संक्षेप रामायण – श्लोक 28

संस्कृत श्लोक

ततश्चकार सुग्रीवं सखित्वं हनुमत्सखम् । वालिनश्च वधं तस्मै प्रतिज्ञातं महात्मना ॥

हिंदी अनुवाद

तत्पश्चात् हनुमान् को सखा बनाने वाले सुग्रीव से राम ने मित्रता की और महात्मा राम ने उससे वाली को मारने की प्रतिज्ञा की।

अर्थ / व्याख्या

राम-सुग्रीव मैत्री और वाली-वध की प्रतिज्ञा का उल्लेख।

टिप्पणी

यह श्लोक रामायण के किष्किन्धाकाण्ड की मुख्य घटना को दर्शाता है। राम ने वनवास के दौरान हनुमान् के माध्यम से सुग्रीव से भेंट की। सुग्रीव अपने भाई वाली से भयभीत था, जिसने उसका राज्य छीन लिया था। राम ने सुग्रीव को वाली का वध करने का वचन दिया और बदले में सुग्रीव ने सीता की खोज में सहायता का वादा किया। यह मित्रता ही आगे चलकर सीता की खोज और रावण-वध का आधार बनी।

॥ श्लोक २८ – राम-सुग्रीव मैत्री और वाली-वध प्रतिज्ञा ॥

ततश्चकार सुग्रीवं सखित्वं हनुमत्सखम् । वालिनश्च वधं तस्मै प्रतिज्ञातं महात्मना ॥
tataścakāra sugrīvaṃ sakhitvaṃ hanumatsakham | vālinaśca vadhaṃ tasmai pratijñātaṃ mahātmanā ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : तत्पश्चात् हनुमान् को सखा बनाने वाले सुग्रीव से राम ने मित्रता की और महात्मा राम ने उससे वाली को मारने की प्रतिज्ञा की।

🔹 English Translation : Then Rama befriended Sugriva, who had Hanuman as his friend, and the great-souled Rama promised him to slay Vali.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
ततःअव्ययतत्पश्चात्
चकारलिट्लकार, प्रथमपुरुष एकवचन (कृ धातु)किया
सुग्रीवम्पुल्लिंग, द्वितीया एकवचनसुग्रीव से
सखित्वम्नपुंसकलिंग, द्वितीया एकवचनमित्रता
हनुमत्सखम्विशेषण, पुल्लिंग, द्वितीया एकवचनहनुमान् को सखा बनाने वाले (सुग्रीव)
वालिनःपुल्लिंग, षष्ठी एकवचनवाली का
अव्ययऔर
वधम्पुल्लिंग, द्वितीया एकवचनवध
तस्मैसर्वनाम, पुल्लिंग, चतुर्थी एकवचनउससे (सुग्रीव से)
प्रतिज्ञातम्कृदन्त, नपुंसकलिंग, प्रथमा एकवचनप्रतिज्ञा की गई
महात्मनाविशेषण, पुल्लिंग, तृतीया एकवचनमहात्मा (राम) ने

📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व

राम और सुग्रीव की मित्रता आदर्श मित्रता का उदाहरण है। यह परस्पर सहयोग और विश्वास पर आधारित थी। हनुमान् की भूमिका अत्यन्त महत्वपूर्ण थी, क्योंकि उन्होंने ही राम और सुग्रीव का मिलन कराया। यहाँ "हनुमत्सखम्" विशेषण सुग्रीव के लिए है, जो हनुमान् को सखा बनाने वाला है, अर्थात् हनुमान् उसके परम मित्र थे।

राम ने वाली-वध की प्रतिज्ञा की। वाली अत्यन्त शक्तिशाली था, लेकिन राम ने उसे मारकर सुग्रीव को उसका राज्य दिलाया। यह घटना धर्म की स्थापना और मित्रधर्म के निर्वाह का उदाहरण है।

इस श्लोक में "महात्मना" शब्द राम की महानता को दर्शाता है। वे केवल योद्धा ही नहीं, बल्कि धर्म के ज्ञाता और करुणामयी थे।

📖 पाठ की विधि एवं लाभ

इस श्लोक के पाठ से सच्ची मित्रता और वचनबद्धता की भावना जाग्रत होती है। यह उन लोगों के लिए विशेष लाभकारी है जो व्यवसाय या राजनीति में साझेदारी करते हैं।

॥ सुहृदं सुग्रीवं कृत्वा रामः प्रतिज्ञामपालयत् ॥

जय श्री राम 🙏