संक्षेप रामायण – श्लोक 25

संस्कृत श्लोक

तेषां रामो महाबाहुः पितुर्नियमकारणात् । वनं गतो महावीर्यो हत्वा वालिनमाहवे ॥

हिंदी अनुवाद

उनमें महाबाहु राम पिता की आज्ञा के कारण वन को गए और वहाँ महापराक्रमी होकर युद्ध में वाली को मारा।

अर्थ / व्याख्या

राम के वनगमन का कारण (पितृवाक्य परिपालन) और वाली-वध की घटना का संकेत।

टिप्पणी

यह श्लोक रामायण की दो महत्वपूर्ण घटनाओं की ओर संकेत करता है – पिता के वचन की रक्षा के लिए राम का वनवास स्वीकार करना, और किष्किन्धा काण्ड में वाली का वध। यहाँ "नियमकारणात्" का अर्थ है पिता की आज्ञा का पालन करने के लिए। राम ने बिना किसी विरोध के वनवास स्वीकार किया, यह उनके चरित्र की महानता को दर्शाता है। वाली-वध उनके पराक्रम का प्रमाण है।

॥ श्लोक २५ – राम का वनगमन और वाली-वध ॥

तेषां रामो महाबाहुः पितुर्नियमकारणात् । वनं गतो महावीर्यो हत्वा वालिनमाहवे ॥
teṣāṃ rāmo mahābāhuḥ piturniyamakāraṇāt | vanaṃ gato mahāvīryo hatvā vālinamāhave ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : उनमें महाबाहु राम पिता की आज्ञा के कारण वन को गए और वहाँ महापराक्रमी होकर युद्ध में वाली को मारा।

🔹 English Translation : Among them, the mighty-armed Rama, due to his father is command, went to the forest, and being greatly valiant, slew Vali in battle.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
तेषाम्सर्वनाम, पुल्लिंग, षष्ठी बहुवचनउनमें (भाइयों में)
रामःपुल्लिंग, प्रथमा एकवचनराम
महाबाहुःविशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनमहान भुजाओं वाले
पितुःपुल्लिंग, षष्ठी एकवचनपिता के
नियमकारणात्नपुंसकलिंग, पञ्चमी एकवचनआज्ञा के कारण
वनम्नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनवन को
गतःभूतकृदन्त, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनगए हुए
महावीर्यःविशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनमहान पराक्रम वाले
हत्वाल्यबन्त अव्यय (हन् धातु)मारकर
वालिनम्पुल्लिंग, द्वितीया एकवचनवाली को
आहवेपुल्लिंग, सप्तमी एकवचनयुद्ध में

📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व

यह श्लोक राम के चरित्र के दो प्रमुख पहलुओं को उजागर करता है – पितृभक्ति और वीरता। राम ने चौदह वर्ष का वनवास बिना किसी शिकायत के स्वीकार किया, केवल पिता के वचन को सत्य रखने के लिए। यह उनके धर्मपरायणता का उत्कृष्ट उदाहरण है। वाली-वध की घटना किष्किन्धाकाण्ड में वर्णित है। वाली एक शक्तिशाली वानर राजा था, जिसे राम ने सुग्रीव की सहायता के लिए मारा। यहाँ "महावीर्यः" विशेषण राम के पराक्रम को दर्शाता है।

इस श्लोक में "महाबाहुः" राम की शारीरिक शक्ति का द्योतक है। बाहु (भुजा) का महत्व प्राचीन काल में युद्ध कौशल का सूचक था। राम की भुजाओं में असीम बल था।

यह श्लोक बालकाण्ड के संक्षेप रामायण भाग का हिस्सा है, जहाँ नारद जी सम्पूर्ण रामकथा का सार बता रहे हैं।

📖 पाठ की विधि एवं लाभ

इस श्लोक के पाठ से पितृभक्ति और कर्तव्यपरायणता की भावना जाग्रत होती है। यह उन लोगों के लिए विशेष लाभकारी है जो माता-पिता की आज्ञा का पालन करने में कठिनाई महसूस करते हैं।

॥ पितुर्वचनपालनं रामस्य परमो धर्मः ॥

जय श्री राम 🙏