संक्षेप रामायण – श्लोक 45
संस्कृत श्लोक
इन्द्रजिन्नाम राक्षसो मायावी युद्धदुर्मदः । लक्ष्मणं शक्तिभिन्नाङ्गं चकार रणमूर्धनि ॥
हिंदी अनुवाद
इन्द्रजित् नामक मायावी और युद्ध में दुर्मद राक्षस ने रणभूमि में लक्ष्मण को शक्ति से बींधकर उनके अंगों को पीड़ित कर दिया।
अर्थ / व्याख्या
इन्द्रजित ने लक्ष्मण पर शक्ति का प्रहार किया, जिससे वे मूर्छित हो गए।
टिप्पणी
यह श्लोक इन्द्रजित के पराक्रम और लक्ष्मण के घायल होने का वर्णन करता है।
॥ श्लोक ४५ – इन्द्रजित का आक्रमण और लक्ष्मण का घायल होना ॥
🔹 हिन्दी अनुवाद : इन्द्रजित् नामक मायावी और युद्ध में दुर्मद राक्षस ने रणभूमि में लक्ष्मण को शक्ति से बींधकर उनके अंगों को पीड़ित कर दिया।
🔹 English Translation : The demon named Indrajit, who was skilled in illusion and intoxicated with war, wounded Lakshmana with his Shakti (divine weapon) on the battlefield.
🔍 शब्दार्थ (Word by Word Meaning)
| संस्कृत | व्याकरण | हिन्दी अर्थ |
|---|---|---|
| इन्द्रजित् | पुल्लिंग, प्रथमा एकवचन | इन्द्रजित् (मेघनाद) |
| नाम | अव्यय | नामक |
| राक्षसः | पुल्लिंग, प्रथमा एकवचन | राक्षस |
| मायावी | विशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचन | मायावी (माया में निपुण) |
| युद्धदुर्मदः | विशेषण, पुल्लिंग, प्रथमा एकवचन | युद्ध में दुर्मद (घमण्डी) |
| लक्ष्मणम् | पुल्लिंग, द्वितीया एकवचन | लक्ष्मण को |
| शक्तिभिन्नाङ्गम् | विशेषण, पुल्लिंग, द्वितीया एकवचन (शक्ति + भिन्न + अङ्ग) | शक्ति से भिन्न (घायल) अंगों वाला |
| चकार | लिट्लकार, प्रथमपुरुष एकवचन (कृ धातु) | किया |
| रणमूर्धनि | पुल्लिंग, सप्तमी एकवचन (रण + मूर्धन्) | रणभूमि में |
📜 ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक महत्व
इन्द्रजित (मेघनाद) रावण का पुत्र था और अत्यन्त शक्तिशाली योद्धा था। उसने इन्द्र को पराजित करके "इन्द्रजित" की उपाधि प्राप्त की थी। वह माया युद्ध में निपुण था। युद्ध के दौरान उसने अदृश्य होकर राम-लक्ष्मण पर नागपाश का प्रयोग किया, जिससे वे बंध गए। बाद में गरुड़ के आने से वे मुक्त हुए। अन्ततः उसने लक्ष्मण पर शक्ति (एक दिव्य अस्त्र) से प्रहार किया, जिससे लक्ष्मण मूर्छित हो गए और प्राण संकट में पड़ गए। यह घटना रामायण का अत्यन्त मार्मिक प्रसंग है।
लक्ष्मण के घायल होने पर राम अत्यन्त व्याकुल हुए। तब हनुमान् ने संजीवनी बूटी लाने का बीड़ा उठाया। यह घटना हनुमान् की वीरता और समर्पण को दर्शाती है।
इन्द्रजित का चरित्र अत्यन्त जटिल है। वह एक महान योद्धा था, किन्तु अधर्म के पक्ष में लड़ रहा था। उसका अन्ततः लक्ष्मण के हाथों वध हुआ।
📖 पाठ की विधि एवं लाभ
इस श्लोक का पाठ करने से शत्रुओं के मायाजाल से बचने की शक्ति मिलती है। यह उन लोगों के लिए विशेष लाभदायक है जो धोखे या छल का सामना कर रहे हैं।
॥ शक्तिभिन्नं लक्ष्मणं दृष्ट्वा रामः शोकाकुलोऽभवत् ॥
जय श्री राम 🙏