संक्षेप रामायण – श्लोक 44

संस्कृत श्लोक

तत्र कुम्भकर्णो नाम राक्षसो भीमविक्रमः । रामेण निहतो युद्धे वानरैश्च महाबलैः ॥

हिंदी अनुवाद

उस युद्ध में कुम्भकर्ण नामक भीम पराक्रमी राक्षस राम द्वारा और महाबलशाली वानरों के द्वारा मारा गया।

अर्थ / व्याख्या

कुम्भकर्ण का वध राम और वानरों ने मिलकर किया।

टिप्पणी

यह श्लोक कुम्भकर्ण नामक राक्षस के वध का उल्लेख करता है।

॥ श्लोक ४४ – कुम्भकर्ण वध ॥

तत्र कुम्भकर्णो नाम राक्षसो भीमविक्रमः । रामेण निहतो युद्धे वानरैश्च महाबलैः ॥
tatra kumbhakarṇo nāma rākṣaso bhīmavikramaḥ | rāmeṇa nihato yuddhe vānaraiśca mahābalaiḥ ||

🔹 हिन्दी अनुवाद : उस युद्ध में कुम्भकर्ण नामक भीम पराक्रमी राक्षस राम द्वारा और महाबलशाली वानरों के द्वारा मारा गया।

🔹 English Translation : In that war, the demon named Kumbhakarna, of terrific prowess, was slain by Rama along with mighty monkeys.

🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)

संस्कृतव्याकरणहिन्दी अर्थ
तत्रअव्ययउस (युद्ध) में
कुम्भकर्णःपुल्लिंग, प्रथमा एकवचनकुम्भकर्ण
नामअव्ययनामक
राक्षसःपुल्लिंग, प्रथमा एकवचनराक्षस
भीमविक्रमःविशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचनभीम पराक्रम वाला
रामेणपुल्लिंग, तृतीया एकवचनराम द्वारा
निहतःभूतकृदन्त, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचन (नि + हन्)मारा गया
युद्धेनपुंसकलिंग, सप्तमी एकवचनयुद्ध में
वानरैःपुल्लिंग, तृतीया बहुवचनवानरों द्वारा
अव्ययऔर
महाबलैःविशेषण, पुल्लिंग, तृतीया बहुवचनमहाबलशाली

📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व

कुम्भकर्ण रावण का छोटा भाई था, जो ब्रह्मा के वरदान के कारण छह मास सोता और एक दिन जागता था। उसका शरीर अत्यन्त विशाल और बलशाली था। रावण ने उसे युद्ध के लिए जगाया। कुम्भकर्ण ने रावण को समझाया कि उसने अधर्म किया है, फिर भी वह राक्षसधर्म के कारण युद्ध करने को तैयार हो गया। युद्ध में उसने वानर सेना को रौंद डाला और लक्ष्मण को भी घायल कर दिया। अन्ततः राम ने अपने बाणों से उसकी विशाल भुजाओं को काटा और उसका वध किया।

कुम्भकर्ण का चरित्र अत्यन्त रोचक है। वह जानता था कि रावण अधर्मी है, फिर भी वह भाई के प्रति वफादार रहा। उसका वध राम के पराक्रम को दर्शाता है। यह घटना बताती है कि बल और पराक्रम के साथ-साथ धर्म का साथ होना आवश्यक है।

आध्यात्मिक दृष्टि से, कुम्भकर्ण तमोगुण का प्रतीक है, जो सुषुप्ति (नींद) में रहता है और जाग्रत होने पर विनाश करता है। उसका वध तमोगुण के नाश और सत्वगुण (राम) की विजय को दर्शाता है।

📖 पाठ की विधि एवं लाभ

इस श्लोक का पाठ करने से व्यक्ति में निर्भयता और साहस का संचार होता है। यह विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभदायक है जो भय या आलस्य से ग्रसित हैं।

॥ कुम्भकर्णो हतो युद्धे रामबाणैर्महाबलः ॥

जय श्री राम 🙏