संक्षेप रामायण – श्लोक 64
संस्कृत श्लोक
विघ्नानि नश्यन्ति समस्तदोषाः प्रसीदति ब्रह्मकुलं समग्रम् । यस्यां कथायां रघुनन्दनस्य तस्माच्छृणुध्वं रघुनाथचरितम् ॥
हिंदी अनुवाद
जिस कथा (रामायण) में रघुनन्दन (राम) का वर्णन है, उसके श्रवण से सभी विघ्न नष्ट होते हैं, सभी दोष मिटते हैं और सम्पूर्ण ब्रह्मकुल (ब्राह्मण समाज) प्रसन्न होता है। इसलिए तुम लोग रघुनाथ के चरित्र को सुनो।
अर्थ / व्याख्या
रामायण के श्रवण से विघ्न-दोष नष्ट होते हैं और ब्राह्मण प्रसन्न होते हैं।
टिप्पणी
यह श्लोक रामायण श्रवण के फल को बताता है।
॥ श्लोक ६४ – रामायण श्रवण से विघ्न-दोष नाश और ब्राह्मण प्रसन्नता ॥
🔹 हिन्दी अनुवाद : जिस कथा (रामायण) में रघुनन्दन (राम) का वर्णन है, उसके श्रवण से सभी विघ्न नष्ट होते हैं, सभी दोष मिटते हैं और सम्पूर्ण ब्रह्मकुल (ब्राह्मण समाज) प्रसन्न होता है। इसलिए तुम लोग रघुनाथ के चरित्र को सुनो।
🔹 English Translation : By hearing that narrative (Ramayana) in which the delight of the Raghus (Rama) is described, all obstacles perish, all faults are destroyed, and the entire community of brahmanas is pleased. Therefore, listen to the character of the lord of the Raghus.
🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)
| संस्कृत | व्याकरण | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|
| विघ्नानि | नपुंसकलिंग, प्रथमा बहुवचन | विघ्न |
| नश्यन्ति | लट्लकार, प्रथमपुरुष बहुवचन (नश् धातु) | नष्ट होते हैं |
| समस्तदोषाः | पुल्लिंग, प्रथमा बहुवचन | सभी दोष |
| प्रसीदति | लट्लकार, प्रथमपुरुष एकवचन (प्र + सद्) | प्रसन्न होता है |
| ब्रह्मकुलम् | नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचन | ब्राह्मण समाज |
| समग्रम् | विशेषण, नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचन | सम्पूर्ण |
| यस्याम् | सर्वनाम, स्त्रीलिंग, सप्तमी एकवचन | जिसमें |
| कथायाम् | स्त्रीलिंग, सप्तमी एकवचन | कथा में |
| रघुनन्दनस्य | पुल्लिंग, षष्ठी एकवचन | रघुनन्दन (राम) की |
| तस्मात् | अव्यय | इसलिए |
| शृणुध्वम् | लोट्लकार, मध्यमपुरुष बहुवचन (श्रु धातु) | सुनो |
| रघुनाथचरितम् | नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचन | रघुनाथ का चरित्र |
📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व
इस श्लोक में रामायण के श्रवण के फल को अत्यन्त विस्तार से बताया गया है। रामायण सुनने से जीवन के सभी विघ्न-बाधाएँ समाप्त हो जाती हैं, मन के सभी दोष (काम, क्रोध, लोभ, मोह आदि) नष्ट हो जाते हैं। साथ ही, ब्राह्मण समाज प्रसन्न होता है, जिसका अर्थ है कि समाज में धर्म की स्थापना होती है। रामायण की कथा में रघुनन्दन (राम) का वर्णन है, जो स्वयं धर्म के अवतार हैं।
यह श्लोक एक प्रकार का आह्वान है – "तस्माच्छृणुध्वं रघुनाथचरितम्" – अर्थात् इसलिए हे लोगो! तुम सब रघुनाथ के चरित्र को सुनो। यह रामायण के पाठ की सार्वभौमिकता को दर्शाता है।
आध्यात्मिक दृष्टि से, विघ्न-नाश का अर्थ है साधना में आने वाली बाधाओं का दूर होना। दोष-नाश का अर्थ है मन की अशुद्धियों का क्षय। ब्राह्मणों की प्रसन्नता का अर्थ है वैदिक धर्म की स्थापना।
॥ रामायणश्रवणाद् विघ्नाः सर्वे नश्यन्ति देहिनाम् ॥
जय श्री राम 🙏