संक्षेप रामायण – श्लोक 66
संस्कृत श्लोक
इतिहासमिमं पुण्यं रामायणमनुत्तमम् । यः पठेत् शृणुयाद् वापि स मुच्येत सर्वकिल्बिषैः ॥
हिंदी अनुवाद
इस पुण्यमय, अनुपम रामायण इतिहास को जो पढ़े या सुने, वह सब पापों से मुक्त हो जाता है।
अर्थ / व्याख्या
रामायण के पाठ या श्रवण से सभी पापों से मुक्ति।
टिप्पणी
यह श्लोक रामायण के पाठ-श्रवण के फल को दोहराता है।
॥ श्लोक ६६ – रामायण पाठ से पापमुक्ति ॥
🔹 हिन्दी अनुवाद : इस पुण्यमय, अनुपम रामायण इतिहास को जो पढ़े या सुने, वह सब पापों से मुक्त हो जाता है।
🔹 English Translation : Whoever reads or hears this sacred, unsurpassed historical epic called Ramayana, is freed from all sins.
🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)
| संस्कृत | व्याकरण | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|
| इतिहासम् | पुल्लिंग, द्वितीया एकवचन | इतिहास को |
| इमम् | सर्वनाम, पुल्लिंग, द्वितीया एकवचन | इस |
| पुण्यम् | विशेषण, पुल्लिंग, द्वितीया एकवचन | पुण्यमय |
| रामायणम् | नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचन | रामायण को |
| अनुत्तमम् | विशेषण, नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचन | अनुपम |
| यः | सर्वनाम, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचन | जो |
| पठेत् | विधिलिङ्, प्रथमपुरुष एकवचन (पठ् धातु) | पढ़े |
| शृणुयात् | विधिलिङ्, प्रथमपुरुष एकवचन (श्रु धातु) | सुने |
| वा | अव्यय | या |
| अपि | अव्यय | भी |
| सः | सर्वनाम, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचन | वह |
| मुच्येत | विधिलिङ् कर्मणि, प्रथमपुरुष एकवचन (मुच् धातु) | मुक्त हो जाता है |
| सर्वकिल्बिषैः | नपुंसकलिंग, तृतीया बहुवचन | सब पापों से |
📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व
यह श्लोक रामायण की पवित्रता और उसके प्रभाव को रेखांकित करता है। रामायण को "इतिहास" कहा गया है – जो घटित हुआ, वह इतिहास है। यह केवल कल्पना नहीं, बल्कि वास्तविक घटनाओं का वर्णन है। इसे "पुण्यम्" कहा गया है – पुण्य उत्पन्न करने वाला। और "अनुत्तमम्" – सर्वोत्तम, जिससे बढ़कर कुछ नहीं।
रामायण के पाठ या श्रवण मात्र से मनुष्य सभी पापों से मुक्त हो जाता है। यह फलश्रुति रामायण की महिमा को स्थापित करती है। पापों से मुक्त होने का अर्थ है कि उसके कर्मों के बुरे फल नहीं भोगने पड़ते, और वह आगे बढ़ सकता है।
आध्यात्मिक दृष्टि से, पापों से मुक्ति का अर्थ है अहंकार, काम, क्रोध आदि विकारों का निवृत्त होना, जिससे आत्मा शुद्ध होती है।
॥ रामायणं पठन्नित्यं सर्वपापैः प्रमुच्यते ॥
जय श्री राम 🙏