संक्षेप रामायण – श्लोक 23

संस्कृत श्लोक

तेषां रामो महातेजा लक्ष्मणश्च महाबलः । भरतः शत्रुघ्नश्चैव वीर्यवन्तो महारथाः ॥

हिंदी अनुवाद

उनमें राम महातेजस्वी थे, लक्ष्मण महाबली थे, तथा भरत और शत्रुघ्न भी महारथी और पराक्रमी थे।

अर्थ / व्याख्या

चारों भाइयों में से प्रत्येक की विशेष शक्ति का उल्लेख – राम में तेज, लक्ष्मण में बल, भरत-शत्रुघ्न में पराक्रम और युद्ध कौशल।

टिप्पणी

इस श्लोक में नारद जी ने चारों भाइयों के विशिष्ट गुण बताए हैं। राम सर्वगुण सम्पन्न थे, फिर भी उनका तेज अद्वितीय था। लक्ष्मण बल में अप्रतिम थे। भरत और शत्रुघ्न महारथी कहे गए, अर्थात् वे बड़े-बड़े रथों पर युद्ध करने में सक्षम थे।

॥ श्लोक २३ – प्रत्येक भाई के विशिष्ट गुण ॥

तेषां रामो महातेजा लक्ष्मणश्च महाबलः । भरतः शत्रुघ्नश्चैव वीर्यवन्तो महारथाः ॥
teṣāṃ rāmo mahātejā lakṣmaṇaśca mahābalaḥ | bharataḥ śatrughnaścaiva vīryavanto mahārathāḥ ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : उनमें राम महातेजस्वी थे, लक्ष्मण महाबली थे, तथा भरत और शत्रुघ्न भी महारथी और पराक्रमी थे।

🔹 English Translation : Among them, Rama was supremely energetic, Lakshmana was immensely strong, and Bharata and Shatrughna were also powerful great warriors.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
तेषाम्सर्वनाम, पुल्लिंग, षष्ठी बहुवचनउनमें (भाइयों में)
रामःपुल्लिंग, प्रथमा एकवचनराम
महातेजाःविशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनमहान तेज वाले
लक्ष्मणःपुल्लिंग, प्रथमा एकवचनलक्ष्मण
अव्ययऔर
महाबलःविशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनमहान बल वाले
भरतःपुल्लिंग, प्रथमा एकवचनभरत
शत्रुघ्नःपुल्लिंग, प्रथमा एकवचनशत्रुघ्न
चैवअव्यय (च + एव)और भी
वीर्यवन्तःविशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा बहुवचनपराक्रमी
महारथाःपुल्लिंग, प्रथमा बहुवचनमहारथी (बड़े रथ पर युद्ध करने वाले)

📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व

प्राचीन भारतीय युद्ध-कला में "महारथी" उस योद्धा को कहा जाता था जो अकेला ही हजारों योद्धाओं से युद्ध कर सकता था। यहाँ भरत और शत्रुघ्न को महारथी कहकर उनकी युद्ध-कला में निपुणता सूचित की गई है। राम के तेज का अर्थ उनके दिव्य प्रभाव और नेतृत्व क्षमता से है, जिसके आगे सभी नतमस्तक हो जाते थे। लक्ष्मण का बल अद्वितीय था – उन्होंने राम के साथ वनवास में अनेक राक्षसों का वध किया।

यह श्लोक हमें सिखाता है कि परिवार के प्रत्येक सदस्य में अलग-अलग विशेषताएँ हो सकती हैं, लेकिन सबका योगदान महत्वपूर्ण है। राम की तेजस्विता ने उन्हें राजा बनाया, लक्ष्मण के बल ने उनकी रक्षा की, और भरत-शत्रुघ्न के पराक्रम ने राज्य की सुरक्षा सुनिश्चित की।

इस श्लोक में अनुष्टुप् छंद के आठ-आठ अक्षर सुस्पष्ट हैं। "महातेजाः" और "महाबलः" में "महा" उपसर्ग विशेषता को दर्शाता है।

📖 पाठ की विधि एवं लाभ

इस श्लोक के पाठ से व्यक्ति में आत्मविश्वास, शक्ति और तेज का संचार होता है। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी है जो नेतृत्व या सुरक्षा से जुड़े कार्य करते हैं।

॥ तेज एव बलं चैव वीर्यं च – यही चारों भाइयों का सामर्थ्य था ॥

जय श्री राम 🙏