संक्षेप रामायण – श्लोक 70
संस्कृत श्लोक
रामायणकथां पुण्यां यः पठेत् प्रयतः शुचिः । सर्वान् कामानवाप्नोति प्रेत्य स्वर्गे महीयते ॥
हिंदी अनुवाद
जो शुद्ध और संयमी होकर इस पुण्यमय रामायण कथा को पढ़ता है, वह सभी कामनाओं को प्राप्त करता है और मरने के बाद स्वर्ग में पूजित होता है।
अर्थ / व्याख्या
रामायण पाठ से सभी कामनाओं की पूर्ति और स्वर्ग की प्राप्ति।
टिप्पणी
यह श्लोक रामायण पाठ के फल को सारांशित करता है।
॥ श्लोक ७० – रामायण पाठ का सम्पूर्ण फल ॥
🔹 हिन्दी अनुवाद : जो शुद्ध और संयमी होकर इस पुण्यमय रामायण कथा को पढ़ता है, वह सभी कामनाओं को प्राप्त करता है और मरने के बाद स्वर्ग में पूजित होता है।
🔹 English Translation : He who, being pure and self-controlled, reads this sacred Ramayana, obtains all desires and after death is honored in heaven.
🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)
| संस्कृत | व्याकरण | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|
| रामायणकथाम् | स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचन | रामायण की कथा |
| पुण्याम् | विशेषण, स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचन | पुण्यमय |
| यः | सर्वनाम, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचन | जो |
| पठेत् | विधिलिङ्, प्रथमपुरुष एकवचन (पठ् धातु) | पढ़े |
| प्रयतः | विशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचन | संयमी |
| शुचिः | विशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचन | शुद्ध |
| सर्वान् | सर्वनाम, पुल्लिंग, द्वितीया बहुवचन | सभी |
| कामान् | पुल्लिंग, द्वितीया बहुवचन | कामनाओं को |
| अवाप्नोति | लट्लकार, प्रथमपुरुष एकवचन (अव + आप्) | प्राप्त करता है |
| प्रेत्य | ल्यबन्त अव्यय (प्र + इण्) | मरने के बाद |
| स्वर्गे | पुल्लिंग, सप्तमी एकवचन | स्वर्ग में |
| महीयते | लट्लकार कर्मणि, प्रथमपुरुष एकवचन (मह् धातु) | पूजित होता है |
📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व
यह श्लोक संक्षेप रामायण के फलश्रुति भाग का सारांश है। इसमें रामायण पाठ के लिए दो शर्तें बताई गई हैं – प्रयतः (संयमी) और शुचिः (शुद्ध)। अर्थात् पाठ करने वाला व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से शुद्ध हो, और उसने इन्द्रियों पर संयम रखा हो। ऐसा व्यक्ति रामायण पढ़कर सभी इच्छाओं की पूर्ति कर लेता है, और मृत्यु के बाद स्वर्ग में उसका सम्मान होता है।
यह श्लोक रामायण पाठ की महिमा को चरम पर पहुँचाता है। यहाँ "सर्वान् कामान्" का अर्थ है – धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष – चारों पुरुषार्थ। रामायण का पाठ करने से ये सब प्राप्त होते हैं। स्वर्ग में पूजित होने का अर्थ है उच्च लोकों में गति, जो मोक्ष का मार्ग है।
इस प्रकार संक्षेप रामायण के अन्त में इसके पाठ के फल का वर्णन करके वाल्मीकि ने श्रोताओं को रामायण सुनने के लिए प्रेरित किया है।
॥ रामायणं पठन् प्राज्ञः सर्वान् कामानवाप्नुयात् ॥
जय श्री राम 🙏