संक्षेप रामायण – श्लोक 71
संस्कृत श्लोक
य इदं परमं पुण्यं रामायणमनुत्तमम् । श्रद्धया परया युक्तः शृणुयात् स विमुच्यते ॥
हिंदी अनुवाद
जो इस परम पुण्यमय, अनुपम रामायण को परम श्रद्धा से युक्त होकर सुनता है, वह (सब बंधनों से) मुक्त हो जाता है।
अर्थ / व्याख्या
रामायण को परम श्रद्धा से सुनने वाला सब पापों और बंधनों से मुक्त हो जाता है।
टिप्पणी
यह श्लोक रामायण श्रवण के मोक्षदायी फल का वर्णन करता है।
॥ श्लोक ७१ – श्रद्धापूर्वक रामायण श्रवण से मुक्ति ॥
🔹 हिन्दी अनुवाद : जो इस परम पुण्यमय, अनुपम रामायण को परम श्रद्धा से युक्त होकर सुनता है, वह (सब बंधनों से) मुक्त हो जाता है।
🔹 English Translation : He who listens to this supremely sacred, unsurpassed Ramayana with great faith, is liberated (from all bonds).
🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)
| संस्कृत | व्याकरण | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|
| यः | सर्वनाम, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचन | जो |
| इदम् | सर्वनाम, नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचन | इस |
| परमम् | विशेषण, नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचन | परम |
| पुण्यम् | विशेषण, नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचन | पुण्यमय |
| रामायणम् | नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचन | रामायण को |
| अनुत्तमम् | विशेषण, नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचन | अनुपम |
| श्रद्धया | स्त्रीलिंग, तृतीया एकवचन | श्रद्धा से |
| परया | विशेषण, स्त्रीलिंग, तृतीया एकवचन | परम |
| युक्तः | भूतकृदन्त, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचन | युक्त |
| शृणुयात् | विधिलिङ्, प्रथमपुरुष एकवचन (श्रु धातु) | सुने |
| सः | सर्वनाम, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचन | वह |
| विमुच्यते | लट्लकार कर्मणि, प्रथमपुरुष एकवचन (वि + मुच्) | मुक्त हो जाता है |
📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व
इस श्लोक में रामायण श्रवण के लिए सबसे महत्वपूर्ण शर्त "श्रद्धा" को बताया गया है। श्रद्धा के बिना किया गया कोई भी कर्म निष्फल होता है। रामायण को परम श्रद्धा से सुनने वाला व्यक्ति संसार के सभी बंधनों से मुक्त हो जाता है। "विमुच्यते" का अर्थ है मोक्ष की प्राप्ति। यह श्लोक रामायण के उच्चतम फल – मोक्ष – का वर्णन करता है।
भारतीय परंपरा में श्रद्धा को ज्ञान का मूल माना गया है। श्रद्धापूर्वक सुनने से ही तत्व का बोध होता है। रामायण में राम के चरित्र का वर्णन है, जो स्वयं साक्षात् धर्म हैं। उनकी कथा को श्रद्धा से सुनने से व्यक्ति के हृदय में धर्म का बोध होता है और वह कर्मबंधन से मुक्त हो जाता है।
आध्यात्मिक दृष्टि से, रामायण का श्रवण मन को एकाग्र करता है, चित्त को शुद्ध करता है, और अंततः आत्मसाक्षात्कार की ओर ले जाता है। यही मोक्ष है।
📖 पाठ की विधि एवं लाभ
इस श्लोक का पाठ करने से श्रद्धा बढ़ती है और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।
॥ श्रद्धया रामकथया मुच्यते भवबन्धनात् ॥
जय श्री राम 🙏