संक्षेप रामायण – श्लोक 83
संस्कृत श्लोक
मनःशुद्धिकरं पुण्यं पापघ्नं सुखदं शुभम् । रामायणमिदं दिव्यं सर्वरोगापहं नृणाम् ॥
हिंदी अनुवाद
यह दिव्य रामायण मन की शुद्धि करने वाला, पुण्यमय, पापनाशक, सुखदायक, शुभ और मनुष्यों के सभी रोगों का नाश करने वाला है।
अर्थ / व्याख्या
रामायण के गुण – मन:शुद्धि, पापनाश, सुख, शुभता और रोगनाश।
टिप्पणी
यह श्लोक रामायण के विभिन्न गुणों का वर्णन करता है।
॥ श्लोक ८३ – रामायण के गुण – मन:शुद्धि, पापनाश, रोगनाश ॥
🔹 हिन्दी अनुवाद : यह दिव्य रामायण मन की शुद्धि करने वाला, पुण्यमय, पापनाशक, सुखदायक, शुभ और मनुष्यों के सभी रोगों का नाश करने वाला है।
🔹 English Translation : This divine Ramayana purifies the mind, is sacred, destroys sins, bestows happiness, is auspicious, and removes all diseases of men.
🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)
| संस्कृत | व्याकरण | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|
| मनःशुद्धिकरम् | विशेषण, नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचन | मन की शुद्धि करने वाला |
| पुण्यम् | विशेषण, नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचन | पुण्यमय |
| पापघ्नम् | विशेषण, नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचन | पापनाशक |
| सुखदम् | विशेषण, नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचन | सुखदायक |
| शुभम् | विशेषण, नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचन | शुभ |
| रामायणम् | नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचन | रामायण |
| इदम् | सर्वनाम, नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचन | यह |
| दिव्यम् | विशेषण, नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचन | दिव्य |
| सर्वरोगापहम् | विशेषण, नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचन | सभी रोगों का नाश करने वाला |
| नृणाम् | पुल्लिंग, षष्ठी बहुवचन | मनुष्यों का |
📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व
इस श्लोक में रामायण के छह गुण बताए गए हैं: मनःशुद्धिकर (मन को शुद्ध करने वाला), पुण्य (पुण्यमय), पापघ्न (पापों का नाश करने वाला), सुखद (सुख देने वाला), शुभ (मंगलकारी), और सर्वरोगापह (सभी रोगों को दूर करने वाला)। यह रामायण की सर्वांगीण उपयोगिता को दर्शाता है।
मनःशुद्धि – रामायण सुनने से मन से विकार दूर होते हैं और सात्विक भाव आते हैं। पापघ्न – राम के नाम का स्मरण पापों को नष्ट करता है। सुखद – रामकथा सुनने से मानसिक सुख मिलता है। शुभ – यह कथा मंगलमयी है। सर्वरोगापह – इसके पाठ से शारीरिक और मानसिक रोग दूर होते हैं। यह एक प्रकार का आश्वासन है कि रामायण का पाठ समग्र कल्याणकारी है।
आयुर्वेद में भी माना गया है कि मन की शुद्धि से शारीरिक रोग दूर होते हैं। रामायण का पाठ मन को शुद्ध करता है, जिससे रोगों का नाश होता है।
॥ रामायणं पठन् नित्यं सर्वरोगैः प्रमुच्यते ॥
जय श्री राम 🙏