संक्षेप रामायण – श्लोक 38
संस्कृत श्लोक
ते हनूमन्तमासाद्य राक्षसाः क्रोधमूर्छिताः । निगृह्य निन्युर्लङ्केशं रावणं भीमदर्शनम् ॥
हिंदी अनुवाद
वे क्रोध से मूर्छित राक्षस हनुमान् के पास पहुँचकर उन्हें पकड़कर भयंकर दर्शन वाले लंकेश रावण के पास ले गए।
अर्थ / व्याख्या
राक्षसों ने हनुमान् को पकड़कर रावण के समक्ष प्रस्तुत किया।
टिप्पणी
यह श्लोक हनुमान् के बंदी बनाए जाने और रावण के दरबार में प्रस्तुत किए जाने की घटना को दर्शाता है।
॥ श्लोक ३८ – हनुमान् का रावण के समक्ष प्रस्तुत होना ॥
🔹 हिन्दी अनुवाद : वे क्रोध से मूर्छित राक्षस हनुमान् के पास पहुँचकर उन्हें पकड़कर भयंकर दर्शन वाले लंकेश रावण के पास ले गए।
🔹 English Translation : Those demons, overcome with rage, approached Hanuman, seized him, and brought him to the lord of Lanka, the fearsome Ravana.
🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)
| संस्कृत | व्याकरण | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|
| ते | सर्वनाम, पुल्लिंग, प्रथमा बहुवचन | वे |
| हनूमन्तम् | पुल्लिंग, द्वितीया एकवचन | हनुमान् को |
| आसाद्य | ल्यबन्त अव्यय (आ + सद्) | प्राप्त करके, पास पहुँचकर |
| राक्षसाः | पुल्लिंग, प्रथमा बहुवचन | राक्षस |
| क्रोधमूर्छिताः | विशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा बहुवचन | क्रोध से मूर्छित |
| निगृह्य | ल्यबन्त अव्यय (नि + ग्रह्) | पकड़कर |
| निन्युः | लिट्लकार, प्रथमपुरुष बहुवचन (नी धातु) | ले गए |
| लङ्केशम् | पुल्लिंग, द्वितीया एकवचन (लङ्का + ईश) | लंकेश (रावण) के पास |
| रावणम् | पुल्लिंग, द्वितीया एकवचन | रावण के पास |
| भीमदर्शनम् | विशेषण, पुल्लिंग, द्वितीया एकवचन | भयंकर दर्शन वाले |
📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व
हनुमान् ने अशोक वाटिका विध्वंस के बाद अनेक राक्षसों को मार डाला। तब रावण ने इन्द्रजित को बुलाया। इन्द्रजित ने ब्रह्मास्त्र का प्रयोग किया, जिससे हनुमान् बंध गए। राक्षस उन्हें रस्सियों से बाँधकर रावण के दरबार में ले गए। रावण ने हनुमान् से पूछा कि वे कौन हैं और क्यों आए हैं। हनुमान् ने अपना परिचय देते हुए राम का संदेश सुनाया और रावण को सीता को लौटाने की सलाह दी। इस पर रावण क्रोधित हो गया और हनुमान् को मार डालने का आदेश दिया। किन्तु विभीषण ने समझाया कि दूत को मारना अनुचित है, अतः रावण ने हनुमान् की पूँछ में आग लगाने का आदेश दिया।
यह घटना हनुमान् की वीरता और रामभक्ति को दर्शाती है। उन्होंने निडर होकर रावण के सामने राम की महिमा का बखान किया।
॥ न बिभेमि रावणात् – हनुमान् को रावण का भय नहीं ॥
जय श्री राम 🙏