संक्षेप रामायण – श्लोक 65
संस्कृत श्लोक
आयुः कीर्तिं यशश्चैव धनं धान्यं सुतान् पशून् । प्रयच्छति नरेन्द्रस्य रामायणकथा शुभा ॥
हिंदी अनुवाद
रामायण की शुभ कथा राजाओं को आयु, कीर्ति, यश, धन, धान्य, पुत्र और पशु प्रदान करती है।
अर्थ / व्याख्या
रामायण की कथा राजाओं को आयु, कीर्ति, यश, धन, धान्य, पुत्र और पशु देती है।
टिप्पणी
यह श्लोक रामायण के पाठ के भौतिक लाभों का वर्णन करता है।
॥ श्लोक ६५ – रामायण से आयु, कीर्ति, धन आदि की प्राप्ति ॥
🔹 हिन्दी अनुवाद : रामायण की शुभ कथा राजाओं को आयु, कीर्ति, यश, धन, धान्य, पुत्र और पशु प्रदान करती है।
🔹 English Translation : The auspicious narrative of the Ramayana bestows upon kings long life, fame, glory, wealth, grain, sons, and cattle.
🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)
| संस्कृत | व्याकरण | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|
| आयुः | नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचन | आयु |
| कीर्तिम् | स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचन | कीर्ति |
| यशः | नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचन | यश |
| च | अव्यय | और |
| एव | अव्यय | ही |
| धनम् | नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचन | धन |
| धान्यम् | नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचन | धान्य |
| सुतान् | पुल्लिंग, द्वितीया बहुवचन | पुत्रों को |
| पशून् | पुल्लिंग, द्वितीया बहुवचन | पशुओं को |
| प्रयच्छति | लट्लकार, प्रथमपुरुष एकवचन (प्र + यम्) | प्रदान करती है |
| नरेन्द्रस्य | पुल्लिंग, षष्ठी एकवचन | राजाओं को (राजा के लिए) |
| रामायणकथा | स्त्रीलिंग, प्रथमा एकवचन | रामायण की कथा |
| शुभा | विशेषण, स्त्रीलिंग, प्रथमा एकवचन | शुभ |
📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व
इस श्लोक में रामायण के पाठ से होने वाले भौतिक लाभों का वर्णन है। यहाँ विशेष रूप से "नरेन्द्रस्य" कहकर राजाओं का उल्लेख किया गया है, किन्तु सामान्य जन के लिए भी यही फल है। रामायण की शुभ कथा सुनने से आयु (दीर्घायु), कीर्ति (प्रसिद्धि), यश (सम्मान), धन (सम्पत्ति), धान्य (अन्न), पुत्र (संतान) और पशु (गाय आदि) की प्राप्ति होती है। ये सभी प्राचीन भारतीय समाज में समृद्धि के मापदण्ड थे।
रामायण में राम के चरित्र के दर्शन से मनुष्य में सात्त्विकता आती है, जिसके कारण उसके कर्म शुभ होते हैं और उसे भौतिक सुखों की प्राप्ति स्वतः हो जाती है। यह श्लोक बताता है कि रामायण केवल आध्यात्मिक ही नहीं, भौतिक दृष्टि से भी लाभदायक है।
आध्यात्मिक दृष्टि से, यहाँ वर्णित वस्तुएँ आन्तरिक सम्पदा के प्रतीक भी हो सकती हैं – आयु का अर्थ है ध्यान की अवधि, कीर्ति का अर्थ है सद्गुणों की प्रसिद्धि, आदि।
॥ रामायणकथा पुण्या सर्वकामफलप्रदा ॥
जय श्री राम 🙏