संक्षेप रामायण – श्लोक 26

संस्कृत श्लोक

ततो रामः सह भ्रात्रा लक्ष्मणेन च धीमता । प्रविश्य दण्डकारण्यं जनस्थाने न्यवासयत् ॥

हिंदी अनुवाद

तत्पश्चात् राम ने धीमान् भाई लक्ष्मण के साथ दण्डकारण्य में प्रवेश किया और जनस्थान में निवास किया।

अर्थ / व्याख्या

राम और लक्ष्मण का दण्डकारण्य वन में प्रवेश तथा जनस्थान में निवास का उल्लेख।

टिप्पणी

राम ने वनवास के दौरान दण्डकारण्य में प्रवेश किया। यह क्षेत्र आज के नासिक (महाराष्ट्र) के आसपास माना जाता है। जनस्थान वह स्थान था जहाँ राक्षसों का आतंक था और जहाँ राम ने अनेक राक्षसों का वध किया। यहीं पर शूर्पणखा से उनका सामना हुआ और बाद में रावण ने सीता का हरण किया।

॥ श्लोक २६ – दण्डकारण्य प्रवेश और जनस्थान निवास ॥

ततो रामः सह भ्रात्रा लक्ष्मणेन च धीमता । प्रविश्य दण्डकारण्यं जनस्थाने न्यवासयत् ॥
tato rāmaḥ saha bhrātrā lakṣmaṇena ca dhīmatā | praviśya daṇḍakāraṇyaṃ janasthāne nyavāsayat ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : तत्पश्चात् राम ने धीमान् भाई लक्ष्मण के साथ दण्डकारण्य में प्रवेश किया और जनस्थान में निवास किया।

🔹 English Translation : Then Rama, along with his wise brother Lakshmana, entered the Dandaka forest and resided in Janasthana.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
ततःअव्ययतत्पश्चात्, उसके बाद
रामःपुल्लिंग, प्रथमा एकवचनराम
सहअव्ययसाथ
भ्रात्रापुल्लिंग, तृतीया एकवचनभाई के
लक्ष्मणेनपुल्लिंग, तृतीया एकवचनलक्ष्मण के
अव्ययऔर
धीमताविशेषण, पुल्लिंग, तृतीया एकवचनबुद्धिमान (के साथ)
प्रविश्यल्यबन्त अव्ययप्रवेश करके
दण्डकारण्यम्नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनदण्डकारण्य वन
जनस्थानेनपुंसकलिंग, सप्तमी एकवचनजनस्थान में
न्यवासयत्लुङ्लकार, प्रथमपुरुष एकवचन (नि + वस् धातु)निवास किया

📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व

दण्डकारण्य एक विशाल वन क्षेत्र था जो मध्य भारत से दक्षिण तक फैला हुआ था। यहाँ अनेक ऋषियों के आश्रम थे, जो राक्षसों के आतंक से पीड़ित थे। राम ने उनकी रक्षा का वचन दिया। जनस्थान, दण्डकारण्य का एक भाग था, जहाँ रावण का भाई खर-दूषण रहता था। राम ने वहाँ चौदह हजार राक्षसों का संहार किया, जिससे शूर्पणखा ने रावण से शिकायत की। यह घटना सीता हरण का मूल कारण बनी।

लक्ष्मण को "धीमता" (बुद्धिमान) कहा गया है, क्योंकि उन्होंने वनवास में राम की सेवा में बुद्धि और सतर्कता का परिचय दिया। वे हमेशा राम और सीता की रक्षा में तत्पर रहते थे।

📖 पाठ की विधि एवं लाभ

इस श्लोक के पाठ से संकटमोचन और रक्षा का भाव जाग्रत होता है। यह उन लोगों के लिए उपयोगी है जो कठिन परिस्थितियों में धैर्य और बुद्धि से काम लेना चाहते हैं।

॥ दण्डके यमुनातीरे रामः सीतां ददर्श ह ॥

जय श्री राम 🙏