संक्षेप रामायण – श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
तत्र तस्य महातेजा राक्षसान्तं चकार ह । ततो जनस्थानगतां विराधं नाम राक्षसम् ॥
हिंदी अनुवाद
वहाँ उस महातेजस्वी राम ने राक्षसों का अन्त कर दिया। तत्पश्चात् जनस्थान में आए विराध नामक राक्षस का भी वध किया।
अर्थ / व्याख्या
राम द्वारा जनस्थान में अनेक राक्षसों का वध, विशेष रूप से विराध राक्षस का उल्लेख।
टिप्पणी
विराध एक भयंकर राक्षस था जो जनस्थान में रहता था। उसने राम-लक्ष्मण पर आक्रमण किया और सीता का हरण कर लिया। राम ने उसे युद्ध में परास्त कर मार डाला। विराध के वध के बाद ही राम ने शरभंग, सुतीक्ष्ण आदि ऋषियों के आश्रमों में जाकर उनसे आशीर्वाद लिया। यह घटना राम के वनवास के प्रारम्भिक भाग की है।
॥ श्लोक २७ – विराध वध ॥
🔹 हिन्दी अनुवाद : वहाँ उस महातेजस्वी राम ने राक्षसों का अन्त कर दिया। तत्पश्चात् जनस्थान में आए विराध नामक राक्षस का भी वध किया।
🔹 English Translation : There, the supremely energetic Rama put an end to many demons. Then he also slew the demon named Viradha who had come to Janasthana.
🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)
| संस्कृत | व्याकरण | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|
| तत्र | अव्यय | वहाँ |
| तस्य | सर्वनाम, पुल्लिंग, षष्ठी एकवचन | उसके (राम के) द्वारा |
| महातेजाः | विशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचन | महान तेज वाले (राम) ने |
| राक्षसान्तम् | पुल्लिंग, द्वितीया एकवचन (राक्षस + अन्त) | राक्षसों का अन्त |
| चकार ह | लिट्लकार, प्रथमपुरुष एकवचन + निपात | किया |
| ततः | अव्यय | तत्पश्चात् |
| जनस्थानगताम् | विशेषण, पुल्लिंग, द्वितीया एकवचन | जनस्थान में आए हुए (विराध) को |
| विराधम् | पुल्लिंग, द्वितीया एकवचन | विराध राक्षस को |
| नाम | अव्यय | नामक |
| राक्षसम् | पुल्लिंग, द्वितीया एकवचन | राक्षस |
📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व
विराध वध की कथा अरण्यकाण्ड में विस्तार से आती है। विराध एक शक्तिशाली राक्षस था, जो वरदान के कारण लगभग अजेय था। उसने सीता का हरण कर लिया था, लेकिन राम और लक्ष्मण ने उसे युद्ध में परास्त कर दिया। विराध ने मरते समय राम को बताया कि वह वास्तव में एक गन्धर्व था, जो शापवश राक्षस योनि में था। राम के वध से उसे शाप से मुक्ति मिली। यह कथा दर्शाती है कि राम के स्पर्श से भी मुक्ति मिल सकती है।
इस श्लोक में "राक्षसान्तं चकार" का तात्पर्य है कि राम ने अनेक राक्षसों का वध किया, जिनमें विराध प्रमुख था। राम का उद्देश्य ऋषियों की रक्षा करना था, जो राक्षसों से त्रस्त थे।
📖 पाठ की विधि एवं लाभ
इस श्लोक के पाठ से शत्रुओं पर विजय पाने की शक्ति मिलती है। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी है जो किसी भय या आतंक से पीड़ित हैं।
॥ विराधं राक्षसं हत्वा रामः शान्तिमवाप्तवान् ॥
जय श्री राम 🙏