संक्षेप रामायण – श्लोक 29

संस्कृत श्लोक

स च तं समरे हत्वा वालिनं वानरर्षभम् । सुग्रीवमेव तं राज्ये राघवः प्रत्यपादयत् ॥

हिंदी अनुवाद

उन राघव ने युद्ध में वानरश्रेष्ठ वाली को मारकर सुग्रीव को ही राज्य पर प्रतिष्ठित किया।

अर्थ / व्याख्या

राम द्वारा वाली का वध और सुग्रीव का पुनः राज्याभिषेक।

टिप्पणी

यह श्लोक राम द्वारा वाली-वध के बाद सुग्रीव को राज्य सौंपने की घटना को दर्शाता है। राम ने वाली को युद्ध में मारा, जो अन्यायी और अधर्मी हो गया था। सुग्रीव ने राज्य प्राप्त किया और कृतज्ञता स्वरूप राम की सहायता के लिए वानर सेना जुटाई। यह घटना राम के न्याय और मित्रता के प्रति समर्पण को प्रदर्शित करती है।

॥ श्लोक २९ – वाली-वध और सुग्रीव का राज्याभिषेक ॥

स च तं समरे हत्वा वालिनं वानरर्षभम् । सुग्रीवमेव तं राज्ये राघवः प्रत्यपादयत् ॥
sa ca taṃ samare hatvā vālinaṃ vānararṣabham | sugrīvameva taṃ rājye rāghavaḥ pratyapādayat ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : उन राघव ने युद्ध में वानरश्रेष्ठ वाली को मारकर सुग्रीव को ही राज्य पर प्रतिष्ठित किया।

🔹 English Translation : And that Raghava (Rama), having slain Vali, the chief of monkeys, in battle, established Sugriva himself on the throne.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
सःसर्वनाम, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनउन्होंने (राम)
अव्ययऔर
तम्सर्वनाम, पुल्लिंग, द्वितीया एकवचनउस (वाली) को
समरेपुल्लिंग, सप्तमी एकवचनयुद्ध में
हत्वाल्यबन्त अव्यय (हन् धातु)मारकर
वालिनम्पुल्लिंग, द्वितीया एकवचनवाली को
वानरर्षभम्पुल्लिंग, द्वितीया एकवचन (वानर + ऋषभ)वानरों में श्रेष्ठ
सुग्रीवम्पुल्लिंग, द्वितीया एकवचनसुग्रीव को
एवअव्ययही
तम्सर्वनाम, पुल्लिंग, द्वितीया एकवचनउस (राज्य) पर
राज्येनपुंसकलिंग, सप्तमी एकवचनराज्य पर
राघवःपुल्लिंग, प्रथमा एकवचनराघव (राम)
प्रत्यपादयत्लुङ्लकार, प्रथमपुरुष एकवचन (प्रति + आ + पद् णिच्)पुनः स्थापित किया

📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व

वाली-वध रामायण की विवादास्पद घटनाओं में से एक है, क्योंकि राम ने छिपकर वाली पर बाण मारा था। परन्तु वाली के पास अपने छोटे भाई की पत्नी पर अधिकार करने का पाप था, और उसने ऋष्यमूक पर्वत पर रह रहे सुग्रीव को अपमानित किया था। राम ने धर्म की रक्षा के लिए यह कदम उठाया। इस घटना ने यह सिद्ध किया कि राम मित्र के प्रति अपने कर्तव्यों का पालन करते हैं।

सुग्रीव के राज्याभिषेक के बाद उसने राम की सहायता के लिए वानर सेना एकत्रित की। यही सेना आगे चलकर लंका पर चढ़ाई करेगी।

इस श्लोक में "वानरर्षभम्" विशेषण वाली के लिए है, जो उसकी श्रेष्ठता को दर्शाता है, फिर भी वह धर्म से च्युत होने के कारण मारा गया।

📖 पाठ की विधि एवं लाभ

इस श्लोक के पाठ से न्याय और मित्रता के प्रति समर्पण की भावना जाग्रत होती है। यह उन लोगों के लिए लाभकारी है जो किसी अधर्मी व्यक्ति से पीड़ित हैं।

॥ वालिनं स निहत्याथ सुग्रीवं स्थापयन्नृपे ॥

जय श्री राम 🙏