संक्षेप रामायण – श्लोक 24

संस्कृत श्लोक

सर्वे वेदविदः शूराः सर्वे लोकहिते रताः । सर्वे ज्ञानोपसम्पन्नाः सर्वे समुदिता गुणैः ॥

हिंदी अनुवाद

सभी वेदों के ज्ञाता थे, सभी वीर थे, सभी लोकहित में लगे रहते थे, सभी ज्ञान से सम्पन्न थे, और सभी गुणों से युक्त थे।

अर्थ / व्याख्या

चारों भाइयों में समान रूप से विद्यमान सद्गुणों का बखान – वेदज्ञान, वीरता, परोपकार, बुद्धि और सदाचार।

टिप्पणी

यह श्लोक चारों भाइयों में समान रूप से विद्यमान आदर्श गुणों का वर्णन करता है। वे केवल शारीरिक रूप से ही बलवान नहीं थे, बल्कि आध्यात्मिक और बौद्धिक रूप से भी सम्पन्न थे। वेदविद् होने का अर्थ है कि वे वैदिक धर्म के ज्ञाता और पालनकर्ता थे। ज्ञानोपसम्पन्न का तात्पर्य है कि वे लौकिक और पारलौकिक ज्ञान से परिपूर्ण थे। गुणैः समुदिता का अर्थ है कि वे सभी सद्गुणों की खान थे – दया, क्षमा, सत्य, शौर्य आदि।

॥ श्लोक २४ – समान गुणों का वर्णन ॥

सर्वे वेदविदः शूराः सर्वे लोकहिते रताः । सर्वे ज्ञानोपसम्पन्नाः सर्वे समुदिता गुणैः ॥
sarve vedavidaḥ śūrāḥ sarve lokahite ratāḥ | sarve jñānopasampannāḥ sarve samuditā guṇaiḥ ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : सभी वेदों के ज्ञाता थे, सभी वीर थे, सभी लोकहित में लगे रहते थे, सभी ज्ञान से सम्पन्न थे, और सभी गुणों से युक्त थे।

🔹 English Translation : All were knowers of the Vedas, all were valiant, all were engaged in the welfare of the people, all were endowed with knowledge, and all were adorned with virtues.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
सर्वेसर्वनाम, पुल्लिंग, प्रथमा बहुवचनसभी
वेदविदःविशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा बहुवचनवेदों के ज्ञाता
शूराःविशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा बहुवचनवीर
सर्वेसर्वनाम, पुल्लिंग, प्रथमा बहुवचनसभी
लोकहितेनपुंसकलिंग, सप्तमी एकवचनलोकहित में
रताःविशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा बहुवचनलगे हुए
सर्वेसर्वनाम, पुल्लिंग, प्रथमा बहुवचनसभी
ज्ञानोपसम्पन्नाःविशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा बहुवचनज्ञान से सम्पन्न (ज्ञान + उपसम्पन्न)
सर्वेसर्वनाम, पुल्लिंग, प्रथमा बहुवचनसभी
समुदिताःविशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा बहुवचनयुक्त, समन्वित
गुणैःपुल्लिंग, तृतीया बहुवचनगुणों से

📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व

इस श्लोक में "सर्वे" शब्द की चार बार आवृत्ति हुई है, जो इस बात पर बल देती है कि ये गुण चारों भाइयों में समान रूप से विद्यमान थे। यह भारतीय संस्कृति के उस आदर्श को प्रस्तुत करता है कि राजकुमारों को केवल शस्त्र विद्या ही नहीं, बल्कि शास्त्र विद्या और लोकव्यवहार में भी निपुण होना चाहिए। वेदविद् होने का अर्थ है धार्मिक आस्था और ज्ञान में पारंगत। लोकहित में रत रहना राजधर्म का मूल है। ज्ञानोपसम्पन्नता उनकी बुद्धि की परिपक्वता को दर्शाती है।

इस प्रकार का वर्णन रामायण को केवल एक महाकाव्य ही नहीं, बल्कि एक आदर्श जीवन-शैली का ग्रन्थ बनाता है। चारों भाइयों के गुण आज भी हमारे लिए अनुकरणीय हैं।

📖 पाठ की विधि एवं लाभ

इस श्लोक का पाठ करने से बुद्धि, वीरता और परोपकार की भावना जाग्रत होती है। यह विद्यार्थियों के लिए विशेष रूप से लाभदायक है, क्योंकि यह ज्ञान और गुणों के महत्व को बताता है।

॥ सर्वे भद्राणि पश्यन्तु – सबका कल्याण हो, यही चारों भाइयों की कामना थी ॥

जय श्री राम 🙏