संक्षेप रामायण – श्लोक 63

संस्कृत श्लोक

य इदं कीर्तयेद् रामायणं सततमादरात् । स सर्वान् कामानाप्नोति प्रेत्य स्वर्गे महीयते ॥

हिंदी अनुवाद

जो यह रामायण सदा आदर के साथ कीर्तन करता है, वह सभी कामनाओं को प्राप्त करता है और मरने के बाद स्वर्ग में पूजित होता है।

अर्थ / व्याख्या

रामायण के कीर्तन से सभी इच्छाओं की पूर्ति और स्वर्ग की प्राप्ति।

टिप्पणी

यह श्लोक रामायण के नियमित पाठ के फल का वर्णन करता है।

॥ श्लोक ६३ – रामायण कीर्तन से कामनापूर्ति और स्वर्ग ॥

य इदं कीर्तयेद् रामायणं सततमादरात् । स सर्वान् कामानाप्नोति प्रेत्य स्वर्गे महीयते ॥
ya idaṃ kīrtayed rāmāyaṇaṃ satatam ādarāt | sa sarvān kāmān āpnoti pretya svarge mahīyate ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : जो यह रामायण सदा आदर के साथ कीर्तन करता है, वह सभी कामनाओं को प्राप्त करता है और मरने के बाद स्वर्ग में पूजित होता है।

🔹 English Translation : Whoever constantly recites this Ramayana with reverence, obtains all desires and after death is honored in heaven.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
यःसर्वनाम, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनजो
इदम्सर्वनाम, नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनइस
कीर्तयेत्विधिलिङ्, प्रथमपुरुष एकवचन (कीर्त् धातु)कीर्तन करे
रामायणम्नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनरामायण का
सततम्अव्ययसदा
आदरात्पुल्लिंग, पञ्चमी एकवचनआदर के साथ
सःसर्वनाम, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनवह
सर्वान्सर्वनाम, पुल्लिंग, द्वितीया बहुवचनसभी
कामान्पुल्लिंग, द्वितीया बहुवचनकामनाओं को
आप्नोतिलट्लकार, प्रथमपुरुष एकवचन (आप् धातु)प्राप्त करता है
प्रेत्यल्यबन्त अव्यय (प्र + इण्)मरने के बाद
स्वर्गेपुल्लिंग, सप्तमी एकवचनस्वर्ग में
महीयतेकर्मणि प्रयोग, प्रथमपुरुष एकवचन (मह् धातु)पूजित होता है

📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व

रामायण को सदा आदरपूर्वक कीर्तन करने से मनुष्य के सभी मनोरथ पूर्ण होते हैं। यहाँ "कीर्तन" का अर्थ है श्रद्धापूर्वक पाठ करना या गान करना। रामायण का कीर्तन करने से मनुष्य के भीतर सात्त्विक भाव जागते हैं और वह पुण्य संचय करता है। फलस्वरूप उसे मृत्यु के बाद स्वर्ग लोक में स्थान मिलता है और वहाँ देवताओं द्वारा उसका सम्मान होता है।

यह श्लोक रामायण की फलश्रुति का एक महत्वपूर्ण भाग है। यह हमें बताता है कि रामायण के प्रति आदरभाव और नियमित पाठ से न केवल इस लोक में सुख मिलता है, बल्कि परलोक भी सुधर जाता है।

आध्यात्मिक दृष्टि से, स्वर्ग की प्राप्ति का अर्थ है उच्च लोकों में जन्म या मोक्ष की ओर अग्रसर होना।

॥ रामायणकीर्तनात् कामाः सिध्यन्ति नात्र संशयः ॥

जय श्री राम 🙏