संक्षेप रामायण – श्लोक 37
संस्कृत श्लोक
स च विध्वंसयामास पुष्पितां तां वनस्थलीम् । राक्षसैरभिसंरुद्धो ग्रहीतुं च प्रचक्रमुः ॥
हिंदी अनुवाद
उन्होंने (हनुमान् ने) उस पुष्पित वनस्थली (अशोक वाटिका) को नष्ट कर दिया, और राक्षसों से घिर जाने पर उन्होंने उसे पकड़ने का प्रयास किया।
अर्थ / व्याख्या
हनुमान् ने अशोक वाटिका को नष्ट किया, जिससे राक्षसों ने उन्हें घेर लिया और पकड़ने का प्रयास किया।
टिप्पणी
यह श्लोक हनुमान् के लंका दहन से पूर्व की घटना का वर्णन करता है।
॥ श्लोक ३७ – अशोक वाटिका विध्वंस और राक्षसों का आक्रमण ॥
🔹 हिन्दी अनुवाद : उन्होंने (हनुमान् ने) उस पुष्पित वनस्थली (अशोक वाटिका) को नष्ट कर दिया, और राक्षसों से घिर जाने पर उन्होंने उसे पकड़ने का प्रयास किया।
🔹 English Translation : He (Hanuman) destroyed that flowery forest (Ashoka grove), and being surrounded by demons, they tried to capture him.
🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)
| संस्कृत | व्याकरण | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|
| सः | सर्वनाम, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचन | उन्होंने (हनुमान्) |
| च | अव्यय | और |
| विध्वंसयामास | लिट्लकार, प्रथमपुरुष एकवचन (वि + ध्वन्स् + आम् + कृ) | नष्ट कर दिया |
| पुष्पिताम् | विशेषण, स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचन | पुष्पित |
| ताम् | सर्वनाम, स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचन | उस |
| वनस्थलीम् | स्त्रीलिंग, द्वितीया एकवचन | वनस्थली को |
| राक्षसैः | पुल्लिंग, तृतीया बहुवचन | राक्षसों द्वारा |
| अभिसंरुद्धः | भूतकृदन्त, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचन | घिर जाने पर |
| ग्रहीतुम् | तुमुन्नन्त अव्यय (ग्रह् धातु) | पकड़ने के लिए |
| च | अव्यय | और |
| प्रचक्रमुः | लिट्लकार, प्रथमपुरुष बहुवचन (प्र + क्रम्) | प्रयास किया (उन्होंने) |
📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व
सीता से मिलने और उन्हें सांत्वना देने के बाद, हनुमान् ने सोचा कि वे राक्षसों से युद्ध करके अपनी शक्ति का परिचय दें और राम के आने का संकेत दें। उन्होंने अशोक वाटिका के वृक्षों को उखाड़ना और तोड़ना शुरू कर दिया। इससे राक्षस क्रोधित हो गए और उन्होंने हनुमान् पर आक्रमण कर दिया। हनुमान् ने अनेक राक्षसों को मार डाला। अन्त में रावण के पुत्र अक्षयकुमार को हनुमान् ने मारा, तब रावण ने मेघनाद (इन्द्रजित) को भेजा। इन्द्रजित ने ब्रह्मास्त्र से हनुमान् को बाँध दिया। यह घटना हनुमान् के पराक्रम और राम के प्रति उनकी निष्ठा को दर्शाती है।
राक्षसों का हनुमान् को पकड़ने का प्रयास असफल रहा, क्योंकि वे उनकी शक्ति का सामना नहीं कर सके। अन्ततः वे हनुमान् को पकड़ने में सफल हुए, किन्तु वह भी उनकी इच्छा से हुआ, क्योंकि हनुमान् रावण से मिलना चाहते थे।
॥ हनूमतः पराक्रमः – हनुमान् का पराक्रम ॥
जय श्री राम 🙏