्य माने गए हैं – धर्म (सदाचार और पुण्य), अर्थ (धन और सांसारिक समृद्धि), काम (इच्छाओं की पूर्ति) और मोक्ष (जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति)। यह श्लोक कहता है कि रामायण इन चारों की प्राप्ति का साधन है। अर्थात् रामायण के पाठ से मनुष्य को धर्म का ज्ञान होता है, अर्थ की प्राप्ति होती है, कामनाएँ पूरी होती हैं, और अन्त में मोक्ष मिलता है।

रामायण में धर्म का आदर्श चित्रण है – राम स्वयं धर्म के अवतार हैं। अर्थ की प्राप्ति का उपाय भी इसमें बताया गया है – राजा दशरथ का राज्यवैभव, सुग्रीव का राज्याभिषेक आदि। काम की पूर्ति – राम-सीता के मिलन, भरत-राम के मिलन आदि में दिखती है। और मोक्ष – अन्त में राम का स्वर्गारोहण, सीता का धरती में समाना, सभी का मोक्ष की ओर संकेत है।

आध्यात्मिक दृष्टि से, रामायण का नियमित पाठ मनुष्य को जीवन के सभी स्तरों पर पूर्णता प्रदान करता है।

॥ रामायणं चतुर्वर्गफलप्रदं नृणाम् ॥

जय श्री राम 🙏