संक्षेप रामायण – श्लोक 84
संस्कृत श्लोक
कल्पवृक्षसमं पुण्यं रामायणमनुत्तमम् । सर्वकामप्रदं नृणां सर्वपापहरं शुभम् ॥
हिंदी अनुवाद
कल्पवृक्ष के समान पुण्यमय, अनुपम रामायण मनुष्यों के लिए सभी कामनाओं को देने वाला, सभी पापों को हरने वाला और शुभ है।
अर्थ / व्याख्या
रामायण की तुलना कल्पवृक्ष से – सर्वकामनाप्रद और पापहर।
टिप्पणी
यह श्लोक रामायण की तुलना कल्पवृक्ष से करता है।
॥ श्लोक ८४ – रामायण कल्पवृक्ष के समान ॥
🔹 हिन्दी अनुवाद : कल्पवृक्ष के समान पुण्यमय, अनुपम रामायण मनुष्यों के लिए सभी कामनाओं को देने वाला, सभी पापों को हरने वाला और शुभ है।
🔹 English Translation : The Ramayana, equal to the wish-fulfilling tree, unsurpassed, grants all desires to men, removes all sins, and is auspicious.
🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)
| संस्कृत | व्याकरण | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|
| कल्पवृक्षसमम् | विशेषण, नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचन | कल्पवृक्ष के समान |
| पुण्यम् | विशेषण, नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचन | पुण्यमय |
| रामायणम् | नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचन | रामायण |
| अनुत्तमम् | विशेषण, नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचन | अनुपम |
| सर्वकामप्रदम् | विशेषण, नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचन | सभी कामनाओं को देने वाला |
| नृणाम् | पुल्लिंग, षष्ठी बहुवचन | मनुष्यों के लिए |
| सर्वपापहरम् | विशेषण, नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचन | सभी पापों को हरने वाला |
| शुभम् | विशेषण, नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचन | शुभ |
📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व
कल्पवृक्ष देवलोक का एक कल्पित वृक्ष है, जो माँगने पर वांछित फल देता है। रामायण की तुलना कल्पवृक्ष से की गई है, क्योंकि यह भी भक्तों की सभी मनोकामनाएँ पूरी करता है। साथ ही, यह सर्वपापहर है – सभी पापों को नष्ट करता है। "शुभम्" कहकर इसकी मंगलकारिता को रेखांकित किया गया है।
रामायण का यह गुण बताता है कि इसे केवल पढ़ने मात्र से ही नहीं, बल्कि इसके प्रति श्रद्धा रखने से भी मनुष्य की इच्छाएँ पूरी होती हैं। यह एक प्रकार की आस्था है कि राम की कथा में वह शक्ति है जो भक्त के जीवन को सफल बना सकती है।
आध्यात्मिक दृष्टि से, कल्पवृक्ष का अर्थ है वह साधन जो सभी इच्छाओं को पूरा करता है। रामायण भी वैसा ही है – इसमें धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष – सब कुछ निहित है।
॥ रामायणं कल्पतरोरधिकं हि फलप्रदम् ॥
जय श्री राम 🙏